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CBI को जब्त पासपोर्ट लंबे समय तक अपने पास रखने का अधिकार नहीं : मुंबई HC

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एनएसईएल घोटाले के मुख्य आरोपी जिग्नेश शाह के मामले में अदालत का फैसला

मुंबई : मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिए आदेश में सीबीआई द्वारा जब्त पासपोर्ट को अपने पास रखने को गैर कानूनी बताते हुए वादी को उसका पासपोर्ट वापस करने को कहा. हाईकोर्ट ने ये आदेश नेशनल स्पाट एक्सचेंज लि. (एनएसईएल) घोटाले के मुख्य आरोपी कारोबारी जिग्नेश शाह के मामले में दिया. गौरतलब है कि जिग्नेश का पासपोर्ट तीन साल से ज्यादा समय तक सीबीआई के कब्जे में था. कोर्ट ने सीबीआई की कार्रवाई को अवैध और कानून के विपरीत बताते हुए जांच एजेंसी को उनका यात्रा दस्तावेज वापस करने का निर्देश दिया है.

सीबीआई को पासपोर्ट जब्त करने का अधिकार, पास रखने का नहीं
न्यायमूर्ति प्रकाश देव नाइक ने इस मामले में सुनवाई करते हुए, 63 मून्स के संस्थापक और अध्यक्ष शाह की अर्जी को स्वीकार किया. पूर्व में इस कंपनी का नाम फाइनेंशल टेक्नॉलोजीज ऑफ इंडिया लि था. जिग्नेश शाह ने कोर्ट में सीबीआई के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के 2017 के आदेश को चुनौती दी थी. क्योंकि विशेष अदालत ने पासपोर्ट लौटाए जाने के उनके अनुरोध को अस्वीकृत कर दिया था. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नाइक ने अपने आदेश में कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी पासपोर्ट जब्त कर सकती है, पर जब्त पासपोर्ट को कानूनी तौर पर अपने कब्जे में नहीं रख सकती है. कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10 (3 ) के तहत सीबीआई को जब्त दस्तावेज पासपोर्ट अधिकारी को सौंप देना चाहिए था.

पासपोर्ट प्राधिकरण ही पासपोर्ट रोकने का अधिकारी
न्यायालय के मुताबिक यह अधिकार पासपोर्ट अधिकारी के पास है और वो ही पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10 (3) के तहत विदेश यात्रा करने के लिए आवश्यक सरकार द्वारा जारी इस दस्तावेज अर्थात पासपोर्ट पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू करने का प्राधिकारी है. उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी के पास पासपोर्ट को अपने पास रोके रखने का अधिकार नहीं है. ऐसी शक्ति सिर्फ पासपोर्ट प्राधिकरण के पास है जो कानून के तहत गठित एक निकाय है. न्यायमूर्ति नाइक ने कहा कि मौजूदा मामले में सीबीआई ने पासपोर्ट जब्त कर की कार्रवाई के बाद करीब तीन साल तक इसे अपने पास रखा जो इसपर रोक लगाने के समान है और कानून के तहत इसकी इजाजत नहीं है. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई के पास अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 102 के तहत पासपोर्ट जब्त करने की कार्रवाई का अधिकार हो सकता है पर वह पासपोर्ट अधिनियम के तहत उसे कानूनन अपने कब्जे में नहीं रख सकती.

बिना इजाजत विदेश यात्रा की अनुमति नहीं
कोर्ट ने फैसले में कहा, यह सरासर कानून का उल्लंघन है. सीबीआई का पासपोर्ट अपने पास इतने लंबे समय तक रखना गैर कानूनी है. कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रार्थी को उसका पासपोर्ट वापस किया जाए. पासपोर्ट प्राधिकरण अधिनियम की धारा 10 (3) के तहत पासपोर्ट पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि जिग्नेश शाह को जमानत देने के दौरान विशेष सीबीआई अदालत की ओर से लगाई गई शर्तों का पालन अनिवार्य होगा. और इन शर्तों के अंतर्गत उन्हें विदेश यात्रा से पूर्व सम्बंधित विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा

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