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‘नानक शाह फकीर’ को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, कहा- सेंसर बोर्ड से मंजूरी के बाद रिलीज में किसी को बाधा का अधिकार नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ”नानक शाह फकीर” पर शर्तें थोपने के लिए शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की आलोचना की.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ पर शर्ते थोपने के लिए सिखों की शीर्ष धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की आलोचना करते हुए 13 अप्रैल को इस फिल्म के प्रदर्शन का रास्‍ता साफ कर दिया. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि एक बार केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से फिल्म को प्रमाण पत्र मिल जाने के बाद इसके प्रदर्शन में किसी भी तरह की बाधा नहीं डाली जा सकती. सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्‍टसि एएम खानविलकर और जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि सेंसर बोर्ड के प्रमाणन के बाद कोई भी समूह, संस्था, एसोसिएशन या व्यक्ति फिल्म के प्रदर्शन में किसी भी तरह का अड़्ंगा नहीं लगा सकता है.

नेवी के पूर्व अफसर है फिल्‍म निर्माता
याचिकाकर्ता नौसेना के पूर्व अधिकारी और फिल्म निर्माता हरिन्दर सिंह सिक्का ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. इसमें सिक्‍का ने कर दावा किया था कि सेंसर बोर्ड द्वारा 28 मार्च को इसे मंजूरी दिए जाने के बावजूद शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने हाल ही में इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है. याचिका के मुताबिक, यह फिल्म सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव के जीवन और उनके उपदेशों पर आधारित है.

सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट रिजीज के लिए पर्याप्‍त
पीठ ने कहा कि सेसर बोर्ड द्वारा एक बार प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद फिल्म निर्माता या वितरक को सिनेमाघर में इसका प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है बशर्ते किसी उच्च प्राधिकार ने इसमें सुधार अथवा इसे अमान्य नहीं किया हो.

ऐसे बाधित होगी अभिव्यक्ति
पीठ ने कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियों को बढा़वा दिया गया तो इसमें अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार को बाधित करने और अराजकता लाने की क्षमता है.

सभी राज्‍यों को नोटिस जारी
बेंच ने केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी करने के साथ ही निर्देश दिया कि जहां भी फिल्म का प्रदर्शन होता है वहां कानून व्यवस्था बनाये रखी जाए और किसी को भी गड़बड़ी पैदा करने की अनुमति नहीं दी जाए. इसके साथ ही न्यायालय ने सिक्का की याचिका नौ मई को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दी.

अभिव्यक्ति की आजादी के आधार पर याचिका
सिक्का ने अपनी याचिका में अपने बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार की रक्षा करने और अपने धार्मिक दृष्टिकोण के प्रचार को संरक्षण प्रदान करने का अनुरोध किया है.

विरोध के चलते तीन साल से अटकी 
इस फिल्म् को शुरू में सेंसर बोर्ड ने 30 मार्च , 2015 को मंजूरी दी थी और इसका प्रसारण अप्रैल 2015 में होना था, लेकिन व्यापक विरोध के कारण पंजाब में इस पर 2 महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था.

सुधार के बावजूद एसजीपीसी विरोध में
सिक्का के अनुसार फिल्म से संबंधित विभिन्न मूद्दों पर एसजीपीसी के सुझावों के अनुसार सुधार के बाद सेसर बोर्ड ने 28 मार्च, 2018 को इसे फिर से मंजूरी दी, लेकिन एक बार फिर एसजीपीसी ने एक पत्र के माध्यम से फिल्म को दिया गया अपना समर्थन वापस ले लिया है.

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