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नोटबंदी, जीएसटी के बाद भी मणिनगर में पार हो सकती है बीजेपी की चुनावी नैया

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अहमदाबाद| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोटबंदी व वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को भले ही अपनी सरकार की दो ऐसी प्रमुख उपलब्धियों में सूचीबद्ध करें जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था के ढर्रे को बदल दिया हो, लेकिन मणिनगर के लोग इसे उत्साही नजरिए से नहीं देखते. मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री होने के दौरान मणिनगर का प्रतिनिधित्व करते थे.

मणिनगर के लोग अपना दुख साझा करते हुए बताते हैं कि कैसे इन दो फैसलों ने उनकी व्यापारिक गतिविधियों व उपभोक्ताओं की मांग को बुरी तरह से चौपट कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिनगर निर्वाचन क्षेत्र से मुख्यमंत्री के तौर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

लेकिन, फिर भी इनमें से बहुत से लोगों का मानना है कि बीजेपी अहमदाबाद जिले के इस विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लोगों के भावनात्मक संबंध की वजह से जीत हासिल कर लेगी. उनका यह भी मानना है कि नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद पर पदोन्नति के बाद उनकी गैरहाजिरी में राज्य ने प्रशासनिक तौर पर बहुत नुकसान उठाया है.

मणिनगर के मध्य में कंकरिया झील के पास सुबह विभिन्न आयु वर्ग व समाज के कई तबकों के लोगों को टहलते व जॉगिंग करते देखा जा सकता है. नरेश भाई (70) राज्य बिजली विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. वह सुबह टहलने के बाद अपने घर लौट रहे थे. उनसे जब राजनीतिक परिदृश्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह बीजेपी के लिए बेहद आसान है. यह बीजेपी की पारंपरिक सीट है और इसका प्रतिनिधित्व मोदी जी ने भी किया है.”

लेकिन, उन्होंने कहा कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद एकतरफा निर्णय लिए हैं, जो कि लोगों की इच्छा के खिलाफ है. उन्होंने कहा, “वह (मोदी) राष्ट्र हित में फैसले ले रहे हैं, लेकिन फैसले लेने से पहले लोगों को विश्वास में नहीं ले रहे हैं. उन्होंने नोटबंदी का फैसला लिया, लेकिन लोगों की दिक्कतों के बारे में नहीं सोचा. अब जीएसटी लागू किया है, जिससे व्यापार बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है. विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने सुधारात्मक कदम उठाए हैं. उन्हें यह फैसले लोगों को विश्वास में लेकर लेने चाहिए थे.”

हितेश भाई पंचाल (46) खोखरा सर्किल में प्रिंटिंग प्रेस चलाते हैं. वह खुद को जीएसटी से पीड़ित बताते हैं. उन्होंने कहा, “मैंने खातों को संभालने के लिए एक अंशकालिक अकांउटेंट की नियुक्ति की थी व उसे 6000 रुपये प्रति माह भुगतान कर रहा था. लेकिन, जीएसटी लागू होने के बाद मुझे पूर्णकालिक अकांउटेंट रखने पर बाध्य होना पड़ा और मैं अब 12,000 रुपये प्रति महीने दे रहा हूं. यह अतिरिक्त 6,000 रुपये जो अकाउंटेंट को दे रहा हूं, पहले मेरी बचत में शामिल होते थे.”

नरेश भाई व पंचाल ने आईएएनएस के संवाददाता से कहा कि उन्होंने यह फैसला नहीं किया है कि किसको वोट देना है. उन्होंने कहा कि वह बाद में उभरती हुई स्थिति को देखकर अपना फैसला करेंगे. लेकिन, पांच लोगों के एक समूह ने कहा कि वोट देने को लेकर स्पष्ट राय रखते हैं.

इस समूह ने कहा, “बेशक धंधे पर मार पड़ी है, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन मोदी जी के लिए सब कुछ सहन कर लेंगे.” लालजी भाई सिंह ने कहा, “वह (मोदी) हमारे नेता हैं। उनका यहां के लोगों से भावनात्मक संबंध है. यह मोदीजी थे जिन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में हमें एक समुदाय के अत्याचारों से बचाया था। आज हम उन्हीं की वजह से सुरक्षित महसूस करते हैं.”

टैक्सी चालक महेश भाई चौहान ने कहा कि तमाम समस्याओं के बावजूद यहां लोग बीजेपी को मत देंगे. उन्होंने कहा कि पूरे गुजरात में भाजपा जीते या ना जीते, पर यहां से तो जीतेगी ही.

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