BREAKING NEWS
post viewed 84 times

आर्मी डॉक्टरों को नौकरी छोड़ना पड़ सकता है भारी, देना होगा 2 करोड़ रुपये हर्जाना

army-doctor

आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज ला सकता है ऐसा एग्जिट बॉन्ड, जिसके तहत नौकरी बीच में छोड़ने वाले डॉक्टरों को देना पड़ सकता है 2 करोड़ का हर्जाना

 पुणे: आर्मी में नौकरी करने वाले डॉक्टरों को बीच में ही नौकरी छोड़ना अब भारी पड़ सकता है. पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) एक ऐसा एग्जिट बॉन्ड लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत सेना की नौकरी बीच में ही छोड़कर जाने वाले डॉक्टरों को 2 करोड़ का हर्जाना भरना होगा. AFMC के अधिकारियों की मानें तो यह फैसला रक्षा मंत्रालय को सलाह देने वाले पैनेल ने लिया है और इस बॉन्ड के अनुसार कॉलेज से मेडिकल कोर्स करने वाले छात्रों के लिए सेना में काम करना अनिवार्य होगा. यदि किसी वजह से वह ऐसा नहीं करता है तो उसकी प्रक्टिस सीज कर दी जाएगी.

क्या हैं वर्तमान नियम 

वर्तमान नियमों के अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स करने के बाद यदि मेडिकल का छात्र सेना में नौकरी नहीं करना चाहता है तो वह 28 लाख रुपये का हर्जाना भर कर बाहर निकल सकता है. वहीं अंडर ग्रेजुएट डिग्री लेने वालों के लिए यह राश 25 लाख रुपये है. पैनल द्वारा प्रस्तावित एग्जिट बॉन्ड यदि लागू कर दिया जाता है तो पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को बाहर निकलने के लिए 2 करोड़ रुपये और अंडरग्रेजुएट को 1 करोड़ रुपये देने होंगे.

2 करोड़ भी कम ही है 

इस बारे में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एसडी डुहान ने कहा कि AFMC में छात्रों को जिस स्तर की ट्रेनिंग और सुविधा दी जाती है उसके लिहाज से देखा जाए तो 2 करोड़ का हर्जाना भी बहुत कम लगता है. उन्होंने कहा कि एग्जिट बॉन्ड की रकम को भविष्य में और भी बढ़ाया जा सकता है. एक छात्र का औचित्य उसी वक्त खो जाता है जब वह आर्मी डॉक्टर की नौकरी छोड़कर अपने बेहतर भविष्य के लिए बाहर का रास्ता देखता है. आर्मी डॉक्टर का काम निस्सवार्थ सेवा होता है.

क्या कहते हैं रक्षा मंत्रालय के अधिकारी

हालांकि इस बारे में रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि अलग विचार रखते हैं. उनका कहना है कि बॉन्ड की राशि बढ़ाने के बाद हो सकता है छात्र AFMC ज्वाइन ही ना करें. लेकिन पैनल का कहना है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और ऐसे लोगों की कमी भी नहीं है जो इस तरह का कोर्स करना चाहते हैं.

बाहर निकलने के लिए देते हैं यह वजह

AFMC से कोर्स पूरा करने के बाद छात्र अक्सर कई बहाने बताकर बाहर निकल जाते हैं. मसलन, MBBS का कोर्स पूरा करने के बाद कोई कोर्स करना चाहते हैं, वह विदेश जा रहा है, प्राइवेट प्रैक्टिस करेगा, अब तक तय नहीं कर पाया कि क्या करेगा, AFMS में ग्रोथ नहीं है आदि.

बता दें कि AFMC भारतीय सेना का ही विंग है, जो मेडिकल सेवा प्रदान करता है. कॉलेज हर साल 130 छात्रों को MBBS कोर्स में एडमिशन देता है.

SHAREShare on Facebook0Share on Google+0Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn0

Be the first to comment on "आर्मी डॉक्टरों को नौकरी छोड़ना पड़ सकता है भारी, देना होगा 2 करोड़ रुपये हर्जाना"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*