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आम जनता को सरकार के रहमोकरम पर नहीं छोड़ सकते: हाई कोर्ट

13_09_2017-court-jharkhand
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि आम जनता को सरकार के रहमोकरम पर नहीं छोड़ा जा सकता।

 रांची। यदि सरकारें काम नहीं करेंगी तो कोर्ट को हस्तक्षेप करना ही पड़ता है। आम जनता को सरकार के रहमोकरम पर नहीं छोड़ा जा सकता। राज्य के नेशनल पार्क और सेंचुरी को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि 17 सालों में वन्य जीवों के पर्याप्त संरक्षण के लिए कुछ नहीं किया गया है। जंगल में बॉर्डर नहीं होने की वजह से वन्यजीव व आबादी के बीच हमेशा भिड़ंत होती रहती है।

सिर्फ अधिनियम बनाने या गाइडलाइन लिख देने से जानवरों का संरक्षण नहीं होगा। उसके लिए जमीनी स्तर पर प्रयास करना होगा। सरकार की ओर से दाखिल किया गया जवाब मात्र आइवाश (धोखा) है। केंद्र सरकार ने चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन से इस संबंध में जानकारी मांगी थी लेकिन अभी तक केंद्र सरकार को इसकी जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने आशंका जताई कि इसी के अभाव में 10 सेंचुरी को इको सेंसिटिव जोन घोषित नहीं किया जा सका है। मामले की अगली सुनवाई नौ अक्टूबर को होगी।जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की खंडपीठ ने सरकार के जवाब को नकाफी बताते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है वह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल रहा है। इससे पता चलता है कि राज्य के अधिकारी काम नहीं करते हैं।

बता दें कि इसको लेकर महेश राय ने जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया है कि 2012 में दलमा सेंचुरी को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था। उसी प्रकार दस सेंचुरी को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया जाना था। इसके लिए केंद्र सरकार को जानकारी भेजी जानी थी। लेकिन अब तक इस दिशा में सही तरीके से कार्रवाई नहीं की गई है। जिसका नजीता यह हुआ कि अब तक अन्य क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित नहीं किया जा सका। कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में पूरे मामले की नौ अक्टूबर तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

यह होता है इको सेंसिटिव जोन:

किसी भी नेशनल पार्क या सेंचुरी की अंतिम दीवार से पांच किमी परिधि को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया जाता है। इस जोन में मानव का दखल नहीं होता है। इसकी दूरी इतनी इसीलिए रखी जाती है ताकि अगर कोई जानवर सेंचुरी से बाहर निकला भी तो उसका सामना मनुष्य से न हो।

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