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दिल थाम कर रहिएगा आप, PSB के जरिए नासा उठाएगा सूरज के रहस्यों से पर्दा

22_10_2017-psbnasa
वह दिन दूर नहीं जब हम आग उगलने वाले सूरज के रहस्यों को भी जान सकेंगे। नासा अगले साल सूर्य पर विश्व के पहले मिशन की शुरूआत करेगा

वह दिन दूर नहीं जब हम आग उगलने वाले सूरज के रहस्यों को भी जान सकेंगे। नासा अगले साल सूर्य पर विश्व के पहले मिशन की शुरूआत करेगा जिसमें हमारे तारे का वायुमंडल संबंधी अन्वेषण किया जाएगा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा सूर्य के बाहरी वायुमंडल (कोरोना) में पहला शोधयान भेजने की तैयारी कर रही है। पार्कर सोलर प्रोब (पीएसबी) नामक यह शोधयान 2018 में लांच किया जाएगा और यह सौरमंडल का सफर तय कर 2024 तक वहां पहुंचेगा। इसके जरिये नासा सौर तूफानों का अध्ययन करेगा। इसमें लगे विशेष उपकरणों द्वारा कई अहम शोध भी किए जाएंगे। पीएसबी सूर्य की सतह से 65 लाख किमी की दूरी यानी उसके बाहरी वायुमंडल कोरोना में रहेगा। सूर्य पर गए किसी भी शोधयान से सूर्य की यह करीबी सात गुना अधिक होगी। कोरोना में रहने के दौरान यह 7.25 लाख किमी/घंटा की रफ्तार से सफर तय करेगा।

सूरज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानकारी

नासा के इस अभियान से सूरज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानकारी मिलने के अलावा इसके पृथ्‍वी पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी खुलासा हो सकेगा। यह यान सूर्य की बाहरी सतह से होता इसके हजारों डिग्री सेल्सियस के तापमान को भी सह सकेगा। पार्कर सोलर प्रोब का नाम दिग्गज खगोलभौतिकीविद यूजीन पार्कर के सम्मान में रखा गया है। उन्होंने करीब 60 साल पहले सौर पवन की मौजूदगी की भविष्यवाणी की थी। नासा ने पहली बार किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर अंतरिक्ष यान का नाम रखा है। एक छोटी कार के बराबर के आकार वाला यह अंतरिक्ष यान हमारे तारे के बारे में कई बड़े रहस्यों का खुलासा करेगा। यह इस रहस्य पर से भी पर्दा उठाने की कोशिश करेगा कि सूर्य का कोरोना इतना गर्म क्यों होता है।

पीएसबी की लंबाई:  2.99 मीटर
व्यास: 2.23 मीटर
वजन: 612 किग्रा
पृथ्वी से सूर्य की दूरी: 14.96 करोड़ किमी

पहले कोई यान सूर्य के इतना करीब नहीं गया 

पहले कोई भी अंतरिक्ष यान सूर्य की सतह के इतना करीब नहीं गया है जितना करीब यह यान जाएगा। यह यान भीषण गर्मी और विकिरण परिस्थितियों का सामना करेगा और अंतत: मानवता को एक तारे का सबसे निकटतम पर्यवेक्षण मुहैया कराएगा। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रोफेसर पार्कर ने कहा, सौर जांच अंतरिक्ष के ऐसे क्षेत्र में की जाएगी जिसमें पहले कभी अन्वेषण नहीं किया गया है। पार्कर सोलर प्रोब परियोजना के वैज्ञानिक निकोला फॉक्स ने कहा, पार्कर सोलर प्रोब सौर भौतिकी के उन प्रश्नों का उत्तर देगी जिन्होंने हमें छह से अधिक दशकों से उलझा रखा है।

1400 डिग्री सेल्सियस के तापमान को सह सकेगा पीएसबी

पीएसबी को अगले साल 31 जुलाई से 19 अगस्त के बीच अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित केप कैनवरल एयरफोर्स स्टेशन से लांच किया जाएगा। इसे मैरीलैंड स्थित जॉन्स हॉपकिंस अप्लाईड फिजिक्स लैब में बनाया जा रहा है। मई में पहली बार नासा ने इसकी घोषणा की थी। इस यान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सूर्य के खाक कर देने वाले ताप को भी सह सकेगा। इस तापमान में शोधयान नष्ट न हो, इसके लिए इसमें खास थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है। 4.5 इंच मोटा कार्बन मिश्रित कवच अंतरिक्षयान और उपकरणों को सूर्य की गर्मी से बचाएगा ताकि वे ये अभूतपूर्व जांच कर सकें। 21 सितंबर को इसमें कार्बन यौगिक से बना खास ऊष्मा रोधी कवच भी लगाया गया है। इन सबसे शोधयान 1,371 डिग्री सेल्सियस का तापमान भी झेल सकेगा।

इसका  औसत व्यास 13.90 लाख किमी है। पृथ्वी के आकार से सूर्य 109 गुना बड़ा है। यह हाइड्रोजन और हीलियम से बना है। पृथ्वी तक सूर्य की किरणें आठ मिनट में पहुंचती हैं।

सूर्य का पृथ्‍वी पर प्रभाव

आपको यहां पर यह भी बता दें कि सूर्य के कोर का तापमान करीब 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस अनुमानित है। वहीं इसकी बाहरी सतह या कोरोना का तापमान 14 सौ डिग्री सेल्सियस रहता है। पार्कर सोलर प्रोब या पीएसबी यहां पर सौर तूफानों पर शोध करेगा। इनसे निकले उच्च ऊर्जा के विकिरण से पृथ्वी की संचार प्रणाली प्रभावित होती है। सूर्य से निकली गैसें तेज हवाओं के रूप में पृथ्वी से 16 लाख किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरती हैं। इससे पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र प्रभावित होता है।

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