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एक बार जरूर देखें भारत में तैरते अजूबे, कहीं तैरता डाक घर तो कहीं तैरता बगीचा

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ये दुनिया अजूबों का गढ़ है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस क्रम में आज चलते हैं भारत चंद तैरते अजूबों की सैर पर।


कश्‍मीर में डल लेक पर है तैरता पोस्‍ट ऑफिस

कश्मीर की डल झील में मौजूद है ‘फ्लोटिंग पोस्ट-ऑफिस’। ये तैरता डाकघर यहां ने वाले सैलानियों के आकर्षण का गढ़ बन चुका है। यह पोस्ट ऑफिस नदी में तैरता रहता है इसीलिए ये तैरता डाकघर कहलाता है। 2011 से पहले इस डाकघर को ‘नेहरु पार्क पोस्ट-ऑफिस’ कहा जाता था लेकिन पोस्ट मास्टर जॉन सैमूएल ने इसका नाम बदल कर ‘फ्लोटिंग पोस्ट-ऑफिस’ कर दिया। ये श्रीनगर का 24 घंटे खुले रहने वाला डाकघर है।

केरल का तैरता पूवर आइसलैंड रिजॉर्ट कर देगा दंग

पूवर आइसलैंड केरल की खूबसूरत जगहों में से एक है, यहां झील, नदी, समुद्र सबकी सुन्दरता देखने को मिलती है, मगर सबसे खास है यहां पर लहरों पर तैरता पूवर आइसलैंड रिजॉर्ट। शहरों की आपाधापी से दूर ये रिजॉर्ट बेहद शांतिपूर्ण और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।

हैरान करता है शिवपुर का हवा में तैरता पत्‍थर

आपने पानी में तैरता पत्थर देखा और सुना होगा, लेकिन कभी हवा में तैरता पत्थर नहीं देखा होगा। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं ऐसी जगह के बारे में जहां एक पत्थर को 11 उंगलियों की सहायता से उठा कर हवा में तैराया जाता है। पुणे से 25 किमी दूरी पर बसे शिवपुर में कमर अली दरवेश बाबा की एक मजार है यहीं पर वो पत्थर है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में है। कहते हैं कि एक साथ 11 लोग मिलकर अपनी तर्जनी अंगुली से 90 किलो भारी इस पत्थर कई फीट ऊपर हवा में तैरा सकते हैं। कहा तो ये भी जाता है कि अगर 11 व्यक्ति से कम या एक भी ज्यादा लोग पत्थर उठाने का प्रयास करते हैं तो यह कारनामा नहीं हो पाता।

श्रद्धा का प्रतीक हैं रामसेतु की तैरती चट्टानें

इस बारे में तो संभवत हर हिंदू आस्‍थावादी जानता है। रामसेतु को ‘एडेम्स ब्रिज’ के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एक ऐसा पुल है, जिसे भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम की वानर सेना द्वारा भारत के दक्षिणी भाग रामेश्वरम पर बनाया गया था, जिसका दूसरा किनारा श्रीलंका के मन्नार से जाकर जुड़ता है। ऐसी मान्यता है कि इस पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था वह पत्थर पानी में फेंकने के बाद समुद्र में नहीं डूबे। बल्कि पानी की सतह पर ही तैरते रहे। ऐसे पत्‍थर आज भी मौजूद हैं और उन्‍हें रामेश्वरम के रामतीर्थम में देखा जा सकता है।

 

मणिपुर की लोक्तक झील 

भारत के उत्तर पूर्व में सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है लोक्तक झील। इस झील में तैरते हुए कई द्वीपों के चलते इसे विश्व की एकमात्र तैरती हुई झील भी कहा जाता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा यह झील मणिपुर की अर्थव्यवस्था में भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे आसपास के इलाकों के लिए पनबिजली बनती है, सिंचाई होती है, पीने योग्य पानी की आपूर्ति होती है और यहां मछुआरों को जीविका भी उपलब्‍ध होती है।

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