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अक्षय तृतीया पर कल खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट

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मां गंगा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखवा) से आज (मंगलवार) गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो गयी है.

 लखनऊ: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अक्षय तृतीया पर कल यानी बुधवार से शुरू हो रही है. बुधवार दोपहर 12:15 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे, जबकि गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 1.15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. प्रसित्र केदारनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे.

HIGHLIGHTS

  • बुधवार दोपहर 12:15 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे

  • दोपहर 1.15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे गंगोत्री धाम के कपाट

  • केदारनाथ धाम 29 अप्रैल व बदरीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे

गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि मां गंगा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखवा) से आज (मंगलवार) गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो गयी है. पौने 12 बजे डोली धाम के लिए रवाना हो गई. बुधवार दोपहर को गंगा की डोली गंगोत्री धाम पहुंचेगी. भैरव घाटी में आज रात का पड़ाव होगा. विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दोपहर 1:15 पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष बागेश्वर उनियाल ने बताया कि बुधवार को अक्षय तृतीया पर मां यमुना के भाई शनि देव की अगुवाई में मां यमुना को विदा किया जाएगा. पहली बार यमुना की विदाई खरसाली में नव निर्मित यमुना मंदिर से होगी. इससे पूर्व में यमुना का वास गांव के ही राजराजेश्वरी मंदिर में हुआ करता था. बता दें कि गंगोत्री मंदिर खोले जाने का मुहूर्त चैत्र नवरात्र आरंभ होने के अवसर पर 16 मार्च को निकाला गया था.

सर्दियों में बंद हो जाते हैं चारों धाम
चारों धाम उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण सर्दियों में भारी बर्फवारी की चपेट में रहते हैं और इसलिए उन्हें श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद कर दिया जाता है. अगले साल मंदिरों के कपाट दोबारा अप्रैल—मई में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं. हर साल अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर तक चलने वाली इस वार्षिक तीर्थयात्रा को गढवाल हिमालय की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है.

अन्य स्थानों पर स्थापित की जाती हैं मूर्तियां
बर्फबारी के कारण कपाट बंद होने पर गंगोत्री की मूर्ति को मुखवा में स्थापित कर दिया जाता है. शीतकाल में छह माह तक मां गंगा की पूजा यहीं होती है. यमुनाजी की उत्सव मूर्ति शीतकालीन पड़ाव खरसाली गांव में स्थापित की जाती है.

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