नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस अड्डा में मंत्री रहते अपने एक फैसले को गलती के रूप में स्वीकार किया है. साल 2011 में यूपीए-2 सत्ता में थी और दिल्ली में योग गुरू बाबा रामदेव भूख हड़ताल कर अपने आंदोलन की शुरुआत करने जा रहे थे. इस दौरान वह केंद्रीय मंत्री थे. प्रणब रामदेव से एयरपोर्ट पर जाकर मिले थे. प्रणब ने इस कदम को अब गलती बताया है.

एक श्रोता के सवाल पर प्रणब मुखर्जी ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये उनका ‘गलत फैसला’ था और उन्हें ‘ऐसा नहीं करना चाहिए था.’ प्रणब ने बताया कि दिल्ली में अन्ना हजारे के आंदोलन की वजह से यूपीए सरकार चिंतित थी इसलिए वह चाहते थे कि भूख हड़ताल से पहले ही रामदेव को मना लिया जाए और मामला निपट जाए.

प्रणब ने बताया, ‘जहां तक मुझे याद है, मैं और कपिल सिब्बल (तत्कालीन केंद्रीय मंत्री) गये थे (रामदेव से मिलने)…. हम वहां राजनीतिक वजहों से गए थे. मुझे लगा कि अन्ना हजारे के आंदोलन का केंद्र पहले से सामना कर रहा है. उससे सरकार परेशान थी और उसकी किरकिरी भी हो रही थी इसलिए इसलिए इसे (रामदेव की भूख हड़ताल) को शुरू होने से पहले ही खत्म किया जा सकता था.’

प्रणब मुखर्जी को ये सलाह किसी अन्य नेता ने दी थी. उन्होंने कहा कि मैं उस शख्स का नाम नहीं लूंगा. उसी शख्स ने मुझसे कहा था कि अगर रामदेव के दिल्ली में अपने अनुयायियों से मिलने से पहले मैं उनसे मिल सकूं तो वो मेरी बात सुनेंगे. अपने साथ कपिल सिब्बल को ले जाने की क्या वजह थी. इसपर मुखर्जी ने कहा कि जब मैंने उस शख्स से कहा कि मेरी हिंदी अच्छी नहीं है तो उसने मुझे किसी दुभाषिये को लेकर जाने की सलाह दी थी इसीलिए कपिल सिब्बल मेरे साथ वहां गए थे.

हालांकि, ये फैसला गलत था और मुझे इसका अहसास बाद में जाकर हुआ. मुझे वो नहीं करना चाहिए था. मैंने तब भी कहा था और आज भी ये कहने में मुझे कोई झिझक नहीं कि हमने गलती की थी.’ मुखर्जी उस समय मनमोहन सिंह सरकार में वित्त मंत्री थे और कपिल सिब्बल मानव संसाधन मंत्री का जिम्मा संभाल रहे थे. रामदेव एक जून के दिन उज्जैन से दिल्ली पुहंचे थे. उन्होंने विदेशों में पड़ा कालाधन समेत अन्य मुद्दों पर मुखर्जी और सिब्बल से बात की थी लेकिन उनकी बातचीत विफल रही थी. हालांकि बाद में सरकार ने रामदेव के हड़ताल पर ही कार्रवाई कर दी थी.