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मध्‍य प्रदेश की शान मांडू, यहां आज भी जिंदा है रानी रूपमती का प्‍यार

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मानसून आते ही देश की कई जगहों पर पर्यटकों की संख्‍या में इजाफा होने लगता है और मध्‍य प्रदेश का मांडू भी ऐसे ही पसंदीदा शहरों में से एक है.

नई दिल्‍ली/रतलाम: मानसून आते ही देश की कई जगहों पर पर्यटकों की संख्‍या में इजाफा होने लगता है और मध्‍य प्रदेश का मांडू भी ऐसे ही पसंदीदा शहरों में से एक है. यूं तो मध्‍य प्रदेश को हिंदुस्‍तान का दिल कहा जाता है क्‍योंकि यहां के कई शहर पर्यटकों के बीच बहुत मशहूर हैं. मांडू को सिटी ऑफ जॉय के नाम से भी जाना जाता है. मांडू के महल और यहां का वातावरण मानसून में देखने लायक होता है.

इसी साल मार्च में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन तीन दिवसीय निजी प्रवास पर मध्यप्रदेश पहुंची थीं. हिलेरी ने मांडू का जहाज महल देखने के बाद कहा था कि मैंने यहां के शानदार पुरातात्विक स्थल देखे और आनंद लिया. मैंने भारतीय इतिहास के बारे में बहुत कुछ जाना.

आइए जानते हैं क्‍यों खास है मानसून में मांडू के नजारे देखना…

बाज-बहादुर और रानी रूपमती का प्‍यार 
देश की मशहूर प्रेम कहानियों में से एक रानी रूपमती और बाज-बहादुर के प्‍यार का गवाह मांडू है. मध्यप्रदेश के धार जिले में स्‍थित मांडू की हरियाली और यहां का रूपमती महल पर्यटकों को इस और खींच लाता है. रूपमती मालवा की मशहूर  गायिका थींं और सुल्तान बाज बहादुर उनकी आवाज के कायल थे. रूपमती बेहद खूबसूरत थीं. लोग कहते हैं कि बाज बहादुर ने रूपमती से अंतर्धार्मिक विवाह कर उसे अपनी रानी बनाया था. रूपमती एक किसान की बेटी थी और बाज बहादुर, मांडू के अंतिम स्वतंत्र सम्राट थे. रानी रूपमती के सौंदर्य की खबर जब अकबर को लगी तो उसने उन्‍हें अपना बनाने की ठान ली. उसने बाज बहादुर को पत्र लिखकर यह संदेश दिया कि वह रूपमति को दिल्ली के महल भिजवा दें. बाज ने जवाब में अकबर को एक संदेश भेजा जिसमें लिखा था कि वह अपनी रानी को मांडू भिजवा दे. अकबर ने मुगल सम्राट अधम खान को मांडू पर चढ़ाई करने के लिए भेजा और बाज बहादुर की सेना अधम खान के सामने नहीं टिक पाई. इस जंग में बाज बहादुर की मौत हो गई. रानी रूपमती ने अधम खान से तीन दिनों की मोहलत मांगी और  तीन दिन समाप्त होते ही रूपमती ने हीरे का चूर्ण खाकर अपनी जान दे दी. इस तरह यह कहानी यहीं समाप्त हो गई, बाज बहादुर और रूपमती का प्रेम पूरा ना हो सका.

महलों का शहर मांडू: रानी रूपमती महल 
मांडू में बाज बहादुर ने रानी रूपमती के लिए ऊंची पत्थर की चट्टानों पर महल बनवाया था. इन चट्टानों की ऊंचाई 400 मीटर है. लोगों का कहना हैं कि यहां पर रानी रूपमती सुबह उठकर पहले नर्मदा नदी के दर्शन करती थी और बाद में अन्न ग्रहण करती थी.

जहाज महल
मांडू का जहाज महल भी पर्यटकों के बीच काफी मशहूर है. इसे दो कृत्रिम तालाबों के बीच बनाया गया है. यह वास्तुकला का बड़ा ही सुन्दर नमूना है. जहाज महल अपनी सुन्दर महराबों, मण्डपों आदि के कारण बहुत प्रसिद्ध है. दूर से इस महल को देखने पर लगता है कि जैसे पानी में जहाज तैर रहा हो.

हिंडोला महल
इस महल में बैठकर राजा अपनी प्रजा की समस्याओं को सुना करते थे. यह महल एक तरफ से झुका होने के कारण दूर से देखने पर झूले जैसा दिखाई देता है इसलिए इसे हिंडोला महल कहा जाता है.

यहां भी जाएं 
– मांडू में भगवान राम की दुर्लभ चर्तुभूज प्रतिमा विराजित है जिसका ऐतिहासिक महत्‍व माना गया है. राम मंदिर के समीप एक महल का निर्माण शाह बदगा खान ने अकबर की पत्‍‌नी के लिए करवाया था. इसकी दीवारों पर अकबर कालीन कला के नमूने देखे जा सकते हैं.
– कुछ साल पहले मांडू में डायनासोर पार्क बनाया गया है. यहां करोड़ों साल पुराने डायनासोर के जीवाश्म के साथ ही उनका इतिहास जानने का भी मौका मिलता है.
– अन्य दर्शनीय स्थल हाथी महल, दरिया खान की मजार, दाई का महल, दाई की छोटी बहन का महल, मलिक मघत की मस्जिद और जाली महल भी मांडू की दर्शनीय इमारते हैं.
– इसी के साथ ईको प्वाइंट भी पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है. लोहानी गुफाएं और उनके सामने स्थित सनसेट प्वाइंट पर भी पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है.

कैसे जाएं
मांडू पहुंचने के लिए हर शहर से इंदौर पहले ट्रेन या फिर हवाई यात्रा के जरिए पहुंचा जा सकता है. इंदौर से मांडू की दूरी लगभग 90 किमी तो रतलाम से 95 किलोमीटर और धार से मांडू की दूरी लगभग 35 किमी है. मानसून मांडू घूमने का सबसे अच्‍छा समय है.

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