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इस तरह होता है RSS के सरकार्यवाह का चुनाव, सिर्फ ये सदस्य होते हैं वोटर

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राष्ट्रृीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई.

 नागपुर: राष्ट्रृीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई. आरएसएस के मौजूदा महासचिव और सह कार्यवाह भैयाजी जोशी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसी बैठक में यह फैसला होगा कि 2019 के आम चुनावों में संघ में नंबर दो कौन बनेगा. इतना ही नहीं, संगठन में बीजेपी मामलों के नए महासचिव का चुनाव भी इसी बैठक में होगा. माना जा रहा है कि दत्तात्रेय होसबोले पर संघ के नए सरकार्यवाह के रूप में मोहर लग सकती है. शनिवार को वर्तमान सरकार्यवाह अपने कार्यकाल के पूरा होने की घोषणा करेंगे और नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करेंगे.

कैसे चुने जाते हैं सरकार्यवाह

वर्तमान सरकार्यवाह नए सरकार्यवाह की चुनाव प्रकिया शुरू करने के आग्रह के बाद मंच से नीचे उतर जाएंगे. इसके बाद सबसे वरिष्ठ सह सरकार्यवाह के चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी की घोषणा करेंगे. इसके बाद चुनाव अधिकारी चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए नए सरकार्यवाह के लिए नाम मांगेंगे. केंद्रीय प्रतिनिधियों के इस चुनाव में केंद्रीय प्रतिनिधि ही वोटर होते हैं, कोई भी प्रचारक वोटर नहीं होता.

कौन करता है चुनाव
– चुनाव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) करती है. जिसकी मीटिंग नागपुर में आयोजित की जाती है.
– इस प्रतिनिधि सभा के 1300 सदस्य होते हैं.
– एबीपीएस की बैठक हर वर्ष मार्च के दूसरे और तीसरे हफ्ते में होती है.

संघ का सर्वोच्च पद क्या है
संघ का सर्वोच्च पद सरसंघचालक का होता है. इस पद का चुनाव नहीं होता. सरसंघचालक खुद अपने उत्तराधिकारी का चयन करता है. संघ के मौजूदा प्रमुख मोहन भागवत हैं.

संघ सरकार्यवाह क्या होता है
संघ का कार्यकारी प्रमुख होता है, जिसका संघ की सभी गतिविधियों पर पूरी तरह से नियंत्रण होता है. संघ सरकार्यवाह का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है. वर्तमान सरकार्यवाह 70 वर्षीय भैयाजी जोशी हैं. वह तीन कार्यकाल से इस पद पर बने हुए हैं.

कितना अहम है ये चुनाव
-नागपुर में ये चुनावी मीटिंग इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इस समय केंद्र के साथ 22 राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं. ऐसे में बीजेपी और उसकी अभिभावक संस्था संघ के बीच तालमेल बिठाने के लिए ये चुनाव महत्व रखता है.

– 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं. संघ खुद को अराजनैतिक संगठन का दर्जा देता है, लेकिन संघ के स्वयंसेवकों की बीजेपी के चुनावों में अहम भूमिका होती है.

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