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कभी ‘बंबई’ की रीढ़ थीं टेक्सटाइल मिलें, कमला मिल से चलता था सैंकड़ों घरों का चूल्हा!

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मुंबई के भारत की आर्थिक राजधानी बनने की कहानी में इस शहर के संपन्न औद्योगिक इतिहास का गहरा योगदान है…

मुंबई के भारत की आर्थिक राजधानी बनने की कहानी में इस शहर के संपन्न औद्योगिक इतिहास का गहरा योगदान है. एक जमाने में मुंबई औद्योगिक केंद्र और शहर को इस रूप में स्थापित करने में 19वीं सदी के मध्य में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आई तेजी इसके पीछे एक वजह थी. ये टेक्सटाइल इंडस्ट्री किसी जमाने में देश की पहली मॉडर्न इंडस्ट्री थी और देश के अलग अलग हिस्सों में विकास का स्रोत थे. 100 से अभी अधिक संख्या वाली ये मिलें एक शताब्दी में उभरी और बंद हो गईं. सी नानाभाई डावर ने मुंबई की पहली मिल बॉम्बे स्पिनिंग मिल, 1854 में बनाई थी.

मुंबई में किसी वक्त 130 मिलें हुआ करती थीं, जो 20वीं शताब्दी में शहर की अर्थव्यवस्था का केंद्र थीं. आधुनिक मुंबई में इन्हीं में से कुछ मिलों की जमीन पर नई इमारतें खड़ी की गईं जबकि कुछ आज भी जर्जर हालत में हैं. पुनर्निमित इमारतें आज शहर के लिए नए अवतार में ही कारगर साबित हो रही हैं. कमला सिटी, लोअर परेल में आज शानदार कमला सिटी बिजनेस पार्क कभी कमला मिल हुआ करती थी. आज भी कंपाउंड का यही नाम है.

मुंबई के बेहतरीन रेस्टोरेंट्स, सीक्रेट बार, चर्चित पब, डांस स्पॉट कमला मिल कम्पाउंड में है. यहां कई ऑफिसेस भी हैं लेकिन फूड और गेम्स के दिवानों का ये केंद्र है. डायनिंग रेस्टोरेंट्स, कैफे, पब्स और गेमिंग जोन की ढेरों वरायटीज यहां हैं. वीकेंड में यहां जबर्दस्त भीड़ होती है. पार्टी के शौकीन लोग साउथ बॉम्बे के साथ साथ जुहू और बांद्रा से भी यहां पहुंचते हैं. लोअर परेल में ये एक व्यस्ततम जगह है. लोअर परेल रेलवे स्टेशन से यहां आने में 3 मिनट लगते हैं. ये पूरा परिसर 37 एकड़ में फैला हुआ है.

भारत की सबसे ऊंची बिल्डिंग वर्ली की Palais Royale है जो श्री राम मिल के हिस्से पर बनी है. वहीं, लोअर परेल हाई स्ट्रीट Phoenix देश के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल में से एक है. ये शहर में फेवरिट शॉपिंग एक्सपिरीयंस देता है. इसका फ्लोर एरिया 3,65,000 स्क्वेयर फीट का है. इसके पास के कंपाउंड में 5 स्टार होटल, मल्टिप्लेक्स, कमर्शल स्पेश और रेजिडेंशियल टावर हैं. Phoenix का इतिहास जानने के लिए हमें 1905 में जाना होगा जब Phoenix मिल को सूती वस्त्र (कॉटन टैक्सटाइल) बनाने के लिए स्थापित किया गया था.

1982 में मुंबई में बड़ी टेक्सटाइल स्ट्राइक हुई थी जिसने शहर की ज्यादातर मिलों पर हमेशा के लिए ताला जड़ दिया. मिलों के बंद होने की वजहें थी जिसमें नए और ज्यादा कमाई देने वाले उद्योगों का उभरना भी था. साथ ही, वेतन के लिए लगातार होने वाली मजदूरों की हड़ताल भी इसपर भारी पड़ रही थी. नतीजा ये रहा कि 20 सदी के अंत तक शहर से मिलों की संस्कृति पूरी तरह खत्म हो गई. पिछले 3 दशकों में, अधिकतर मिलों की जमीनों को खरीदकर उनपर नए सिरे से निर्माण किया गया है.

हालांकि, सभी मिलों को आधुनिक मुंबई में समाहित हो जाने का अवसर मिला हो, ऐसा नहीं है. कोलाबा में छिन्न भिन्न हो चुका मुकेश मिल अपने भुतिया रूप के लिए कई बार सुर्खियों में रहता है. इसके साथ ही भायखला में इंडिया युनाइटेड मिल और बाकी दूसरी मिलें भी लगातार अनदेखी झेल रही हैं और कुछ तो शहर के दूर दराज के हिस्सों में हैं.

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