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आत्मनिर्भर बनेंगे उत्तराखंड के 60 गांव, लौटेगी खुशहाली

25_09_2017-lohaghatddn
पं. दीन दयाल उपाध्याय विज्ञान ग्राम संकुल परियोजना से उत्तराखंड के गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। इसके लिए गढ़वाल-कुमाऊं मंडल के चार कलस्टर में 60 गांवों का चयन किया जाएगा।

देहरादून: विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में विज्ञान की क्रांति न सिर्फ गांवों तक पहुंचेगी, बल्कि तकनीक के बल पर गांव हर तरह से आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे। पलायन रुकेगा और गांवों से दूर होती जा रही खुशहाली लौट पाएगी। इस मंशा के साथ केंद्रीय विज्ञान एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने उत्तराखंड को केंद्र में रखते हुए पं. दीन दयाल उपाध्याय विज्ञान ग्राम संकुल परियोजना शुरू की है। नाम के अनुरूप यह परियोजना महान विचारक पं. दीन दयाल उपाध्याय को समर्पित की गई है। पं. उपाध्याय का जन्म दिवस 25 सितंबर को है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस वर्ष को उनकी जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में भी मना रहा है।

परियोजना को लॉन्च करते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने जानकारी दी कि पहले फेज में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गांव के चार कलस्टर (समूह) के रूप में किया जा रहा है। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) को परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी दी जा रही है। यूकॉस्ट के सहयोग के लिए ग्रामोद्योग नेटवर्क, सुरभि फाउंडेशन व उत्तराखंड उत्थान परिषद समेत अन्य विशेषज्ञ संगठन भी इस दिशा में काम करेंगे। गढ़वाल व कुमाऊं मंडल के चार कलस्टर में 60 गांवों का चयन किया जाएगा और यहां की एक लाख की आबादी को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया जाएगा। विशेषज्ञ इन गांवों की चुनौतियों की जानकारी जुटाएंगे और स्थानीय संसाधनों के आधार पर उनके निराकरण का प्रयास करेंगे। कुल मिलाकर आत्मनिर्भरता का एक मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसे अन्य पर्वतीय राज्यों में भी लागू किया जाएगा।

इन कलस्टर के गांव बनेंगे आत्मनिर्भर 

गढ़वाल (गैंडीखाता, बजीरा, भिगुन)

कुमाऊं (कौसानी)

परियोजना के फोकस एरिया 

दुग्ध उत्पादन, शहद, मशरूम, हर्बल चाय, वनोपज, हॉर्टिकल्चर, औषधीय व सुगंधित पादप, ट्रेडिशनल क्राफ्ट, हैंडलूम व अन्य स्थानीय उत्पाद।

मिलेंगे 6.3 करोड़ 

पं. दीन दयाल उपाध्याय विज्ञान ग्राम संकुल परियोजना के लिए 6.3 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद का प्रावधान भी किया गया है। यह राशि तीन सालों के लिए स्वीकृत की गई है।

वहीं यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने बताया कि क्लस्टर को इतना सक्षम बनाया जाएगा कि उन्हें एक साल के भीतर ही 20 लाख रुपये तक की आय होने लगे। जब क्लस्टर एक करोड़ रुपये तक जुटा लेंगे तो उन्हें आत्मनिर्भर मानते हुए उन पर से नियंत्रण हटा लिया जाएगा। अगर यह प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक चला तो केंद्र इसी तर्ज पर पूरे देश में परियोजना शुरू करे

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