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भारत में लीगल है घोड़ों की रेस पर सट्टेबाजी,28 फीसदी जीएसटी लगता है.

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लॉ कमीशन (विधि आयोग) ने खेलों में सट्टेबाजी की छूट देने की सिफारिश की है. आयोग का कहना है कि सट्टेबाजी में प्रतिबंध से कालेधन और अपराध को बढ़ावा मिलता है. इसे देखते हुए इसे कानूनी मान्यता दी जाए. बता दें कि मौजूदा समय में केवल घोड़ों की रेस पर सट्टा लगाना ही कानूनी है. इस पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है.

आइए जानते हैं घोडों पर कैसे लगती है सट्टेबाजी…

> साल 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि घुड़दौड़ पर सट्टेबाजी करना सिर्फ किस्मत का खेल नहीं है, बल्कि इसमें हुनर भी है. ऐसे में इसे साल 1988 के पुलिस अधिनियम और 1930 गेमिंग अधिनियम के तहत नहीं लाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत में घुड़दौड़ पर सट्टेबाजी तेजी से बढ़ गई.

> भारत में पांच ‘टर्फ अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ हैं, जो देशभर में फैले 9 रेस कोर्स में घुड़दौड़ कराते हैं. सबके अपने जुआ स्टेशन्स और ट्रैकसाइड्स बुकमेकर्स हैं. घुड़दौड़ एक लीगल और रेगुलेटेड इंडस्ट्री है. यहां से आप ऑनलाइन कई इंटरनेशनल रेस में भी सट्टेबाजी कर सकते हैं.

> भारत में सिर्फ सिक्किम में ही ऑनलाइन जुए का लाइसेंस मिलता है. लेकिन उसने भी आजतक घुड़दौड़ के लिए कोई लाइसेंस नहीं जारी किया है. टर्फ अथॉरिटी को काफी मशक्कत करने के बाद रेस कोर्स और ऑफ कोर्स सेंटर पर पैरा म्यूचुअल सट्टेबाजी करने का मौका मिला है.

> दूसरी तरफ कोई ऐसा कानून नहीं है जो घुड़दौड़ में विदेशी ऑनलाइन सट्टेबाजी से रोके. ऐसे में यहां भी ये फल-फूल रहा है. अफ्रीका के केंटकी डार्बी से इग्लैंड की सेंट लेजर स्टेक्स तक भारतीयों के लिए शर्त लगाने के ढेरो मौके हैं.

ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा कारोबार
देश में घुड़दौड़ पर सट्टेबाजी पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं होने पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का भी बहुत बड़ा बाजार है. कई ऐसी वेबसाइट्स हैं, जिससे लोग ऑनलाइन सट्टेबाजी करते हैं. इसमें भारतीय करेंसी में पूरा हिसाब-किताब किया जा सकता है. खास बात ये है कि इन साइट्स पर घोड़ों के पालने, हुनर, रेस कोर्स, घुड़सवार, ट्रेनर के साथ-साथ इस खेल से जुड़ी सभी जानकारियां मिलेंगी, जिससे आप पेशेवर तरीक से शर्त लगा सकें.

भाव दे सकते हैं जुआरी
ऑनलाइन सट्टेबाजी में जुआरी भाव दे भी सकते हैं और शर्त लगा भी सकते हैं. यहां बिल्कुल शेयर बाजार की तरह काम होता है. कई साइट्स पर लाइव वीडियो के साथ घोड़ों के आगे रहने के लिए हेड टू हेड शर्तों के बारे में भी जानकारी ले सकेंगे.

आधार-पैन भी जोड़ने की सिफारिश की है
बता दें कि विधि आयोग की रिपोर्ट ‘लीगल फ्रेमवर्क: गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इनक्लूडिंग क्रिकेट इन इंडिया’ में सट्टेबाजी के नियमन के लिए और इससे कर राजस्व अर्जित करने के लिए कानून में कुछ संशोधनों की सिफारिश की गई है. आयोग ने सट्टेबाजी या जुए में शामिल किसी व्यक्ति का आधार या पैन कार्ड भी लिंक करने की और काले धन का इस्तेमाल रोकने के लिए नकदी रहित लेन-देन करने की भी सिफारिश की.

कानून बना सकती है संसद
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संसद सट्टेबाजी के नियमन के लिए एक आदर्श कानून बना सकती है. राज्य इसे अपना सकते हैं या वैकल्पिक रूप में संसद संविधान के अनुच्छेद 249 या 252 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधेयक बना सकती है. यदि अनुच्छेद 252 के तहत विधेयक पारित किया जाता है तो सहमति वाले राज्यों के अलावा अन्य राज्य इसे अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे.’

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