पहाड़ों को नहलाती सूर्य देव की किरणें और भोर के आगमन पर सोने-सी दमकती कांगड़ा घाटी। यहां रोमांच से लेकर धार्मिक और धरोहर के दर्शन हर स्थान पर होते हैं। यहां ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए कई रूट हैं। इनमें शामिल हैं कांगड़ा का त्रियुंड, लाका और इंद्रहार दर्रा। एक रत्‍‌न की तरह धर्मशाला के मुकुट पर चमकता त्रियुंड पर्यटकों को खूब आकर्षित करने लगा है।

नौ किमी. की तीखी चढ़ाई

मैक्लोडगंज से लगभग नौ किमी. की तीखी चढ़ाई और दुर्गम रास्तों से होकर यहां पहुंचा जा सकता है। विदेशी सैलानियों का भी यह पसंदीदा स्थल है। 2828 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुंड में धौलाधार पर्वत श्रंृखला के बेहद नजदीक से दीदार होते हैं। त्रियुंड से खूबसूरत कांगड़ा घाटी को निहारा जा सकता है।

तीन महीने त्रियुंड जाना जोखिम भरा

त्रियुंड एक ऐसा ट्रैक माना जाता है, जहां लगभग पूरे साल ट्रैकिंग के शौकीन पहुंचते हैं। दिसबंर से फरवरी तक यहां बर्फबारी होने के कारण जाना जोखिम भरा होता है। हिमपात वाले महीनों को छोड़कर साल में कभी भी त्रियुंड की राह पकड़ सकते हैं।

इंद्रहार की राह भी रोमांचक

त्रियुंड से आगे पर्यटक इंद्रहार ग्लेशियर तक पहुंच सकते हैं। इसके लिए त्रियुंड से सुबह आगे का ट्रैक शुरू होता है। त्रियुंड से पांच किमी. आगे ल्हेस केव आता है। यहां चार घंटे के बाद पहुंचा जा सकता है। आप दूसरे दिन यहां रुकें। यहां अगले दिन इंद्रहार ग्लेशियर के लिए ट्रैकिंग शुरू करें। करीब 6-7 घंटे का पैदल सफर तय कर इंद्रहार पहुंच सकते हैं। इस पूरे ट्रैक को बिना किसी पंजीकृत गाइड या ट्रैवल एजेंसी के न करें।

यह स्थल भी हैं दर्शनीय

त्रियुंड से लौटकर आप कुछ दिन मैक्लोडगंज में भी बिता सकते हैं। यहां मैक्लोडगंज मार्केट, दलाईलामा टेंपल, भागसूनाग, भागसूनाग वॉटरफॉल, धर्मकोट दर्शनीय स्थल है। इसके अलावा नड्डी से धौलाधार का नजारा, यहां की डल झील व मैक्लोडगंज के समीप सेंट जोन चर्च भी दर्शनीय स्थल हैं।

कैसे पहुंचें

त्रियुंड धर्मशाला का एक हिस्सा है। यह मैक्लोडगंज से करीब नौ किमी. आगे पहाड़ी में है। त्रियुंड जाने के लिए मैक्लोडगंज से पैदल या फिर धर्मकोट होते हुए गलू नामक स्थान तक टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं। इससे आगे पैदल सफर शुरू कर सकते हैं। कांगड़ा हवाई अड्डे तक दिल्ली से नियमित तीन हवाई उड़ानें हैं। कांगड़ा एयरपोर्ट धर्मशाला से 10 किमी. दूर गगल में है। गगल से टैक्सी या बस से धर्मशाला पहुंच सकते हैं। धर्मशाला से आपको मैक्लोडगंज पहुंचना होगा। मैक्लोडगंज के लिए धर्मशाला बस स्टैंड से टैक्सी, जीप या बसों के माध्यम से पहुंच सकते हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू व मनाली से धर्मशाला के लिए नियमित सामान्य व वॉल्वो बस सेवा उपलब्ध है। धर्मशाला का नजदीकी ब्राडगेज रेलमार्ग पठानकोट है। जहां से बस या टैक्सी से धर्मशाला पहुंच सकते हैं।

बरतें सावधानियां

-त्रियुंड जंगल व पहाड़ी के टॉप में हैं। रास्ते बेहद कठिन हैं। ऐसे में त्रियुंड जाते समय गलू में पुलिस पोस्ट में पंजीकरण जरूर करवाएं।

-त्रियुंड जाने के लिए पंजीकृत गाइड की सेवाएं जरूर लें। बिना गाइड के जा रहे हैं, तो मुख्य रास्ते से इधर-उधर न जाएं।

-त्रियुंड में रहने की व्यवस्था पहले करा लें। यहां रात को मौसम बेहद ठंडा होता है। बिना बुकिंग के परेशान होना पड़ सकता है।

-बारिश व बर्फबारी के दौरान त्रियुंड में धुंध व बादल होते हैं। रास्ता भटक गए हैं और अंधेरा हो रहा है, तो घबराए नहीं। आप सुरक्षित ठिकाना ढूंढ लें और पुलिस की मदद लें।

-त्रियुंड की पहा़डि़यों में भालू व तेंदुआ भी पाया जाता है। ऐसे में अकेले कहीं भी जंगल की तरफ न जाएं।

रात ठहरने के लिए व्यवस्था

त्रियुंड में वन विभाग का विश्राम गृह है। उसकी बुकिंग वन विभाग धर्मशाला कार्यालय से बुकिंग करवाई जा सकती है। यहां निजी गेस्ट हाउस व टेंट की भी व्यवस्था है। इसके लिए मैक्लोडगंज व भागसूनाग में ऑनलाइन बुकिंग होती है।

खाने में मिलते हैं दाल-चावल, मैगी

त्रियुंड में कुछ अस्थायी दुकानें हैं। जहां आपको दाल व चावल मिल सकते हैं। इसके अलावा, मैगी व चाय का भी लुत्फ ले सकते हैं। वहां टेंट या गेस्ट हाउस में पसंद का भी आर्डर बुकिंग के दौरान दे सकते हैं।