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मध्य प्रदेश में यहां कभी हुआ करता था गहरा समुद्र, मिले शार्क के जीवाश्म

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इस क्षेत्र में डायनासोर के जीवाश्म की भी 2007 में खोज हुई थी। यहां डायनासोरों के 100 से अधिक अंडे पाए गए थे।

धार,- समुद्री शार्कों के 750 लाख वर्ष पुराने जीवाश्म मनावर क्षेत्र की नर्मदा घाटी से मिले हैं। खोज में बीस हजार से अधिक दांत के जीवाश्म और रीढ़ की हड्डी के भाग बड़ी तादाद में मिले हैं। इससे यह सिद्ध हुआ है कि करीब 750 लाख वर्ष पूर्व जब समुद्री हलचल हुई थी, तब यहां पर समुद्र का पानी था और उसके जीव यहां पहुंच गए थे।

इस काल में भारत, लगभग पृथ्वी की विषुवत रेखा पर हुआ करता था। बिना हड्डी की ये मछलियां आकार में 4 से 6 मीटर लंबी थीं। यह जानकारी मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. जीवीआर प्रसाद ने पत्रकारवार्ता मे दी। डॉ. प्रसाद शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और नेशनल जिओ साइंस पुरस्कार व जेसी बोस नेशनल फैलोशिप प्राप्त विशेषज्ञ हैं। इस मौके पर डायनासोर व शार्क की खोज करने वाले धार के विशेषज्ञ विशाल ज्ञानेश्वर वर्मा, डॉ. अशोक साहनी, रणजीत सिंह लौरेंबम, प्रियदर्शिनी राजकुमारी आदि मौजूद थे।

खोज को मिला प्रमाण 

इन जीवाश्मों की खोज लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन प्रामाणिकता सिद्ध होने के बाद ही उसे उजागर किया जा रहा है। इस पर एक रिसर्च पेपर लिखा गया था, जो अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ है। इस जीवाश्म की काल अवधि निकालने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया। बीस हजार से अधिक शार्क के दांत के जीवाश्म और रीढ़ की हड्डी के भाग भी बड़ी तादाद में मिले हैं। जिस प्रकार की चट्टानों से ये मिले हैं, उन्हें बाग चट्टान यानी ब्रायोजोन फॉर्मेशंस के नाम से जाना जाता है।

कितने प्रकार की शार्क मछलियां थीं

– गहरे पानी की टायकोडस शार्क।

– उथले पानी की स्कैपनोरिंकस रैफ्यूडॉन, क्रेटा लेमना एपेंडिकुलेटा, क्रेटोडस क्रेसीडेंस, स्कवैली कॉरेक्स फॉलकिटस।

क्यों है यह महत्वपूर्ण

बाग चट्टान से शार्क की पहली रिपोर्ट है। ये शार्क 750 लाख साल पहले धार जिले की नर्मदा घाटी में 100 से 200 मीटर गहरे समुद्र की उपस्थिति प्रमाणित करती है, जो इन जीवों को उपयुक्त  आवास प्रदान करता था। यह समुद्र एक भुजा जैसे आकार का था, जो प्रायद्वीपीय भारत से पश्चिम के टेथिस सागर का एक भाग था। इसके अवसादों का विस्तार बड़वाह के पास तक पाया गया है।

डायनासोर के भी हजारों जीवाश्म मिल चुके हैं

डायनासोर के जीवाश्म की सबसे पहले जिले में 2007 में खोज हुई थी। यहां डायनासोरों के 100 से अधिक अंडे पाए गए थे। मनावर और बाग क्षेत्र में इसके अंडों के घोंसले वाली जगह मिली थी। इसके बाद से नेशनल डायनासोर जीवाश्म पार्क की घोषणा हुई। अब तक डायनासोर के हजारों जीवाश्म मिल चुके हैं।

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