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गीता जयंती समारोह का बजट 25 करोड़ पार

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स्वामी ज्ञानानंद को कुरुक्षेत्र में करोड़ों रुपए कीमत वाली जमीन कौड़ियों के भाव देकर गीता जयंती समारोह के दौरान विवादों में घिरी हरियाणा सरकार ने इस बार गीता जयंती का बजट 25 करोड़ से पार कर दिया है।

स्वामी ज्ञानानंद को कुरुक्षेत्र में करोड़ों रुपए कीमत वाली जमीन कौड़ियों के भाव देकर गीता जयंती समारोह के दौरान विवादों में घिरी हरियाणा सरकार ने इस बार गीता जयंती का बजट 25 करोड़ से पार कर दिया है। इस आयोजन का सरकार व प्रदेश के लोगों को कितना लाभ हुआ, इसके बारे में तो स्थित साफ नहीं हो सकी है। अलबत्ता करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद राज्य सरकार एक बार फिर से विपक्ष के निशाने पर आ गई है। हाल ही में संपन्न हुए गीता जयंती समरोह के दौरान ज्ञानानंद को जमीन देने, महंगे दामों पर गीता खरीदने और एक ही व्यक्ति को खाने का ठेका देने जैसे विवाद इस आयोजन के साथ उठते रहे हैं।

समारोह समाप्त होने के बाद अब नया विवाद खड़ा हो गया है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने इस बार के आयोजन पर 25 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि खर्च डाली है। हालांकि किस मद पर कितना खर्च किया गया है, यह अभी सार्वजनिक किया जा रहा है लेकिन केडीबी का यह खर्च किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। आश्चर्यजनक बात यह रही है कि पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में भी हर साल गीता जयंती का आयोजन किया जाता था लेकिन इतना बजट कभी नहीं बढ़ा। हुड्डा सरकार के नौ वर्ष के कार्यकाल में जितनी धनराशि इस आयोजन पर खर्च की गई है, उससे छह गुणा अधिक राशि इस बार खर्च की गई है।

हुड्डा सरकार ने गीता जयंती समारोह के आयोजन के जितना कुल बजट नौ वर्ष में खर्च किया है, उतने बजट में इस बार मनोहर सरकार ने केवल पंडाल, लाइट व साउंड की व्यवस्था की है। हरियाणा की वर्तमान भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही गीता जयंती समारोह को अंतरराष्ट्रीय समारोह का दर्जा प्रदान किया था। इसके चलते दो वर्षों में इस आयोजन का खर्च 40 करोड़ रुपए से भी पार जा चुका है। हैरानी की बात यह है कि सरकार द्वारा इस आयोजन को भले ही अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव का नाम दिया गया है लेकिन पिछले दो वर्षों से यहां तीन दर्जन भी विदेशी पर्यटक नहीं आए हैं।

केडीबी से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 से लेकर 2014 तक गीता जयंती समरोह के आयोजन पर महज तीन करोड़ 82 लाख 48 हजार रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं वर्ष 2015 से लेकर 2017 तक गीता जयंती उत्सव पर 40 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो इसमें से करीब 90 फीसद धनराशि राज्य सरकार के खाते से ही गई है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव अशोक सुखीजा के अनुसार आयोजन बहुत बड़ा था। कुछ खामियां सामने आई हैं जिन्हें सुधारने के लिए भविष्य में प्रयास किए जाएंगे। आगामी आयोजनों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को बुलाने के लिए भी केडीबी द्वारा अपने स्तर पर अलग से प्रयास किए जाएंगे।

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