BREAKING NEWS
post viewed 395 times

मध्य प्रदेश का पन्ना शहर, जहां धरती से निकलते हैं बेशकीमती हीरे…

pjimage-15-1

पन्ना, ये जगह भारत की उस एकमात्र जगह में से है जहां हीरे पाए जाते हैं. पन्ना की पहचान हीरों के लिए ही नहीं है. यह जगह वन्य जीवों के संरक्षण और टाइगर रिजर्व के लिए भी मशहूर है. भारत का 22वां और मध्य प्रदेश का 5वां राष्ट्रीय पार्क यही हैं. पन्ना का राष्ट्रीय पार्क जंगली बिल्लियों यानी टाइगर्स के लिए जाना जाता है. साथ ही, यहां के हिरन भी मुख्य आकर्षण केंद्र हैं. यह राष्ट्रीय पार्क मध्य प्रदेश के दो जिलों पन्ना और छतरपुर में फैला है. पन्ना की खूबसूरती बेमिसाल है. यह स्वच्छ, शांत तो है ही, वृक्षों में घिरा होने से इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है.

हिंदू-मुस्लिम शैली के मंदिरः पन्ना में हिंदू और मुस्लिम शैली के मंदिर बड़ी संख्या में बने हुए हैं. प्रणामी समुदाय के अनुयायियों का पवित्र तीर्थस्थल भी यहीं है. हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामायण सहित पुराण में भी पन्ना का उल्लेख मिलता है. भविष्य पुराण और विष्णु पुराण में पन्ना का प्राचीन नाम पद्मावती पुरी बताया गया है. वाल्मिकी रामायण के 41 वें सर्ग में सुग्रीव ने इसका उल्लेख किलकिला खंड के रूप में किया है. श्रीमद भागवत में इसे किलकिला प्रदेश कहा गया है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यह क्षेत्र राजा दधीची की राजधानी थी. इसे सतयुग के राजा पद्मावत की राजधानी भी कहा जाता था.

छत्रसाल को बताया पन्ना के बारे में: ऐसा बताया जाता है कि स्वामी प्राणनाथ जी ने मध्य काल के महान योद्धा राजा छत्रसाल को पन्ना की हीरे की खानों के बारे में बताया था. इससे छत्रसाल के राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरी थी. स्वामी जी ने छत्रसाल को पन्ना को अपनी राजधानी बनाने को भी प्रेरित किया था और उनके राज्याभिषेक की व्यवस्था भी की थी. कहा जाता है कि महाभारत के दौरान पांडवों ने अपने बनवास का समय पन्ना के जंगलों में व्यतीत किया था. पन्ना का जंगल यहां के शाही परिवारों के शिकार का अड्डा था.

अजयगढ़-पन्ना को मिलाकर बनाः पन्ना का वर्तमान जिला अजयगढ़ और पन्ना को मिलाकर बनाया गया है. अजयगढ़ का कुछ हिस्सा काटकर इसमें शामिल किया गया है. मूल रूप से इस नगर का बंदोबस्त गौंड जाति ने किया था लेकिन इसका महत्व छत्रसाल की राजधानी बनने के बाद बढ़ा. खोजों से सिद्ध हो चुका है कि इस जिले में रहने वाले प्रारंभिक आदिम पुरुष प्रागैतिहासिक काल से संबंधित थे. रामायण काल में पन्ना को महान दंडकारण्य क्षेत्र में शामिल कर लिया गया था. यह जिला मौर्य, शुंग और गुप्त वंश के विशाल साम्राज्य का हिस्सा था.

राष्ट्रीय पार्क 543 किमी में: सम्पूर्ण पन्ना जिला ऐतिहासिक और प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों से भरा हुआ है. पर्यटकों को आकर्षित करने वाले प्रमुख दर्शनीय स्थलों में पन्ना राष्ट्रीय पार्क है. केन नदी के किनारे पन्ना राष्ट्रीय पार्क 543 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. पन्ना राष्ट्रीय पार्क यहां का सबसे प्रमुख दर्शनीय स्थल है और पर्यटकों को सबसे अधिक आकर्षित करता है. पार्क की भौगोलिक स्थिति शानदार संकरी, शांत घाटियों और टीक के घने वृक्षों के बीच है. मानसून के दिनों में प्रपाती झरनों से यह पार्क हरा भरा और जीवंत हो उठता है. पार्क पन्ना और भूतपूर्व छतरपुर के शाही परिवारों के शिकार का अड्डा था. शिकार पर पाबंदी लगाने के बाद इसे राष्ट्रीय पार्क में तब्दील कर लिया गया. इस पार्क ने वन्यजीवों की बहुत सी प्रजातियों को आश्रय दे रखा है. यहां टाइगर्स के साथ ही तेंदुओं, भेड़ियों और घड़ियालों की झलक देखी जा सकती है.

अलग अलग जंतुः सामान्यत: यहां नीलगाय, चिंकारा, सांबर जैसे पशुओं का झुंड देखा जा सकता है. पार्क में जंगली सुअर, भालू, चीतल, चौसिन्हा, लोमड़ी, साही और अन्य बहुत से दुर्लभ वन्य जीवों को भी आसानी से यहां देखा जा सकता है. पार्क में पक्षियों की लगभग 300 प्रजातियां हैं. पार्क में घड़ियालों का एक अलग अभ्यारण्य भी बनाया गया है. पक्षियों और जीव-जन्तुओं से समृद्ध यह पार्क पर्यटकों के समक्ष एक ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करता है जिससे वह यहां खिंचे चले आते हैं. पन्ना राष्ट्रीय पार्क को 1981 में स्थापित किया गया और इसे 1994 में प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व घोषित किया गया. इस पार्क के अन्तर्गत 1975 में स्थापित गंगुआ वन्यजीव अभ्यारण्य भी शामिल है.

जीप सफारी पार्क भ्रमण का मुख्य माध्यम है. जीप सफारी की व्यवस्था सुबह और दोपहर के वक्त की जाती है. यही नहीं, जंगल की यात्रा के लिए हाथी सफारी की जरूरत पड़ती है. हाथी सफारी जंगल के अनुभव के नजदीक से महसूस करने का अवसर प्रदान करता है. टाइगर को नजदीक से देखने के लिए हाथी सफारी सबसे बढ़िया माध्यम है. भारतीयों से हाथी सफारी का शुल्क 100 रुपये और विदेशियों से 600 रुपये का शुल्क लिया जाता है.

गंगुआ की नाइट सफारीः साही, जंगली बिल्ली और भालू जैसे पशुओं को रात में भ्रमण करना अच्छा लगता है. ये पशु सामान्यत: दिन में नहीं दिखाई नहीं देते. टाइगर रिजर्व को अंधेरा होने के बाद बन्द कर दिया जाता है.

महामति प्राणनाथजी मंदिरः यह प्रणामी संम्प्रदाय का सबसे प्रमुख मंदिर है. यह मंदिर प्रणामियों के सामाजिक और धार्मिक जीवन को दर्शाता है. यह मंदिर 1692 ईसवीं में बना था. कहा जाता है कि प्राणनाथजी यहां रहने के बाद यहीं के होकर रह गए थे. तब से यह स्थान प्रणामियों का परम पूज्य तीर्थ स्थल बन गया. यह मंदिर ताजमहल की याद ताजा कर देता है. इसके रंगमहल के आठ पहल हैं और प्रत्येक पहल में 201 गुम्बद हैं. इसका केंद्रीय गोलाकार गुम्बद मुस्लिम वास्तुशिल्प और कमल के आकार का गुम्बद भारतीय परंपरा को दर्शाता है.

पंजे में चमकता हुआ दैवीय कलश महामति के आशीर्वाद और अक्षरातीत पूर्ण ब्राह्मण को इंगित करता है. मंदिर का मुख्य द्वार चांदी का बना हुआ है और इसे कामन दरवाजा कहा जाता है. प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के दिन यहां हजारों लोग उत्सव मनाने के लिए एकत्रित होते हैं.

जुगल किशोर मंदिरः यह पन्ना का प्रमुख हिन्दु मंदिर है. इसका निर्माण बुंदेला मंदिर शैली में करवाया गया है. नट मंडप, भोग मंडप, गर्भगृह और प्रदक्षणा पथ मंदिर में उपस्थित हैं. कहा जाता है कि इसकी मूर्ति ओरछा के रास्ते वृन्दावन से पन्ना आई थी. इसके इलावा यह भी कहा जाता है कि चार धामों की यात्रा जुगलकिशोर जी की यात्रा के बिना अधूरी है.

पदमावति या बड़ी देवी मंदिरः यह मंदिर किलकिला नदी के उत्तरी पश्चिमी किनारे पर स्थित है. इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व यह मान्यता है कि देवी पद्मावति अभी भी जीवित हैं और पन्ना की खुशियों, सपन्नता और सुरक्षा की रक्षक हैं. नव-दुर्गोत्सव के दौरान यहां हजारों की संख्या में भक्तगण एकत्रित होते हैं. महाराजा छत्रसाल बुन्देला ने इसे राज लक्ष्मी के रूम में स्वीकार किया था जबकि उनकी कुलदेवी विन्ध्यवासनी थीं.

बलदेवजी मंदिरः यह मंदिर पेलाडियन शैली से निर्मित है. इस मंदिर को इंग्लैंड के सेन्ट पॉल कैथोलिक की नकल कहा जा सकता है. इटेलियन विशेषज्ञ मेनली की देखरेख में इसे बनवाया गया. मंदिर में एक विशाल कक्ष है जिसे महामंडप कहा जाता है. इसके विशाल स्तम्भ एक ऊंचे चबूतरे में बने हुए हैं. बलदेव जी की आकर्षक मूर्ति काले सालीग्राम पत्थर की बनी है. बलदेव जी का मंदिर पन्ना की उत्तम वास्तुकला की पराकाष्ठा को प्रस्तुत करता है.

पांडव झरनाः यह झरना पन्ना से 12 किलोमीटर दूर खजुराहो की ओर है. यह झरना पन्ना के राष्ट्रीय पार्क और राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित है. यहां मॉनसून के दौरान भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस झरने से बारह मास पानी बहता रहता है. इसके चारों तरफ की हरियाली अभूतपूर्व नजारा प्रस्तुत करती है. झरने के समीप कुछ प्राचीन गुफाएं भी हैं. लगभग 100 फुट ऊंचा यह झरना पिकनिक का खूबसूरत स्थल है।

अजयगढ़ का किलाः पन्ना से 36 कि.मी. दूर यह प्राचीन किला 688 मीटर की ऊंचाई पर बना है. चंदेलों के पतन के समय यह उनकी राजधानी थी. छत्रसाल ने 1731 ई. में यह किला अपने पुत्र जगत राय को सौंप दिया था.

नचनाः पन्ना से 40 कि.मी. दूर नचना नवकाटका और गुप्त साम्राज्य का मुख्य शहर था. यह चतुर्मुख मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. चार मुंह वाले लिंगम के कारण इसका नाम चतुर्मुख मंदिर पड़ा. यह लिंगम आज भी मंदिर में स्थापित है.

हीरे की खानः हीरे की खाने पन्ना के 80 कि.मी. के क्षेत्र में फैली हुई हैं. यहां एशिया की सबसे बड़ी हीरे की खानें हैं. इन खानों में खनन कार्य सरकार का राष्ट्रीय खनिज विकास निगम करता है. हीने की खानों की शुरुआत उत्तर पूर्वी पहाड़ीखेड़ा से दक्षिण पश्चिमी मझगांव तक है. इसकी चौड़ाई लगभग 30 कि.मी. है.

जलवायुः इस क्षेत्र की जलवायु उष्णकटिबंधीय है. गार्मियों में अत्यधिक गर्मी के कारण असहजता होती है. गर्मियों के बावजूद यह मौसम जीव जन्तुओं को देखने का सबसे बेहतर समय है. सर्दियां ठंडी और आरामदायक होती हैं और तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है. जुलाई से सितम्बर के मध्य तक मॉनसून का मौसम रहता है.

कैसे पहुंचेः पन्ना पहुंचने के लिए रेल, वायु और सड़क मार्ग को अपनी सुविधा के अनुसार अपनाया जा सकता है.

वायुमार्गः पन्ना का करीबी हवाई अड्डा खजुराहो है. यह पन्ना राष्ट्रीय पार्क से 57 कि.मी. दूर है. दिल्ली, मुम्बई और वाराणसी का वायुमार्ग खजुराहो से जुड़ा हुआ है. खजुराहो से टैक्सी या बस के माध्यम से पन्ना पहुंचा जा सकता है.

रेलमार्गः पन्ना से 90 कि.मी. दूर स्थित सतना नजदीकी रेलवे स्टेशन है. यह रेलवे स्टेशन मध्य भारत और पश्चिम भारत के बहुत से प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. किराए की टैक्सी और राज्य परिवहन निगम की बसों के द्वारा पन्ना पहुंचा जा सकता है.

SHAREShare on Facebook0Share on Google+0Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn0

Be the first to comment on "मध्य प्रदेश का पन्ना शहर, जहां धरती से निकलते हैं बेशकीमती हीरे…"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*