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100 सालों में भी नहीं बदली पयर्टकों की पसंदीदा भारत की ये 10 ऐत‍िहास‍िक जगहें

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भारत में वक्‍त के साथ हर क्षेत्र में बदलाव हुए लेक‍िन 10 ऐत‍िहास‍िक जगहें हैं जो प‍िछले 100 सालों में नहीं बदली हैं। खास बात यह है क‍ि ये स्‍थान पयर्टकों को आज भी पसंद हैं…

एंबर फोर्ट, जयपुर: 

भारत के ऐत‍िहास‍िक और 100 सालों में न बदलने वाले स्‍थानों में सबसे पहला नाम एंबर फोर्ट जयपुर का है। जयपुर स्‍थति एंबर किला, जिसे एंबर पैलेस भी कहा जाता है। इस एंबर क‍िले ने मध्यकालीन भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह किला राजपूतों की सच्ची शाही जीवन शैली को दर्शाता है। इसके अलावा एंबर पैलेस हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला का एक आदर्श संलयन है। यहां जाने वाले पयर्टकों का मानना है क‍ि पर‍िवार के साथ घूमने का यह एक अच्छा व साफ-सुथरा स्थान है। यहां पर इति‍हास को बेहद करीब से जानने का मौका म‍िलता है।


हंपी, कर्नाटक: 

कर्नाटक के उत्तर में स्थित हंपी भी बेहद खूबसूरत जगह है। खंडहरों के बीच बसा यह शहर तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है। समुद्र तल से 467 मीटर ऊपर बसे हंपी को विजयनगर साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र माना जाता है। यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल के रूप में विंपल मंदिर और हंपी शहर के अन्य अवशेषों को शाम‍िल क‍ि‍या है। पयर्टकों का मानना होता है क‍ि प्राचीन सभ्यता को देखना है तो इससे बेहतर जगह कोई और नहीं हो सकती है। प्राचीन भारत में भारत क‍ितना खूबसूरत था इसका अहसास यहां पर जाने के बाद ही होगा।

कैथोलिक वर्ल्‍ड, गोवा: 

कैथोलिक वर्ल्‍ड गोवा की वह प्रस‍िद्ध जगह है जहां पर सेंट फ्रांसिसी जेवियर दफनाए गए थे। जब तक भारत ने 1961 में कब्‍जा नहीं क‍िया था तब तक गोवा 450 वर्षों से एक पुर्तगाली कॉलोनी था। इससे आज भी यह विरासत अपने चर्चों और पुराने घरों की वास्तुकला और उसके कस्बों की संस्कृति को अपने अंदर समेटे हुए है। यहां पर नए साल के समारोह के अलावा, 3 दिवसीय गोवा कार्निवल और सेंट फ्रांसिस पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं। पयर्टकों का कहना है क‍ि गोवा क‍ितनी बार भी जाओं मन नहीं भरता है। अंजुना बीच, कैंडोलीम बीच, यूवी बार और हिल टॉप रिसॉर्ट घूमने का एक अलग ही मजा है।

सांची, मध्‍यप्रदेश:

मध्‍यप्रदेश रायसीन जिले में स्थित सांची एक छोटा गांव है। यह अपने बुद्ध स्तूप और स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। यह एक पहाड़ी के नक्शेकदम पर स्थित है और कई बौद्ध स्मारकों के लिए मान्यता प्राप्त है। यहां पर कई मठ, स्तूप, खंभे, पवित्र तीर्थ हैं जो 3 शताब्दी ईसा पूर्व से 12 वीं शताब्दी तक के हैं। स्मारकों पर शानदार नक्काशी उस समय के समय बौद्ध मिथकों और सांची की संस्कृति को प्रतिबिंबित करती है। सांची यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल के अंतर्गत है। यहां घूमने वालों का कहना है क‍ि बौद्धों और प्राचीन इतिहास प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल स्तूप नंबर 2 इस स्तूप में चार प्रवेशद्वार द्वार हैं। प्रत्येक द्वार ने महात्मा बुद्ध के जीवन के बारे में खूबसूरती से डिजाइन किया है। कुल म‍िलाकर बदले भारत में आज भी इसका खास स्‍थान है।

पांडिचेरी, तमि‍लनाडू: 

तमिलनाडू स्‍थित पांडिचेरी भी प्राचीन भारत की एक अनोखी छव‍ि पेश करता है। हालांक‍ि इस जगह क‍ि खास‍ियत यह है कि‍ फ्रांस के चोले में ढका है। पांडिचेरी 1673 में फ्रांसीसी शासन के अधीन आया और तब से यह ब्रिटिश और फ्रेंच के बीच की लड़ाई के लिए स्थल बन गया था। यहां मुख्य तौर पर चार बेहद खूबसूरत बीच प्रोमिनेंट बीच, पेराडाइस बीच, अरोविले बीच, सैरीनीटी हैं। जि‍नके क‍िनारे योग करने का एक अलग ही मजा है।  इसके अलावा यहां पर 1926 में अरबिंदो आश्रम की स्थापना हुई है। पयर्टकों का कहना है क‍ि इस दौड़-भाग की जिंदगी से दूर अध्यात्म शक्ति को बढ़ाने ल‍िए इससे उपर्युक्‍त स्‍थान शायद ही कोई दूसरा हो। यहां पर दुन‍िया भर से लोग अध्यात्म की तलाश में आते हैं।

लेपक्षी, आंध्र प्रदेश:

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपक्षी एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक गांव है। प‍िछले कई वर्ष पहले यहां पर विजयनगर के राजाओं का शासन था। ज‍िससे साम्राज्य के कई विरासत स्थल और मंदिर यहां आज भी स्‍थि‍त हैं। वहीं विजयनगर शासकों के अलावा, इस क्षेत्र पर कुतुब शाहिस, मुगल और कुड्डापह के नवाब भी शासन करते थे। हैदर अली और टीपू सुल्तान ने भी उस क्षेत्र का अधिग्रहण किया, जिसे बाद में अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था। ऐसे में यहां आने वाले पयर्टकों का कहना है कि‍ यहां आने के बाद लगता है क‍ि भारत आज भी वही पुराना भारत है। यहां पर पर‍िवार के साथ घूमने में क‍िसी तरह की कोई परेशानी नही हैं।

मराठा पैलेस, दरबार हॉल: 

मराठा पैलेस, दरबार हॉल भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक है। यह चोल किंग के समय से ही अस्तित्व में है। यहां पर आज भी कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को म‍िलता है। यहां पर एक पौराणिक पृष्ठभूमि ‘कविरी-थाला-पुरानाम’ है। मातृ कावेरी के रूप में यह एक प्रस‍िद्ध मंद‍िर है। इसके अलावा यहां पर ग्रैंड एनाइकट, द बिग टेंपल, सर्फोजी महल पुस्तकालय आदि जैसे स्मारक देखने में इत‍िहास की कहानी बयां करते हैं। यहां घूम चुके लोगों का कहना है कि‍ यहां पर खाने से लेकर घूमने का अलग ही मजा है। पर्यटकों के ल‍िए एक से बढ़कर एक दक्षिण भारतीय व्यंजन व‍िकल्‍प में हैं।

साइंस सिटी, कोलकाता: 

प्राचीन भारत की खूबसूरती देखने के शौकीन लोगों को कोलकाता में बिरला प्लानेटेरियम, भारतीय संग्रहालय का दौरा करना चाह‍िए। अद्वितीय जीवाश्मों, बौद्ध गांधार कला और टैगोर हाउस, जोरासांको यहां की खूबसूरत जगहों में एक हैं। इसके अलावा यहां पर साइंस सिटी में यात्रियों को टाइम मशीन, स्पेस थियेटर और स्पेस फ्लाईट सिम्युलेटर भी पयर्टकों के ल‍िए व‍िशेष स्‍थान है। भारत का यह एक इकलौता शहर है क‍ि यहां पर बड़ी संख्‍या में पयर्टक ट्राम में सवारी का आनंद ले सकते हैं। पयर्टकों का कहना है यहां पर घूमने पर ऐसा लगता है क‍ि आप कल्‍पनाओं वाले भारत में घूम रहे हैं और ये जगहें कभी न बदलें वहीं अच्‍छा है।

खजुराहो, मध्य प्रदेश: 

खजुराहो, मध्य प्रदेश राज्य में छतरपुर जिले में स्थित एक प्राचीन शहर है। खजुराहो शब्द संस्कृत शब्द ‘खजुर’ से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘तारीख हथेलियां’। आज, खजुराहो अपने मंदिरों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जो कि मध्ययुगीन हिंदू और जैन काल से संबंधित है। मंदिरों को चंदेल सम्राटों द्वारा बनाया गया था जिन्हें मूल रूप से राजस्थान के बर्गुजार राजपूत कहते थे। पयर्टकों का मानना है क‍ि यहां पर अपने पार्टनर से म‍िलने और उसके साथ घूमने का अलग ही मजा है। यहां मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। ऐसा लगता है क‍ि प्राचीन लोगों का मन बहुत अच्छा था। इसलिए उन्होंने इस तरह के दिमाग को वास्‍तुकला में इस्तेमाल किया।

जोधपुर: 

इस शहर को ‘थार के गेटवे’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह थार रेगिस्तान की सीमा पर स्थित है। इसे ‘सन सिटी’ नाम से भी जाना जाता है क्‍योंक‍ि यह पूरे साल तपता रहता है। वहीं इसका एक और नाम ‘ब्लू सिटी’ भी है, क्योंकि मेहरणगढ़ किले के आसपास के घरों में नीले रंग के चित्र हैं। पयर्टकों का कहना है कि‍ यहां एक असाधारण माहौल के साथ एक विदेशी शहर की तरह महसूस होता है। केलाना झील, जनाणा महल, जसवंत सागर बांध घूमना और सुंदरता न‍िहारना काफी अच्‍छा लगता है। इसके हर कोने को घूमने में ट्रैफ‍िक कोई परेशानी नही है। हां बस पयर्टको को इस पूराने भारत को देखने के ल‍िए हाथ में छाता जरूर रखना चा‍ह‍िए।

 

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