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जतिंगा: रहस्यमयी गांव, जहां पक्षी आत्महत्या करने आते हैं

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जतिंगा भारत सहित विश्वभर के पक्षी विज्ञानियों के लिए रहस्यमय स्थान है, क्‍योंकि हर साल यहां बड़ी संख्या में पक्षी आत्महत्या करने आते हैं।

पक्षियों के अनूठे रहस्‍य का गांव

सुबह सवेरे उठकर आप घूमने निकलें और अचानक से रास्ते में ढेर सारे पक्षी मरे हुए नजर आएं तो आप क्‍या समझेंगे शायद यही कि किसी प्राकृतिक आपदा ने इन्‍हें अपना शिकार मिला लिया या फिर कोई प्राकृतिक परिवर्तन, या फिर अधिकतम सोचेंगे कि शायद हवा में जहर है जिस कारण ऐसा हुआ होगा। इसके बाद अगर यही घटना हर साल किसी खास महीने में होने लगे तो आप क्या कहेंगे? जाहिर है एक प्राकृतिक रहस्य मान कर इसे जानने की कोशिश करेंगे। ऐसा ही एक रहस्य असम के एक बेहद ही सुंदर और छोटे से गांव जतिंगा का है। यहां साल में एक बार एक साथ कई पक्षी आत्महत्या करने आते हैं।

खूबसूरत लेकिन है रहस्यमयी

जतिंगा असम के उत्तरी काछार पहाड़ी में स्थित एक बेहद ही सुंदर वैली है। यह क्षेत्र विशेष कर अपने नारंगी के बागों के लिए प्रसिद्ध है और लोग दूर-दूर से यहां घूमने आते हैं। साथ ही यहां पक्षियों के समूह में आत्महत्या करने के हादसे ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। विशेषकर मानसून के दौरान कोहरे वाले महीनों में यहां पक्षियों की आत्महत्या की घटनाएं देखने को मिलती है, लेकिन कभी-कभी अमावस में भी कोहरे के दौरान पक्षियों के आत्महत्या की घटनाएं दिख जाती हैं। ये घटना शाम को लगभग 7 बजे से लेकर 10 बजे के बीच का होती है।

 

समूह में करते हैं आत्महत्या

यहां पर सबसे आश्चर्य की बात यह है कि कोई अकेला पक्षी आत्महत्या नहीं करता, बल्कि सामूहिक रूप से सभी आत्महत्या कर लेते हैं। वहीं इस आत्महत्या में कोई एक प्रजाति का पक्षी शामिल नहीं होता है, बल्कि यहां उपलब्ध लगभग सभी प्रकार के प्रवासी पक्षियों द्वारा ऐसा किया जाता है। जैसे कि किंगफिशर, टाइगर बाइटन और लिटिल एग्रीट जैसे पक्षी इस रहस्यमय मौत का शिकार होते हैं। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्यों एक साथ इतनी संख्या में पक्षी आत्महत्या करते हैं?

नहीं पता कारण 

जतिंगा पक्षी आत्महत्या को लेकर अब तक कई खोज हुए हैं और इसके पीछे कई तर्क भी दिए गए हैं। परंतु सच कहा जाए तो अब तक ऐसा कोई भी तर्क नहीं आया है जिसे सुनकर आप पूरी तरह से सहमत हो जाएं। कुल मिलाकर कहा जाए तो रहस्य का खुलासा नहीं हुआ है। कई पक्षी विज्ञानियों का मानना है कि इस दुर्लभ घटना की वजह चुंबकीय शक्ति है। जब नम और कोहरे-भरे मौसम में हवाएं तेजी से बहने लगती हैं तो रात के अंधेरे में पक्षी रोशनी के आस-पास उड़ने लगते हैं। यह ऐसा समय होता है जब वह मदहोशी में होते हैं और तेजी से उड़ने के दौरान वे आसपास पेड़ और दीवार से टकराकर मर जाते हैं। हालांकि स्थानीय निवासी इसे भूत-प्रेत की बाधा से जोड़ कर देखते हैं

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