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छह दिसंबरः उत्तर प्रदेश की सड़कों पर शौर्य की तलवारें और विरोध का काला झंडा

06_12_2017-ay1
छह दिसंबर यानी अयोध्या ढांचा ध्वंस की बरसी पर सड़कों पर शौर्य की तलवारें और विरोध का काला फीता और काला झंडा भी देखने को मिला। साथ ही याद आ रही 25 साल पुरानी कुछ बातें।

लखनऊ- अयोध्या ढांचा ध्वंस की बरसी पर सड़कों पर शौर्य की तलवारें और विरोध का काला फीता और काला झंडा भी देखने को मिला। छह दिसंबर को अयोध्या ढांचा ध्वंस के 25 साल पूरे हो गए। आज का दिन विवाद से जुड़े दोनों खेमों ने काला दिवस और शौर्य दिवस के रूप में मनाया। एक तरफ मुस्लिम संगठन और दूसरी तरफ हिंदू संगठन रहे। दोनों पक्षों के इस विवाद को तूल देते देते पच्चीस साल बीतने के बाद भी सामाजिक ढांचा जहां का तहां है। हर पक्ष अदालत से उम्मीद लगाए हैं। इस मौके पर पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। अयोध्या-फैजाबाद में जोन और सेक्टर बना कर फोर्स लगाई गई। एक समुदाय ने आज दुकानें बंद रखी। पूरे दिन सघन चेकिंग चलती रही।

काला दिवस मनाने वालों ने फैजाबाद समेत कई जिलों की कुछ मस्ज़िदों पर काला झंडा, हाथों पर काली पट्टी लगा कर विरोध जताया और शौर्य दिवस मनाने वालों ने जुलूस निकाला, पटाखे फोड़े और जयश्रीराम का उद्घोष कर नारेबाजी की। हिंदू संगठन कार्यकर्ताओं के हाथों में पराक्रम का प्रतीक तलवारें भी दिखीं। बजरंग दल, विहिप समेत अनेक हिंदू संगठनों ने इसमें शिरकत किया।

विवादित ढांचा ध्वंस की तारीख पर बरेली कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में आल इंडिया रजा एक्शन कमेटी के लोग भी रहे। कलेक्ट्रेट में जाने की कोशिश करने वालों को बैरिकेड लगाकर रोका गया। एसीएम ने गेट पर पहुंचकर उनका ज्ञापन लिया। अलीगढ़ के अचल ताल स्थित विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय पर कार्यकर्ताओं ने शौर्य दिवस के मौके पर हवन यज्ञ किया। हाथरस में मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के सदर रिजवान अहमद क़ुरैशी की अगुवाई में समाज के लोगों ने काला दिवस मनाया। काली पट्टी बांधकर मोहल्ला मधुगढ़ी से जुलूस निकाला गया। तालाब चौराहा पर राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया गया।

काला दिवस मनाने के साथ जुलूस ज्ञापन और प्रदर्शन का दौर चला। विरोध में मस्जिद में काला लगाना प्रमुख रहा। अयोध्या में मस्ज़िद के पुनर्निर्माण के लिए मुस्लिमों ने कुरानख्वानी की गई। गोरखपुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शौर्य दिवस मनाया और सड़कों पर जुलूस निकाला। जुलूस में बजरंग दल की महिला कार्यकर्ता भी शामिल रहीं। जुलूस में जय श्रीराम का उदघोष होता रहा। कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर पटाखे भी फोड़े। बाद में यह जुलूस एक सभा में बदल गया। वक्ताओं ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का संकल्प दोहराया।

आओ याद करें 25 साल पुरानी कुछ बातें

  • छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो हुआ उसकी शुरुआत1990 में त्तकाली भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से हो गई थी।
  • आडवाणी की रथयात्रा में एक नारा दिया गया था-कसम राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे-यानी जहां बाबरी थी वहीं पर मंदिर बनेगा।
  • पांच दिसंबर 1992 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान ने हवा का रुख बदला-उस जगह को समतल तो करना पड़ेगा।
  • 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में लाखों कारसेवकों की भीड़ जुट चुकी थी। भीड़ के साथ-साथ भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के तमाम नेता थे।
  • अयोध्या विवाद ने तब मोड़ ले लिया जब छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने बाबरी को गिरा दिया। उस समय यूपी में भाजपा की सरकार थी।

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