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डोनाल्ड ट्रंप की शादी का गवाह रहे सहारा के न्यूयॉर्क स्थित प्लाजा होटल को खरीदेगा कतर

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कानूनी विवाद में फंसे सहारा समूह के न्यूयॉर्क स्थित प्लाजा होटल को खरीदने के लिए कतर राजी हो गया है.

नई दिल्ली: कानूनी विवाद में फंसे सहारा समूह के न्यूयॉर्क स्थित प्लाजा होटल को खरीदने के लिए कतर राजी हो गया है. न्यूयॉर्क के सबसे बड़े आइकॉनिक बिल्डिंग की कीमत 600 मीलियन डॉलर (42 अरब रुपये) लगी है. यह होटल कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का था. कतर सरकार होटल का पूरा स्वामित्व खरीदेगी. इसमें 75 फीसदी स्टेक भारतीय बिजनेस समूह सहारा इंडिया परिवार का है. हालांकि यह सौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है. कतर पिछले दशक में पश्चिम के बड़े होटलों और लग्जरी प्रॉपर्टी को खरीद रहा है ताकि वह गैस और तेल एक्सपोर्ट से इकट्ठा पैसे को इन्वेस्ट कर सके. कतर, लिक्विड नेचुरल गैस दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है. वह पहले से ही लंदन में ‘द सेवॉय’ और ‘द कनॉट’ जैसे ऐतिहासिक होटलों का मालिक है. कतर निवेश प्राधिकरण ने वोक्सवैगन और ग्लेनकोर में भी निवेश किया है.

ट्रंप का रह चुका है प्लाजा
कथित तौर पर आतंकवाद का समर्थन करने के लिए दोहा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कतर के विदेशी निवेश की गति खाड़ी संकट के बीच धीमा होने की उम्मीद थी. हालांकि कतर ने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि आर्थिक बहिष्कार उसकी संप्रभुता को कमजोर करने का प्रयास है. प्लाजा होटल डील पिछले साल जून में नाकाबंदी की शुरुआत के बाद से कतर द्वारा पश्चिमी संपत्ति बाजार में सबसे बड़ा निवेश है. ट्रंप ने 1988 में प्लाजा खरीदा था. सहारा अपने अध्यक्ष सुब्रत रॉय के लिए वित्तीय कठिनाइयों के बीच कई सालों तक अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रहा है. यह होटल अपने एतिहासिक इवेंट के लिए भी जाना जाता है. अमेरिका के सबसे बड़े बैंड बीटल्स ने यहां परफॉर्मेंस दी थी. मार्ला मेपल्स और वर्तमान राष्ट्रपति ट्रंप की शादी का गवाह रह चुका है. हॉलीवुड की कई फिल्मों में यह होटल देखने को मिल चुका है.

वित्तीय संकट से अगले वित्त वर्ष तक बाहर निकल आएगा सहारा
सहारा समूह ने दावा किया है कि वह लंबे समय से चल रहे वित्तीय संकट से अगले वित्त वर्ष तक बाहर निकल आएगा. समूह ने कहा है कि वह कई नये क्षेत्रों में व्यावसाय शुरू कर एक बार फिर से प्रमुख भारतीय उद्योग समूह का दर्जा हासिल कर लेगा. सहारा समूह ने अपनी वित्तीय स्थिति पर समाचार पत्रों में जारी एक विस्तृत विज्ञापन के माध्यम से कहा है कि उसने पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा करा दी है. समूह ने कहा कि इस राशि पर मिलने वाला ब्याज भी नियामक के पास बिना किसी इस्तेमाल के पड़ा हुआ है जबकि पिछले पांच वर्षों में इसमें से निवेशकों को महज 91 करोड़ रुपये ही दिये गये. इसकी वजह यह भी हो सकती है कि कंपनी पहले ही अपने ज्यादातर निवेशकों को भुगतान कर चुकी है.

14 लाख कर्मचारियों की समस्या होगी दूर
यह पूछे जाने पर कि समूह 2019- 20 तक किस प्रकार से वित्तीय समस्याओं से बाहर निकल आयेगा, प्रवक्ता ने कहा , ‘ सहारा को इस बात का भरोसा है कि सेबी को जल्दी ही सहारा के निवेशकों से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन का निर्देश दिया जाएगा. ये दस्तावेज पहले ही सेबी के पास हैं. सहारा ने कहा कि पैसे पर लगी रोक हटते ही कंपनी, उसके 14 लाख कर्मचारियों और करोड़ों उपभोक्ताओं की दिक्कतें दूर हो जाएंगी.

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