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बुराइयों से दूर रहकर अच्छाइयों को अपनाना ही है रमज़ान की तालीम

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बुराइयों से दूर रह कर अच्छाइयों को अपनाना ही रमज़ान की तालीम है. ये पाक महीना रोज़ेदार को अल्लाह के नज़दीक ले जाता है. दुनियाभर में लोग रमज़ान के पाक महीने में रोज़ा रखते है, इबादत करते हैं. लेकिन रोज़ा रखना कोई आसान काम नहीं है. जिसमें इच्छाशक्ति और आस्था है, वही इसे जी सकता है. ये मात्र रस्म या धर्म तक ही नहीं बल्कि अपने आंतरिक पुरसुकून की तलाश का एक ज़रिया है. रोज़े में आप पानी या जूस का एक घूंट भी नहीं पी सकते, खाना तो दूर की बात है. हालांकि रोज़ा रखना सभी के लिए ज़रूरी नहीं है. एक श्रेणी के तहत बीमार, बुजुर्ग, बच्चों, गर्भवती और मासिक धर्म की स्थिति से गुज़र रही महिलाओं को इससे छूट है.

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इबादत करता एक शख़्स.

रोज़ा तोड़ते रोज़ेदार.

भीड़ में अपने परिवार को ढूंढते बच्चे.

दुकान पर सजी सेवईयां.

जामा मस्ज़िद के पास जगमगाती लाइट्स.

ठेले पर रखे खजूर.

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