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गुजराल सरकार पर प्रणब मुखर्जी ने किया ये हैरान करने वाला खुलासा

14_10_2017-14gujral
कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने साल 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल की संयुक्त मोर्चा की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की थी।

एसएनएन-Desk: कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष दिवंगत सीताराम केसरी ने प्रधानमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा के लिए 1997 में आइके गुजराल की सरकार को गिराया था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी नई किताब ‘कोलिएशन ईयर्स : 1996-2012’ में यह रहस्योउद्घाटन किया है।

मुखर्जी ने किताब में लिखा है, ‘कांग्रेस ने समर्थन वापस क्यों लिया? केसरी के बार-बार यह कहने का मतलब क्या था कि मेरे पास वक्त नहीं है?’ कई कांग्रेस नेताओं ने इसका आशय उनकी प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा बताया है। केसरी ने भाजपा विरोधी भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश की। उनका उद्देश्य गैर भाजपा सरकार के नेता के तौर पर खुद को पेश करना था। केसरी ने मंत्रिमंडल से द्रमुक को हटाने की मांग को लेकर गुजराल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकार से समर्थन वापस लिया था। कांग्रेस ने राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाले जैन कमीशन की अंतरिम रिपोर्ट के बाद गुजराल सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग की। जैन कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि द्रमुक और इसका नेतृत्व लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरन और उसके समर्थकों को बढ़ावा देने में शामिल था। जबकि साजिश में किसी नेता या किसी राजनीतिक दल के शामिल होने की बात नहीं कही गई थी। कांग्रेस गुजराल सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थी।

मुखर्जी ने लिखा है कि 1997 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस संकट को दूर करने के प्रयास में कई बैठकें हुईं। तत्कालीन प्रधानमंत्री गुजराल ने केसरी, मुखर्जी, जितेंद्र प्रसाद, अर्जुन सिंह और शरद पवार समेत कांग्रेस नेताओं के अपने निवास पर रात्रिभोज पर बुलाया। इस दौरान गुजराल ने कहा कि द्रमुक के किसी नेता के इसमें शामिल होने का सीधा प्रमाण नहीं। ऐसी स्थिति में द्रमुक के खिलाफ कार्रवाई से गलत संदेश जाएगा और साथ ही एक पार्टी के दबाव में करने वाली सरकार माना जाएगा। गुजराल इस बात पर दृढ़ थे कि सरकार की साख पर आंच नहीं आने देंगे। मुखर्जी ने लिखा कि हमने गुजराल से कहा कि उनकी बात को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में रखेंगे और कमेटी इस पर अंतिम फैसला लेगी। कांग्रेस के अधिकतर सदस्य सरकार से समर्थन लेने के पक्ष में नहीं थे। इसके बावजूद कमेटी ने सरकार से समर्थन वापस लेने का प्रस्ताव पारित कर दिया।

‘पीएम पद के लिए प्रणब ज्यादा योग्य थे’

इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की नई किताब ‘गठबंधन के वर्ष 1996-2012’ के विमोचन के मौके पर मनमोहन सिंह ने कहा, ‘सोनिया गांधी ने 2004 में मुझे प्रधानमंत्री बनने के लिए चुना था, तब प्रणब मुखर्जी इस पद के लिए हर लिहाज से श्रेष्ठ थे, लेकिन वह (मुखर्जी) जानते थे कि मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता था।

कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी भी मौजूद थे। पूर्व प्रधानमंत्री ने जब यह बात कही तो सोनिया गांधी मुस्कुरा दीं। मनमोहन ने कहा, ‘प्रणब मुखर्जी अपनी पसंद से राजनीति में आए थे और मैं संयोग से। मुझे पीवी नरसिंह राव संयोग से राजनीति में लाए और उन्होंने मुझे वित्त मंत्री बनने को कहा। मुखर्जी व राकांपा नेता शरद पवार मेरी सरकार के वरिष्ठ मंत्री थे और दोनों बड़े क्षमतावान थे। यदि संप्रग सरकार आसानी से चल पाई तो उसका बड़ा श्रेय प्रणब मुखर्जी को जाता है। जब भी पार्टी या सरकार के सामने कोई समस्या आती थी तो मुखर्जी का अनुभव और समझदारी सबसे ज्यादा मददगार होती थी।

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