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अवकाश प्राप्त शिक्षक को बनाया हाईटेक ठगी का शिकार

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रोहित गुप्ता,उन्नाव।
अवकाश प्राप्त शिक्षक को बनाया हाईटेक ठगी का शिकार।
नवाबगंज,उन्नाव। मौजूद सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटिलाइजेशन’ नारे के साथ भारत के नए युग की नींव, की पोल खोलती उत्तर प्रदेश पुलिस।जहाँ एक ओर सरकार डिजिटिलाइजेशन के द्वारा नए युग के उदय की बात कर रही है वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस साइबर क्राइम पर लग़ाम लगा पाने में बेबस नज़र आ रही है। साइबर अपराधियों पर शिकंजा न कस पाने के कारण कई एटीएम कार्ड धारक शिकार होते नज़र आ रहें है, इतना ही नहीं साइबर अपराधी एटीएम कोड नंबर पूछते ही ऑनलाइन शांपिग कर लेते है। पीडि़त द्वारा पुलिस को सभी आंकड़ों (किस नंबर से कॉल आई, किसी एटीएम का कोड पूछा, कब रुपए डेबिट हुए) का ब्योरा दिया जाता है, लेकिन हाईटेक पुलिस के हाथ साइबर अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रहे है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक उपभोक्ताओं में जागरुकता न होने के कारण दर्जनों ग्रामीण बैंक उपभोक्ता साइबर क्राइम का शिकार बनते जा रहे है, कहने को तो रोज के रोज साइबर क्राइम के आंकड़े बढ़ते जा रहे है, इस कारण कहीं न कहीं साइबर सेल कमजोर नजर आ रहा है।
     इस बार शातिर हाईटेक ठगों ने एक अवकाश प्राप्त शिक्षक से लगभग पचास हजार की ठगी कर डाली। मामला है अजगैन थाना क्षेत्र अन्तर्गत नवाबगंज कस्बा निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक चन्द्र प्रकाश शुक्ला का जहां शुक्रवार को लगभग 1 बजे उनके मोबाइल पर एक फ़ोन काल आयी जिस पर सामने वाले व्यक्ति ने अपने आपको बैंक का मैनेजर बताया और उनका एटीएम सीवीवी कोड और आधार नम्बर पूंछा साथ ही आधार में जन्मतिथि और लिंक पैन नम्बर जिसके कुछ देर बाद उनके मोबाइल पर रूपया निकलने का मैसेज आया तो उनके होश उड़ गये जिसके बाद जब उन्होने बैंक जाकर अपने खाते की जानकारी की तो पता चला कि पचास हजार रूपये उनके खाते से निकल गये है जिसके बाद उन्होने इसकी शिकायत बैंक एवं अजगैन थाने में की है।
इस तरह की घटनाऐं अब आम हो चुकी है। जहाँ साइबर क्राइम करने वाले अपराधियों पर नकेल कसने के लिए मुख्यमंत्री श्री अदित्य नाथ योगी ने पुलिस विभाग को विशेष दिशा-निर्देश दिए थे, पर साइबर अपराधियों से लड़ने के लिए साइबर सेल अपना पूरा जोर लगा रही है, लेकिन वह इस लड़ाई में कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। कारण शायद कि बीते एक साल से उन्हे साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए किसी प्रकार का प्रशिक्षण ही नहीं मिल सका है। वहीं जिले की साइबर सेल सिपाहियों की कमी से लगातार जूझ रही है।
कुछ ऐसे आती है कॉल,
हैलो..मैं फलां बैंक से बोल रहा हूं। आपका एटीएम लॉक होने वाला हैं। एटीएम लॉक होने से बचने के लिए एटीएम पर लिखे अंकों को बता दें तो एटीएम लॉक नहीं होगा। इतना सुनते ही उपभोक्ता द्वारा फौरन एटीएम नंबर बता दिया जाता और वह साइबर क्राइम का शिकार बन जाता है। ऐसे में उपभोक्ता की गढ़ी कमाई पलक झपकते ही आहरित हो जाती है। वहीं बैंक कर्मियों द्वारा भी साइबर क्राइम के मामले में कोई सहयोग नहीं किया जाता है।
छोटी छोटी बातों पर दें ध्यान,
साइबर सेल की गाइड लाइन के मुताबिक व्यक्तियों को अपनी छोटी-छोटी गल्तियों पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे कि ऑनलाइन शॉपिंग और पेट्रोल पंपों पर एटीएम कार्ड देते समय सामने ही पेमेंट करें। इसके साथ ही एटीएम के रुपए निकालते समय सतर्कता बरतें। Screenshot_20180113-134940
इन बातों में सतर्कता बरतें।
-फोन पर बैंक डिटेल और पिन कोड किसी और को बिलकुल भी ना बताए, ऐसे काल्स आने पर फौरन बैंक को सूचना दें।
-नेट बैंकिंग से संबंधित किसी मेल अथवा लिंक को खोलने से बचे।
-एटीएम में अकेले जाए और किसी को पासवर्ड न बताए।
-फेसबुक पर अजनबी की फ्रेंड रिक्वेस्ट ओके करने से बचे।
-पेट्रोल पंप पर एटीएम और क्रेडिट कार्ड से अपने सामने ही भुगतान करें।
-साइबर कैफे से टिकट बुक और ऑन लाइन शापिंग मत करें।
-बैंक के लिए अलग ई-मेल और पासवर्ड का प्रयोग करें।

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