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अररिया: ‘तीसरी कसम’ वाले ‘रेणु’ जहां से कभी लड़े थे चुनाव… जानें, वोटों का गणित

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समाजवादी विचारों वाले ‘रेणु’ ने 1972 में इस संसदीय सीट की फारबिसगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में चुनाव लड़ा था.

 हिंदी साहित्‍य के महान उपन्‍यासकार और कथाकार फणीश्‍वरनाथ ‘रेणु’ के प्रसिद्ध गांव औराई हिंगाना में लोकसभा उपचुनाव में रविवार को वोट डाले जाएंगे. यह गांव बिहार के अररिया लोकसभा क्षेत्र में पड़ता है. पहले यह पूर्णिया जिले का हिस्‍सा था. राजद सांसद तस्‍लीमुद्दीन के निधन के कारण अररिया लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. ‘रेणु’ की जन्‍मस्‍थली होने के कारण यह गांव पूरे अररिया का सबसे प्रसिद्ध गांव है.

समाजवादी विचारों वाले ‘रेणु’ ने 1972 में इस संसदीय सीट की फारबिसगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में चुनाव लड़ा था. कांग्रेस के अपने करीबी मित्र सरजू मिश्रा के खिलाफ उन्‍होंने चुनाव लड़ा था लेकिन सफलता नहीं मिली थी. इस विधानसभा सीट से ‘रेणु’ के बेटे पद्म पराग राय ‘वेणु’ 2010-15 के दौरान बीजेपी से विधायक रहे. 2015 में जब बीजेपी ने ‘वेणु’ को टिकट नहीं दिया तो वह नीतीश कुमार की जदयू में चले गए.

फणीश्‍वरनाथ ‘रेणु’ (1921-770)
‘रेणु’ ने ‘मैला आंचल’ और ‘परती परिकथा’ जैसे महत्‍वपूर्ण उपन्‍यास लिखे हैं. उनकी कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर क्‍लासिक फिल्‍म ‘तीसरी कसम’ बन चुकी है. हिंदी साहित्‍य में प्रेमचंद के बाद के दौर के सबसे सशक्‍त हस्‍ताक्षरों में शुमार हैं. उनकी एक अन्‍य कहानी ‘पंचलाइट’ पर पिछले साल एक फिल्‍म भी रिलीज हुई थी. 1970 में उनको ‘पद्मश्री’ दिया गया. 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद विरोधस्‍वरूप इस सम्‍मान को लौटा दिया.

अररिया
पिछली बार इस सीट से राजद नेता मोहम्‍मद तस्‍लीमुद्दीन जीते थे. उनकी जबर्दस्‍त लोकप्रियता थी. उनके बेटे सरफराज आलम जदयू के विधायक थे. लेकिन जब तस्‍लीमुद्दीन का निधन हुआ तो बेटे ने जदयू और विधायकी से इस्‍तीफा देकर राजद का दामन थाम लिया. नतीजतन राजद ने सरफराज को अपना उम्‍मीदवार बना दिया. दूसरी तरफ राजग ने पूर्व सांसद प्रदीप सिंह पर दांव लगाया है.

नीतीश ने लालू पर साधा निशाना
पिछले दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों में बहुत धन हासिल करने की जबर्दस्त भूख होती है. नीतीश ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘जो पाप करेगा उसे इसी जीवन में ही पाप की सजा भुगतनी पड़ती है.’’ नीतीश ने एक बार फिर महागठबंधन से नाता तोड़ने को बिहार के हित में लिया गया फैसला बताते हुए कहा कि केंद्र के सहयोग से बिहार नई ऊंचाई प्राप्त करेगा.

उन्होंने कहा कि वे अपनी सरकार के काम के आधार पर राजग प्रत्याशी के लिए वोट मांग रहे हैं. नीतीश ने महागठबंधन शासनकाल के दौरान वर्ष 2016 में प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी के निर्णय की ओर इशारा करते हुए उक्त सरकार में शामिल रहे राजद पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि शराबबंदी को लेकर हमारे साथ मानव श्रृंखला में हाथ मिलाने वाले आज इसका विरोध कर रहे हैं.

जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि विरोधी हमारे ऊपर लालू प्रसाद को जेल भेजने का आरोप लगा रहे हैं जबकि अपनी करनी से ही वह जेल गए. बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव पर प्रहार करते हुए सुशील ने पूछा कि आखिर 28 साल की उम्र में हजारों करोड़ की बेनामी संपत्ति कहां से उन्होंने जुटाई. सुशील ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार में सड़क, बिजली सहित हर क्षेत्र में काम हो रहा है लेकिन राजद इस प्रदेश को लालटेन युग की ओर ले जाना चाहती है.

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