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पत्रकार शुजात बुखारी के जनाजे में उमड़े हजारों कश्मीरी, आतंक को दिया करारा जवाब,कुछ इस तरह निकला ‘राइजिंग स्टार’,सच्ची श्रद्धांजलि

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जम्मू-कश्मीर के बारामूला में पत्रकार शुजात बुखारी के जनाजे में लोगों का सैलाब उमड़ा पड़ा. उनको आखिरी बिदाई देने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग जनाजे में शामिल हुए और आतंकियों को करारा जवाब दिया. अब से कुछ देर बाद शुजात बुखारी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाएगा.

शुजात बुखारी के जनाजे में भारी संख्या में शामिल होकर घाटी की जनता ने आतंकियों को एक बार फिर दिखा दिया कि वो उनके मंसूबों के पूरी तरह खिलाफ है. मालूम हो कि गुरुवार को श्रीनगर में तीन बाइक सवार आतंकियों ने राइजिंग कश्‍मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी.

इस हमले में बुखारी की सुरक्षा में तैनात दो जवानों की भी मौत हो गई थी. इस हत्याकांड में कश्मीर हॉस्पिटल से फरार आतंकी नावेद जट का हाथ माना जा रहा है. संदिग्धों की तस्वीर में बाइक पर बीच में बैठा आतंकी नावेद जट बताया जा रहा है.

लश्कर आतंकी नावेद जट पिछले दिनों श्रीनगर के अस्पताल से फरार हो गया था. हालांकि पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन सीसीटीवी से तीन संदिग्धों की तस्वीर की पहचान कराई जा रही है.

फिलहाल पहचान के लिए स्थानीय लोगों की मदद ली जा रही है. हालांकि, लश्कर ने शुजात बुखारी की हत्या की निंदा की है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि ये आतंकी संगठन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी और हमलावरों की पहचान की जा रही है. जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से हमलवारों से जुड़ी जानकारी देने के लिए मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं.

इसके साथ ही अब पुलिस इस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर हमलावरों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है. पुलिस की ओर से जारी दो तस्वीरों में तीन लोग बाइक पर जाते दिख रहे हैं जिन्होंने अपने चेहरे ढके हुए हैं.

पहले भी बुखारी पर हो चुके हैं जानलेवा हमले

शुजात बुखारी पर इससे पहले भी कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं. जुलाई 1996 में आतंकियों ने उन्हें सात घंटे तक अनंतनाग में बंधक बनाकर रखा था. साल 2000 में जान से मारने की धमकी के बाद बुखारी को पुलिस सुरक्षा दी गई थी. साल 2006 में भी बुखारी पर जानलेवा हमला किया गया था.

एक साल पहले ही पाकिस्तानी आतंकियों से उन्हें धमकी मिली थी. इसके बाद उन्हें एक्स श्रेणी की सुरक्षा मिली थी, जिसमें उनके साथ दो सुरक्षाकर्मी तैनात रहते थे. शुजात  बुखारी भारत-पाक शांति वार्ता और कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए लगातार सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे.

इसके साथ ही उनके अखबार राइजिंग कश्मीर को घाटी की आवाज कहा जाता है. जान के खतरे के बावजूद वो हमेशा कहा करते थे कि बंदूक का डर दिखाकर उनकी कलम को शांत नहीं कराया जा सकता.

श्रीनगर. अपने प्रधान संपादक की हत्या के बाद अंग्रेजी अखबार ‘राइजिंग कश्मीर’ ने शुक्रवार को अपना दैनिक संस्करण प्रकाशित किया. शुजात बुखारी की गुरुवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उसमें उनके दो अंगरक्षक (पीएसओ या निजी सुरक्षा अधिकारी) भी मारे गए थे. बुखारी और उनके दो अंगरक्षकों की इफ्तार से थोड़ा पहले श्रीनगर के लाल चौक के निकट प्रेस एनक्लेव में राइजिंग कश्मीर के कार्यालय के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. बुखारी के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं.

राइजिंग कश्मीर का दैनिक संस्करण शुक्रवार की सुबह बाजार में आया जिसमें पहले पूरे पन्ने पर काले रंग की पृष्ठभूमि में दिवंगत प्रधान संपादक की तस्वीर है. इस पन्ने पर एक संदेश लिखा है: अखबार की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. इसमें लिखा है, ‘‘आप अचानक चले गए लेकिन अपने पेशेवर दृढ़ निश्चय और अनुकरणीय साहस के साथ आप हमारे लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे. आपको हमसे छीनने वाले कायर हमारी आवाज को दबा नहीं सकते. सच चाहे कितना भी कड़वा क्यों न हो लेकिन सच को बया करने के आपके सिद्धांत का हम पालन करते रहेंगे. आपकी आत्मा को शांति मिले.’’

उमर अब्दुल्ला ने किया ट्वीट
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बुखारी की हत्या के बावजूद दैनिक को प्रकाशित करना उनके प्रति सबसे उचित श्रद्धांजलि है क्योंकि दिवंगत पत्रकार भी यही चाहते. उमर ने अखबार के पहले पन्ने की तस्वीर को साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘‘काम जारी रहना चाहिए, शुजात भी यही चाहते होते. यह आज का राइजिंग कश्मीर का अंक है. इस बेहद दुख की घड़ी में भी शुजात के सहयोगियों ने अखबार निकाला जो उनके पेशवराना अंदाज का साक्षी है और दिवंगत अधिकारी को श्रद्धांजलि देने का सबसे सही तरीका है.’’

पूरे देश में निंदा
बुखारी की हत्या की जम्मू-कश्मीर समेत पूरे भारत में निंदा हो रही है. जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने घटना के प्रति हैरानी और दुख जताया. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार बुखारी की हत्या मीडिया जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. एक संदेश में वोहरा ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए और उनके परिवार को इस अपूर्णीय क्षति को सहने की ताकत देने की प्रार्थना की. उन्होंने बुखारी के भाई और कैबिनेट मंत्री अशरत अहमद बुखारी से बात की और संवदेनाएं व्यक्त कीं.

महबूबा मुफ्ती ने भी की निंदा
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी वरिष्ठ पत्रकार की हत्या की कड़ी निंदा की. संवेदना संदेश में मुख्यमंत्री ने बुखारी की हत्या को बेहद बर्बर, निंदनीय और दुखद बताया. उन्होंने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘उनकी हत्या से यह साबित हुआ है कि हिंसा तर्कसंगत और विवेकशील पड़ताल के आगे टिक नहीं सकती. क्रूरता के इस अमानवीय कृत्य की पूरा राज्य एक आवाज में निंदा कर रहा है.’’ उन्होंने कहा कि मीडिया के पैर जमाने में बुखारी ने जो भूमिका निभाई और जो योगदान दिया वह राज्य के पत्रकारिता के इतिहास का हिस्सा बन गया है.

पैतृक गांव में होंगे सुपुर्दे खाक
बुखारी को आज उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में उनके पैतृक गांव क्रेरी में सुपुर्दे खाक किया जाएगा। प्रार्थना सभा 11 बजे होगी. आतंकवादी कश्मीर के तीन दशक के हिंसा के इतिहास में बुखारी समेत चार पत्रकारों की जान ले चुके हैं. 1991 में ‘ अलसफा ’ के संपादक मोहम्मद शाबान वकील की हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने हत्या कर दी थी. बीबीसी के पूर्व पत्रकार युसूफ जमील 1995 में तब घायल हो गए थे जब उनके दफ्तर में एक बम विस्फोट हुआ था लेकिन उस घटना में एएनआई के कैमरामैन मुश्ताक अली की मौत हो गई थी. इसके बाद, 31 जनवरी 2003 को नाफा के संपादक परवाज मोहम्मद सुल्तान की उनके प्रेस एनक्लेव स्थित कार्यालय में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

 

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