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हिन्दी को लेकर शशि थरूर के बयान पर इंद्रेश कुमार ने साधा निशाना

indresh_kumar

नई दिल्ली. हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र में आधिकारिक भाषा बनाने के सरकार के प्रयास पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर के सवाल उठाने पर आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि इस प्रकार का सवाल ऐसे ही लोग उठाते है जिन्होंने पिछले 60 वर्षो में देश को लूटने और तोड़ने का काम किया. इंद्रेश कुमार ने यहां एक समारोह से इतर कहा कि हिन्दी एक ऐसी माला है जिसके साथ तमिल, तेलगू, मलयालम, पंजाबी, डोगरी सहित अन्य मातृभाषाएं गर्व एवं स्वामिभान करती है.

उन्होंने कहा कि हमें किसी भाषा से कोई दुराव नहीं है, सभी अपनी मातृभाषा पर स्वाभिमान करें. लेकिन यह विचार ठीक नहीं है कि हिन्दी पढे तो खतरा है और अंग्रेजी पढ़े तो खतरा नहीं है. विश्व हिन्दी परिषद के एक समारोह में हिस्सा लेने आए आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकरणी के सदस्य ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की बातें थरूर जैसे लोग करते हैं जिन्होंने 60 वर्षो में देश को लूटने और तोड़ने का काम किया. उन्होंने कहा कि अंग्रेजी जोड़ने वाली भाषा नहीं बल्कि यह गुलामी का प्रतीक है.

कुमार ने कहा कि भारत में अनेक मातृभाषाएं है, ये सभी एक माला में एकजुट रहें, यह वक्त की जरूरत है. हमें कांवेंट, आधुनिक शिक्षा से कोई विरोध नहीं है, लेकिन हमारा मानना है कि हमें अपनी भाषा के प्रति हीन भावना नहीं हो. और इसलिये हमें हिन्दी के प्रति स्वाभिमान होना चाहिए. हम एक विदेशी भाषा सीखे, लेकिन एक हिन्दी, एक हिन्दी स्वराज आज वक्त की जरूरत है.

आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक से शशि थरूर के संसद के शीतकालीन सत्र में पूछे गए एक सवाल के बारे में प्रश्न किया गया था. संसद के हाल में सम्पन्न शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछते हुए कांग्रेस सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा था कि हमें संयुक्त राष्ट्र में अधिकारिक भाषा की क्या जरूरत है? हिन्दी तो केवल भारत में बोली जाती है. प्रश्न यह है कि इससे क्या प्राप्त होगा. अगर इसकी जरूरत है तो हमारे पास प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री हैं, जो हिंदी में बोलना पसंद करते हैं, वे ऐसा करते हैं और उनके भाषण को अनुवाद करने के लिए राशि अदा कर सकते हैं.

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