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फिर ड्यूटी पर लौटा ‘चीता’, आतंकी मुठभेड़ में लगी थीं 9 गोलियां

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पिछले साल 15 अगस्त पर चेतन चीता को दूसरे सबसे बड़े वीरता पदक ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया था.

 नई दिल्ली: उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों से लोहा लेते हुए 9 गोलियां लगने से बुरी तरह जख्मी हुए सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता अब दोबारा ड्यूटी पर लौट आए हैं. उन्होंने बीते हफ्ते दिल्ली में सीआरपीएफ हेडक्वार्टर में ड्यूटी संभाली. मौत के मुंह से निकलकर चेतन कुमार का ड्यूटी पर ऐक्टिव होना किसी चमत्कार से कम नहीं है. बता दें कि 14 फरवरी 2017 को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में CRPF कमांडेंट को 9 गोलियां लगी थीं. जिसके बाद वे डेढ़ महीने तक कोमा में रहे थे. चेतन चीता ने कहा, दोबारा अपनी ड्यूटी संभालने से मैं गौरवान्वित हूं. बहुत अच्छा लग रहा है. पिछले साल 15 अगस्त पर चेतन चीता को दूसरे सबसे बड़े वीरता पदक ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया था.अधिकारियों का कहना है कि चीता अभी पहले की तरह फिट नहीं हो पाए हैं, इसलिए उन्हें मोर्चे पर तैनात नहीं किया जा सकता. अभी सीआरपीएफ की तरफ से उन्हें ऑफिस से जुड़ा काम देने पर विचार किया जा रहा है. उनकी पत्नी उमा सिंह ने कहा, ‘उनके स्वास्थ्य से जुड़ी अब भी कई समस्याएं बाकी हैं, जिन्हें खत्म होने में वक्त लगेगा. लेकिन, वह वापस ड्यूटी जॉइन कर बेहद खुश हैं और मोर्चे पर तैनात होने को लेकर भी उत्साहित हैं. चीता के देश के प्रति जज्बे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद बीते साल एम्स से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने कहा था कि वे दोबारा कोबरा बटालियन में शामिल होना चाहते हैं.

CRPF की 45वीं बटालियन के कमांडेंट थे चेतन चीता
CRPF की 45वीं बटालियन के कमांडेंट चेतन चीता कई गोलियां लगने के बावजूद मौके पर डटे रहे. उन्होंने अपनी टीम के साथ आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए उनके मंसूबे को नाकाम कर दिया था. उनके इस कारनामे के लिए चेतन चीता को स्वतंत्रता दिवस के दिन दूसरे सबसे बड़े वीरता पदक ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया. सेनाध्यक्ष और गृह मंत्री समेत पूरे देश ने चेतन चीता की जांबाजी की सराहना की थी.

डेढ़ महीने रहे कोमा में
बीते साल 14 फरवरी को कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में चीता बुरी तरह घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी. सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन में कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर तैनात चेतन चीता को 9 गोलियां लगी थीं. इसके चलते उनके दिमाग, दाईं आंख, पेट, दोनों बांहों, बाएं हाथ, हिप्स पर चोट लगी थी. करीब डेढ़ महीने तक कोमा में रहने के बाद उन्हें होश आया था. 9 गोलियां लगने और कोमा में रहने के बाद उनकी इस तरह से वापसी किसी करिश्मे से कम नहीं कही जा सकती.

चीता से सीख लें युवा
बता दें कि सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन नक्सली ऑपरेशंस में लोहा लेती है. अधिकारियों ने कहा कि घायल अधिकारी को पहले की तरह सामान्य होने में अब भी एक से दो साल लग सकता है, लेकिन देश सेवा का उनका जज्बा युवाओं को प्रभावित करने वाला है. अर्धसैनिक बलों और सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं को उनसे सीखना चाहिए.

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