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पूरे विश्व में ऑनलाइन मिलेंगी यूपी की मशहूर बनारसी साड़ियां, भदोही की कालीन और कन्नौज का इत्र

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‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के अंतर्गत अमेजन से जोड़े जाएंगे उत्पाद, उत्तर प्रदेश सरकार अमेजन ऑनलाइन पोर्टल से करार करने की तैयारी में है.

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार और अमेजन ऑनलाइन पोर्टल के बीच कांट्रैक्ट होने से वह दिन दूर नहीं जब विश्व के  किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के बनारस में निर्मित बनारसी साड़ियों या भदोही की कालीन या फिर प्रतापगढ़ के आंवला प्रोडक्ट जिसकी भी दरकार हो उसकी पसंद की चीज उसके घर के दरवाजे पर उपलब्ध हो जाएगी.

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत अमेजन से जोड़े जाएंगे उत्पाद
उत्तर प्रदेश सरकार अमेजन पोर्टल से करार करने की तैयारी में है और राज्य के बेहतरीन मशहूर उत्पाद मसलन कन्नौज का इत्र, बनारस की साड़ी, भदोही के कालीन या मुरादाबाद का पीतल दुनिया भर में शौकीन लोगों को आसानी से उपलब्ध होंगे. राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘अमेजन पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत सभी उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे और इसके लिए एक एमओयू प्रस्तावित है.

उत्तर प्रदेश में निर्मित खादी उत्पाद भी मिलेंगे ऑनलाइन
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल 30 अप्रैल से 06 मई तक अमेरिका के दौरे पर गया था और वहां निवेश की संभावनाओं को लेकर उत्साहजनक नतीजे हासिल हुए. सिद्धार्थनाथ सिंह राज्य सरकार के प्रवक्ता भी हैं. उन्होंने बताया कि अमेजन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जय कार्ने के साथ वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट के अन्तर्गत निर्मित उत्पादों की ई-मार्केटिंग अमेजन पोर्टल पर करने हेतु एमओयू हस्ताक्षरित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई. उन्होंने बताया इस प्रकार की व्यवस्था उत्तर प्रदेश में निर्मित खादी उत्पादों के बारे में भी की जा रही है. स्थानीय कारोबारियों में सरकार की इस पहल को लेकर खासा उत्साह है . प्रतापगढ़ के एक आंवला उत्पादक ने मीडिया को बताया कि उन्होंने तो अपने क्षेत्र में सरकार की इस पहल का प्रचार भी शुरू कर दिया है कि अब उनकी आंवला कैण्डी और मुरब्बा आनलाइन आसानी से उपलब्ध रहेगा.

भदोही की कालीन का भी बढ़ेगा दायरा
भदोही के कालीन कारोबारी इकबाल खान भी आनलाइन बिक्री को लेकर प्रदेश सरकार के प्रयासों से प्रसन्न हैं. हालांकि उनका कहना है कि प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने के बाद ही पता लगेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद की मांग कितनी है. वह इस बात से खासे आशान्वित हैं कि दुनिया भर में कालीन के शौकीनों की कमी नहीं है और आनलाइन बिक्री से उनके उत्पादों की पहुंच का दायरा बढे़गा.

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