BREAKING NEWS
post viewed 110 times

‘दिल जो ना कह सका’… एक अमर गाने के बनने की क्या है कहानी?

bheegi-raat

रोशन साहब चाहते थे कि इस गाने की धुन कुछ ऐसी तैयार की जाए कि वो अलग अलग आवाजों में उतनी ही सुंदर लगे. लिहाजा उन्होंने इस गाने को शास्त्रीय राग मारू बिहाग की जमीन पर तैयार किया था

शास्त्रीय संगीत में राग मारू बिहाग को अपेक्षाकृत नया राग माना जाता है. साल 1965 की बात है. एक फिल्म रिलीज हुई जिसका टाइटिल था- भीगी रात. इस फिल्म के निर्देशक थे कालीदास. कालीदास हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उन चुनिंदा लोगों में से थे जो अभिनय, लेखन और निर्देशन सब किया करते थे. बतौर निर्देशक कालीदास ने पहली फिल्म बनाई थी- एक झलक. इसके बाद उन्होंने पुलिस, अदालत और हाफटिकट जैसी फिल्में भी बनाईं.

भीगी रात भी एक ऐसी ही फिल्म थी जिसमें निर्माता-निर्देशक होने के साथ-साथ कहानी भी कालीदास की ही लिखी हुई थी. फिल्म में अशोक कुमार, प्रदीप कुमार और मीना कुमारी मुख्य अभिनेता थे. फिल्म में संगीत रोशन का था. रोशन साहब अपनी फिल्मों के संगीत में शास्त्रीयता को लेकर आज भी पहचाने जाते हैं.

दरअसल, रोशन साहब ने बाकयदा शास्त्रीय संगीत की तालीम ली थी. वो भी किसी ऐसे वैसे कलाकार से नहीं बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे बड़े कलाकारों में शुमार उस्ताद अलाउद्दीन खान से उन्होंने सीखा था. बाद में रोशन ने उस्ताद बुन्दू खान से भी संगीत सीखा. बाबा अलाउद्दीन खान ने रोशन को सारंगी बजाना सिखाया था. रोशन साहब ने जितनी भी फिल्मों में संगीत दिया उसमें आप सांरगी का बेहतरीन इस्तेमाल देख और सुन सकते हैं.

खैर, तो हुआ यूं कि फिल्म भीगी रात में सिचुएशन कुछ ऐसी थी कि एक ही गाना दो बार फिल्माया गया था. एक बार प्रदीप कुमार और दूसरी बार मीना कुमारी पर. गाने के बोल थे- दिल जो ना कह सका वही राजे दिल कहने की रात आई है. प्रदीप कुमार के लिए इस गाने को मोहम्मद रफी और मीना कुमारी के लिए लता मंगेशकर को गाना था. रोशन साहब चाहते थे कि इस गाने की धुन कुछ ऐसी तैयार की जाए कि वो अलग अलग आवाजों में उतनी ही सुंदर लगे. लिहाजा उन्होंने इस गाने को शास्त्रीय राग मारू बिहाग की जमीन पर तैयार किया था. आइए आपको इस गाने के दोनों ‘वर्जन’ सुनाते हैं. जिसमें शुरुआत में बहुत मामूली सा फर्क है.

आज हम जिस राग की बात कर रहे हैं उसमें और भी कई फिल्मी गाने कंपोज किए गए हैं. जिसमें एक गाना किशोर कुमार का गाया हुआ भी है. इस गाने का जिक्र हम अलग से इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इस गाने में किशोर कुमार ‘क्लासिकल’ अंदाज में गा रहे हैं. आम तौर पर ऐसा कहा जाता है कि चूंकि किशोर कुमार ने गायन की कोई परंपरागत ट्रेनिंग नहीं ली थी इसलिए वो क्लासिकल अंदाज के गानों से बचते थे. 1963 में रिलीज फिल्म एक राज का ये गाना आप सुनिए, जिसमें संगीत चित्रगुप्त जैसे बड़े संगीतकार का है. चित्रगुप्त 1950 से लेकर 70-80 तक के दशक के बड़े संगीतकारों में शुमार थे. जिन्हें उनकी शानदार धुनों के लिए अब भी याद किया जाता है.

इसके अलावा 1960 में रिलीज फिल्म-एक फूल चार कांटे का ‘मतवाली नार ठुमक ठुमक’ (संगीतकार- शंकर जयकिशन), 1976 में रिलीज फिल्म-महबूबा का ‘राधा जाए ना’ (संगीतकार- आरडी बर्मन), 1963 में रिलीज फिल्म-सेहरा का ‘तुम तो प्यार हो सजना’ (संगीतकार- रामलाल हीरापन्ना) राग मारू बिहाग की जमीन पर ही कंपोज किया गया था. आइए आपको इसमें से एक गाना सुनाते हैं, जो आज भी बहुत लोकप्रिय गानों की फेहरिस्त में शुमार है.

आइए अब आपको राग मारू बिहाग के शास्त्रीय पक्ष के बारे में बताते हैं. राग मारू बिहाग कल्याण थाट का राग है. इस राग में दोनों ‘म’ का प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा बाकि सभी स्वर शुद्ध लगते हैं. राग मारू बिहाग में वादी स्वर ‘ग’ है और संवादी स्वर ‘नी’ है. इस राग को गाने बजाने का समय रात का पहला प्रहर है. इस राग के आरोह में ‘रे’ और ‘ध’ नहीं लगाते हैं. जबकि अवरोह में सभी सात स्वर इस्तेमाल किए जाते हैं. इसलिए इस राग की जाति औडव संपूर्ण होती है. इस राग के नाम से ऐसा लगता जरूर है कि इसमें मारू और बिहाग का मिश्रण होगा लेकिन सच ऐसा नहीं है. दरअसल राग मारू बिहाग कल्याण और बिहाग रागों का मिश्रण माना जाता है. संगीत के शास्त्र के मुताबिक राग मारू बिहाग अपेक्षाकृत नया राग है और इसीलिए इस राग में बहुत पारंपरिक बंदिशें नहीं मिलती हैं. नए जमाने के शास्त्रीय गायकों में ये राग खासा लोकप्रिय है.

आइए अब आपको इस राग का आरोह अवरोह और पकड़ बताते हैं-

आरोह- ऩी सा ग म (तीव्र) प, नी सां

अवरोह- सां नी धप ध S प म(तीव्र) ग, म(तीव्र) ग सारे सा

पकड़- नी धप S ध S प म (तीव्र) प, म (तीव्र) ग, म (तीव्र) ग, सा रे सा

इस राग के बारे में और विस्तार से जानकारी लेने के लिए आप इस वीडियो को देख सकते हैं.

आइए अब हमेशा की तरह आपको राग के शास्त्रीय पक्ष की अदायगी को समझाने के लिए कुछ वीडियो दिखाते हैं. जैसा कि हमने आपको राग मारू बिहाग के शास्त्रीय पक्ष का जिक्र करते हुए बताया था कि इस राग को ज्यादा प्राचीन राग नहीं माना जाता है. इसलिए आज आपको जो दो वीडियो हम दिखाने जा रहे हैं वो मौजूदा दौर के बड़े कलाकारों का है. दिलचस्प बात ये है कि पहला वीडियो है पटियाला घराने के दिग्गज गायक पंडित अजय चक्रवर्ती का और दूसरा वीडियो है उन्हीं की शिष्या और बेटी कौशिकी चक्रवर्ती का.

इस राग के शास्त्रीय वादन पक्ष के लिए जो वीडियो हम आपको दिखा रहे हैं वो पद्मभूषण और ग्रेमी अवॉर्ड से सम्मानित दिग्गज मोहनवीणा वादक पंडित विश्वमोहन भट्ट का है. जो राग मारू बिहाग बजा रहे हैं. आप इस राग का आनंद लीजिए और हम आज की कहानी को यहीं खत्म करते हैं. अगली बार एक नया राग. कुछ नए किस्से. कुछ नई कहानियां होंगी.

 

SHAREShare on Facebook0Share on Google+0Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn0

Be the first to comment on "‘दिल जो ना कह सका’… एक अमर गाने के बनने की क्या है कहानी?"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*