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बागपत के जिला जेल परिसर में गैंगस्टर मुन्‍ना बजरंगी के सिर में मारी 10 गोलियां,प्रेम प्रकाश से डॉन तक सफ़र

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लखनऊ: बीजेपी विधायक की हत्‍या के आरोप में जेल में बंद गैंगस्‍टर मुन्‍ना बजरंगी की सोमवार को जेल परिसर में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. चौंकाने वाली यह घटना बागपत के जिला जेल परिसर में सुबह साढ़े छह बजे हुई. बताया जाता है कि मुन्‍ना बजरंगी के सिर में 10 गोलियां मारी गई हैं. बता दें कि मुन्‍ना बजरंगी 2005 में बीजेपी के विधायक कृष्णनंद राय की हत्या के आरोप में जेल में बंद था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, साथ ही जेलर को भी निलंबित कर दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गहन जांच और सख्त कार्रवाई की जाएगी. बागपत जिला जेल में जांच दल पहुंच गया है.

इस बीच, बजरंगी के वकील वी श्रीवास्तव ने कहा कि गैंगस्टर मुन्‍ना बजरंगी को रविवार रात झांसी से बागपत में जिला जेल में लाया गया था. साढ़े छह बजे जेल के ही एक कैदी ने उसे गोली मार दी और पिस्तौल को एक गटर में छुपा दिया. वकील ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले, हमने यूपी सीएम को मुन्ना बजरंगी के जीवन को खतरे के बारे में जानकारी दी थी. इस घटना से पहले बजरंगी की पत्नी ने अपने पति के जीवन के लिए खतरे का दावा करने के कुछ दिन बाद ही योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोप लगाया था.

5वीं पास मुन्‍ना बजरंगी कैसे बना गैंगस्‍टर
पूर्वांचल में अपराध की दुनिया का कुख्‍यात नाम प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्‍ना बरजंगी का जन्‍म 1967 में यूपी के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था. मुन्‍ना बजरंगी के पिता पारसनाथ सिंह ने उसे पढ़ाना चाहा, लेकिन उसने 5वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी. बताया जाता है कि 15 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे. जौनपुर के सुरेही थाना में 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद मुन्ना बजरंगी अपराध की दुनिया में कुख्‍यात होता चला गया.

राजनीति में आने को मुन्‍ना बजरंगी ने जेल से लड़ा चुनाव
2000 के दशक की शुरुआत में, मुन्‍ना बजरंगी ने समाजवादी पार्टी का समर्थन किया लेकिन बाद में मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की ओर रुख किया. 2005 में विधायक कृष्णनंद राय की हत्या हुई थी. इसमें मुन्‍ना बजरंगी का हाथ होने की बात आई और बजरंगी को 2009 से जेल में भेज दिया गया था. 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वह अपना दल और पीस पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में जेल से लड़ा. हालांकि, वह समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशी श्रद्धा यादव से हार गया और तीसरे स्थान पर रहा. पिछले साल बीजेपी की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने 48 अपराधियों को अपने वर्तमान जेलों से राज्य भर में अन्य जेलों में भेजने का आदेश दिया था. क्‍योंकि मुन्‍ना बजरंगी और मुख्तार अंसारी एक साथ थे. इसके बाद मुन्ना बजरंगी को पीलीभीत जेल में भेज दिया गया.

 

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