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चीन की चालः कर्ज के जाल में फंस रहे दक्षिण एशियाई देश

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चीन के साथ कारोबार कर रहे देशों का व्यापार घाटा साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है.

नई दिल्ली. सुरक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत को चारों तरफ से घेरे में लेने की कोशिश कर रहा चीन, अब दक्षिण एशियाई देशों को अपने कर्ज के जाल में फांस रहा है. खासकर दक्षिण एशिया के तीन देशों- पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार, के साथ चीन के बढ़ते व्यापारिक संबंध अब इन देशों के लिए ‘ड्रैगन’ के घेरे में जाने का सबब बन रहे हैं. दरअसल, इन तीनों देशों का व्यापार घाटा साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है. नेपाल के प्रमुख अखबार काठमांडू पोस्ट की खबर के अनुसार, अकेले नेपाल में, चीन के साथ आयात और निर्यात मूल्यों के बीच का अंतर 21.4 प्रतिशत बढ़ गया है. इस वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में यह अंतर 1,24.57 अरब रुपए का रहा. नेपाल के केंद्रीय बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के अनुसार वर्ष 2015-16 की समीक्षा अवधि के दौरान यह आंकड़ा 91 अरब रुपयों से ज्यादा का था. अखबार लिखता है कि चीन धीमी रफ्तार से ही सही, लेकिन इन देशों को कर्ज के जाल में फंसने के लिए मजबूर करता जा रहा है.

बेल्ट रोड इनीशिएटिव की फांस
चीन अपने ‘बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ (बीआरआई) के तहत इन देशों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है. इस परियोजना को पहले ‘वन बेल्ट वन रोड’ प्रोजेक्ट कहा गया था. चीन इस प्रोजेक्ट के जरिए इन देशों में सड़क, रेल और जलमार्गों के विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है. बीआरआई के तहत पाकिस्तान में जहां चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का निर्माण हो रहा है, वहीं नेपाल में तिब्बत के रास्ते रेल नेटवर्क बिछाने की योजना है. इसके पहले श्रीलंका में एक बंदरगाह निर्माण में भी चीन दखल दे चुका है. वहीं, म्यांमार में भी ‘ड्रैगन’ देश ने कई परियोजनाओं में निवेश कर रखा है. इन्हीं परियोजनाओं के जरिए वह एक तरफ जहां दक्षिण एशिया के इन अविकसित देशों को अपने ‘पक्ष’ में कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दक्षेस देशों में सबसे प्रमुख भारत पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति भी बना रहा है.

चीन ने कर्ज जाल की बात नकारी
दक्षिण एशिया के तीन देशों को कर्ज के जाल में फांसने से संबंधित नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्ट की खबरों को चीन ने सिरे से खारिज किया है. चीन के युनान प्रांत के विदेशी मामलों के विभाग के डायरेक्टर जनरल ली जिनमिंग ने इस अवधारणा को मानने से इनकार किया. अखबार के अनुसार, जिनमिंग ने कहा कि चीन इन देशों के साथ दि्वपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है. विकास परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता देकर वह इन देशों की आर्थिक समृद्धि बढ़ाने के लिए काम कर रहा है. जिनमिंग ने काठमांडू पोस्ट से कहा, ‘इन देशों को दीर्घकालिक ऋण जाल में मजबूर करने के बजाय, हमने इस क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी ढांचा बनाने के लिए वित्त पोषण में वृद्धि की है. इससे इन देशों निर्यात क्षमता बढ़ेगी.’ देशों को चीन के कर्ज के बोझ तले लादने की बात पर जिनमिंग ने चाइना-साउथ एशिया को-ऑपरेशन फोरम की बैठक में कहा, ‘चीन ने इन देशों को यूं ही कर्ज नहीं दे दिया है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति और व्यावहारिक जरूरत के गहन अध्ययन के बाद कारोबार के उद्देश्य से यह लोन दिया है.’ यह बैठक युनान प्रांत की राजधानी कुन्मिंग में हुई थी.

बीआरआई के जरिए आएगी समृद्धि
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, चाइना-साउथ एशिया को-ऑपरेशन फोरम की पहली बैठक में ली जिनमिंग ने कहा कि चीन द्वारा चलाए जा रहे बीआरआई प्रोजेक्ट से दक्षिण एशियाई देशों में न सिर्फ समृद्धि आएगी, बल्कि यह प्रोजेक्ट इस क्षेत्र के देशों को भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के करीब भी लाएगा. जिनमिंग के अनुसार, बीआरआई प्रोजेक्ट के जरिए दक्षिण एशियाई देशों के बीच भौगोलिक और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे. अखबार के अनुसार, चाइना-साउथ एशिया को-ऑपरेशन फोरम की बैठक में देशों के बीच संपर्क बढ़ाने, कारोबार की बढ़ोतरी, गरीबी उन्मूलन और वित्तीय सहायता जैसे मामलों पर विचार-विमर्श किया गया. बैठक के बाद युनान की सरकार के विदेश विभाग द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा में कहा गया कि चीन, दक्षिण एशिया के देशों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि सबके हितों की रक्षा हो. साथ ही सभी देशों के एक होने से समग्र विकास की धारणा को बल मिलेगा.

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