BREAKING NEWS
post viewed 79 times

इलाहाबाद में मकर संक्रांति पर लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी, पर्व का बड़ा महत्व

14_01_2018-2alld
यह पर्व जनवरी माह के तेरहवें, चौदहवें या पन्द्रहवें दिन पड़ता है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ होती है, इसलिए इसको उत्तरायणी भी कहते हैं।

इलाहाबाद – संगमनगरी इलाहाबाद में आज मकर संक्रांति के पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। माघ मेला क्षेत्र में लोगों ने आज तड़के से ही कोहरे के बाद भी डुबकी लगाई। आज यहां करीब दस लाख लोगों के स्नान के बाद दान-पुण्य करने का अनुमान लगाया जा रहा है।

माघ मेला में कल्पवास कर रहे लोगों के साथ ही देश के कोने-कोने से पहुंचे लोगों ने गंगा, यमुना तथा अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान किया। इस बार मकर संक्रांति दो दिन मनाई जा रही है। उदयातिथि को मानने वाले कल मकर संक्रांति मनाएंगे।

सूर्य उपासना के पर्व मकर संक्रांति पर आज संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। कड़ाके की सर्दी के बाद भी श्रद्धालुओं का सैलाब यहां पर त्रिवेणी के पावन जल में मुक्ति की डुबकी लगाने के लिए उमड़ रहा है। इस बार इस बार मकर संक्रांति पर सरदी के शबाब पर रहने के बाद भी लोगों की तादाद में कमी नहीं दिख रही है। प्रशासन का अनुमान है कि सूर्य उपासना के सबसे बड़े पर्व मकर संक्रांति पर रविवार और सोमवार को दो दिनों में 75 लाख से ज्यादा श्रद्धालु संगम की पावन धारा में डुबकी लगायेंगे।

मेला प्रशासन की ओर से एडीएम सिटी अतुल कुमार सिंह का दावा है कि रविवार सुबह 10 बजे तक 22 लाख श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं। संगम क्षेत्र में सूर्य उपासना के उत्साह में यहाँ कोई कमी देखने को नहीं मेल रही है।

लोग त्रिवेणी के जल में आस्था की डुबकी लगाकर आज के दिन का खास दान कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।

मकर संक्रांति के स्नान पर्व के साथ ही इलाहाबद के संगम तट पर आस्था का एक ऐसा शहर वजूद में है, जो अपने में कई मायने में अनोखा है । लगभग 1780 बीघे में बसा यह वह शहर है जहा सीमेंट और कंकरीट से बनी इमारतें नहीं बल्कि जिसमें कपड़े के तम्बुओं की बस्तियां बसती हैं। करीब एक लाख ऐसे आशियाने माघ मेला क्षेत्र में आबाद हो गए हैं, जिसमें पूरे महीने पांच लाख से ज्यादा लोग बसकर कल्पवास कर रहे हैं।

शुभ कार्य शुरू 

आज से शुभ कार्य शुरू हो गए हैं। अब होली पर होलाष्टक लगने से पहले तक विवाह के मुहूर्त के साथ अन्य शुभ कार्य भी संपन्न हो सकेंगे। लोग मुंडन, यज्ञोपवीत आदि के लिए काफी समय से उत्तरायण की प्रतीक्षा करते हैं। कई लोग कामना करते हैं कि उनके प्राण उत्तरायण में निकलें। क्योंकि उत्तरायण में प्राण निकलने से मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

खिचड़ी प्रसाद का हुआ वितरण

मकर संक्रांति पर खिचड़ी प्रसाद का वितरण हुआ। कई स्थानों पर लोगों ने सार्वजनिक रूप से खिचड़ी बांटी। संगम पर माघ मेला क्षेत्र के साथ ही शहर में भी जगह-जगह लोगों ने आज खिचड़ी के प्रसाद का वितरण किया।  देश भर में बेहद धूमधाम से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदुओं के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ राज्यपाल राम नाईक ने सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।

क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, साल की 12 संक्रांतियों में मकर संक्रांति का महत्व सबसे ज्यादा है। मकर संक्रांति के दिन देव मकर राशि में आते हैं। तब से मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है।

संक्रांति के दिन होता है सूर्य का उत्तरायण

यह पर्व जनवरी माह के तेरहवें, चौदहवें या पन्द्रहवें दिन पड़ता है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ होती है, इसलिए इसको उत्तरायणी भी कहते हैं। इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है।

SHAREShare on Facebook0Share on Google+0Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn0

Be the first to comment on "इलाहाबाद में मकर संक्रांति पर लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी, पर्व का बड़ा महत्व"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*