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सिर्फ 30 रुपए की दिहाड़ी पर खाना बनाती हैं महिलाएं, प्रदर्शन कर ‘भूखा भारत तड़प रहा’ का दिया नारा

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मुरादाबाद: महंगाई के इस दौर में जब नरेगा में भी मजदूरों को 200 से 300 रुपए मिलते हैं. वहीं, देश की सबसे चर्चित और सफल योजनाओं में से एक सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत खाना बनाने वाली महिलाओं को को जितने रुपए मिलते हैं, उससे एक वक़्त का खाना भी नहीं मिल सकता. मिड-डे मील बनाने वाली महिलाओं को प्रतिदिन 30 रुपए मिलते हैं. यानी उनकी एक माह की सेलरी 1000 रुपए से भी कम है.

खाना बनाने वाली महिलाओं का परिवार भूखा
मिड-डे मील सरकार की बेहद सफल योजनाओं में से एक है. लंबे समय से चल रही इस योजना के कारण बच्चे स्कूलों की ओर आकर्षित हुए हैं. बच्चों को क्वालिटी खाना खिलाया जाता है. इसे स्कूलों में बच्चों की न सिर्फ उपस्थिति बढ़ी है बल्कि कुपोषण और भूखे रहने जैसी स्थिति से भी निपट लिया गया है. बच्चों को कम से कम दिन में भोजन मिल जाता है. वहीं बच्चों के लिए भोजन बनाने वाली महिलाओं का बुरा हाल है. उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से सिर्फ 30 रुपए दिए जाते हैं. इससे उनके परिवार का खर्चा तक नहीं निकलता.

‘योगी सरकार, रोटी दो रोटी दो’ के लगाए नारे
इसे लेकर अब पूरे प्रदेश में मिड-डे मील बनाने वाली महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं. सोमवार को खाना बनाने वाली महिलाओं ने मुरादाबाद में प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में आंबेडकर पार्क पहुंची महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की. अपनी तनख्वाह बढ़ाए जाने की मांग कर रही महिलाओं ने कहा कि 30 रुपए की दिहाड़ी से आखिर अपना घर कोई कैसे चला सकता है. महिलाओं ने ‘योगी सरकार, रोटी दो रोटी दो और डिजिटल इंडिया चमक रहा है, भूखा भारत तड़प रहा है’ के नारे लगाए. महिलाओं ने प्रदर्शन करते हुए सरकार से मांग की कि उनकी तनख्वाह बढ़ाई जाए, तभी ही वह काम कर पाएंगी. प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा.

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