नई दिल्ली: सर्वोच्च कोर्ट देश की राजधानी में साल 2012 में दिल्ली गैंग रेप के मामले के तीन दोषियों की याचिकाओं पर सोमवार को अपना फैसला सुनाएगा. तीनों दोषी मृत्युदंड का सामना कर रहे हैं. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश सिंह की याचिकाओं पर दोपहर दो बजे फैसला सुनाएगी. चौथे दोषी अक्षय ठाकुर ने कोई समीक्षा याचिका दायर नहीं की है.

ये चारों 16 दिसंबर, 2012 में चलती बस में 23 साल की पैरा-मेडिकल छात्रा के साथ मिलकर दुष्कर्म करने और मारपीट करने के दोषी हैं. घटना के 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई थी. अभियुक्तों के वकील ने याचिका में कहा है कि असली अपराधियों को गिरफ्तार करने में असफल होने के बाद पुलिस ने निर्दोष लोगों को फंसाया था. शीर्ष अदालत ने पांच मई, 2017 को चार अभियुक्तों की मौत की सजा को बरकरार रखा था.

निर्भया गैंग रेेप कांड  

– 23 वर्षीया पैरामेडिकल छात्रा के साथ 16 दिसंबर, 2012 को चलती बस में गैंग रेप किया गया था
— 16 दिसंबर की रात पांच दरिंदों ने 23 वर्षीया निर्भया के साथ क्रूरतम तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया था
– जिसके चलते 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी
– दुष्कर्म की इस घटना के प्रति देशभर में गुस्सा और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था
– निर्भया ने मौत से 13 दिन तक जूझते हुए इलाज के दौरान सिंगापुर में दम तोड़ दिया था
– इस भयानक हादसे के बाद राजधानी को ‘दुष्कर्म की राजधानी’ की संज्ञा दी जाने लगी.
– राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा 2016-17 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में अपराध की उच्चतम दर 160.4 फीसदी रही
– 2016-17 की अवधि के दौरान अपराध की राष्ट्रीय औसत दर 55.2 फीसदी रहा
– 2016-17 की अवधि में दिल्ली में दुष्कर्म के 2,155 मामले दर्ज हुए
– 669 पीछा करने के मामले और 41 मामले घूरने के लगभग 40 फीसदी केस दर्ज हुए