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सजा से पहले लालू समर्थकों ने जज को किया फोन, कोर्ट में खुलासे से हड़कंप

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाले के मामले में गुरुवार को सजा नहीं सुनाई गई. उन्हें इस मामले में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है. लालू को शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी.

सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ने कहा कि लालू के समर्थक उन्हें फोन कर पूछते हैं कि क्या होगा!  इस पर आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है, अगर ऐसा है तो जज को इस मामले की शिकायत करनी चाहिए.

 

रांची की विशेष सीबीआई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को लालू प्रसाद भी मौजूद रहे. लालू ने आज ही अपनी सजा सुनाने की अपील की. जानिए, इस दौरान जज शिवपाल सिंह और लालू प्रसाद यादव के बीच हुए सवाल-जवाब.

1- जज ने लालू प्रसाद यादव से कहा, ‘मुझे आपके शुभचिंतकों ने दूर-दूर से फोन किया. मैं उनसे कह देता हूं कि मुझे भी नहीं पता कि केस में क्या फैसला आएगा.’

2- लालू ने अपनी सफाई दी कि सब जगदीश शर्मा ने रफा-दफा किया, मैं इस मामले में निर्दोष हूं.

3- जज ने लालू से कहा, ‘आपने त्वरित कार्रवाई नहीं की. मामले को लटका कर रखा. आप वित्त मंत्री और मुख्य मंत्री थे.’

4- जज ने कहा, ‘हाई कोर्ट के आदेश का पालन होता तो बात कूछ और होती.’

5- लालू ने कोर्ट की अवमानना पर अनुरोध किया. कोर्ट ने कहा सब लोगों ने बदजुबानी की है.

5- कोर्ट ने कहा हम सर्वे-सर्वा नहीं हैं.

6- कोर्ट ने लालू से कहा यहां कोई जात-पात नहीं होता.

7- इस पर लालू ने चुटकी ली अब तो इंटरकास्ट मैरिज भी होती है.

8- लालू ने कहा हम वकील भी हैं तो जज ने कहा आप डिग्री ले लीजिए लोगों को प्रेरणा मिलेगी.

9- लालू ने फिर से आग्रह किया कि मामले की जल्द सुनवाई हो.

10- लालू ने कहा कि रांची में पहुच ठंड होती है. शुक्रवार से इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होगी. इस पर लालू ने कहा, ‘हम कोर्ट आ जाएंगे.’ इस पर जज ने कहा कि कल क्या होगा, कल ही देखेंगे.

कितनी हो सकती है सजा

लालू के वकील चितरंजन प्रसाद ने बताया कि इस मामले में अगर लालू और अन्य को दोषी ठहराया जाता है तो उन्हें अधिकतम सात साल और न्यूनतम एक साल की कैद की सजा होगी. हालांकि, सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में गबन की धारा 409 के तहत 10 साल और धारा 467 के तहत आजीवन कारावास की भी सजा हो सकती है. लालू को अगर 3 साल से कम की सजा सुनाई जाती है तो उन्हें तुरंत बेल मिल सकती है जबकि इससे अधिक सजा पर वकीलों के बेल के लिए हाईकोर्ट का रुख करना पड़ेगा.

क्या है पूरा मामला?

साल 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर अवैध ढंग से 89 लाख, 27 हजार रुपये निकालने का आरोप है. इस दौरान लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. हालांकि, ये पूरा चारा घोटाला 950 करोड़ रुपये का है, जिनमें से एक देवघर कोषागार से जुड़ा केस है. इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्टूबर, 1997 को मुकदमा दर्ज किया था. लगभग 20 साल बाद इस मामले में फैसले आया था.

इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये अवैध ढंग से निकालने के चारा घोटाले के एक दूसरे केस में सभी आरोपियों को सजा हो चुकी है.

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