कभी-कभी ऐसा होता है कि हमट्रिप की प्लानिंग तो बहुत अच्छी कर लेते हैं लेकिन इतना बजट लगाने के बाद भी हमें उस डेस्टिनेशन पर घूमकर मजा नहीं आता. हमें लगता है काश! हम किसी और जगह जाते तो ट्रिप को ज्यादा एंज्वाय कर पाते. चलिए, हम आपको एक ही शहर के आसपास घूमने-फिरने की कई जगह बता रहे हैं. सबसे खास बात ये हैं कि लखनऊ के आसपास आपको जंगल सफारी के कई ऑप्शन मिलेगे. तो, अगर आप लखनऊ या आसपास के शहरों में रहते हैं तो एक बार तो जंगल सफारी ट्रिप पर जाना घाटे का सौदा नहीं है.

कुकरैल जंगल, लखनऊ 

 

कुकरैल लखनऊ के आउटर में स्थित मगरमच्छश, घड़ियाल और कछुओं का अभयारण्य  है। यह लखनऊ की आउटर रिंग रोड से सटा जंगल है। इसकी स्था पना 1978 में उत्तरर प्रदेश वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से की गई थी। जंगल की ताजी हवा के बीच लखनऊ के आस-पास के लोग यहां अक्सीर पिकनिक मनाने आते हैं।

कैसे पहुंचें: लखनऊ पहुंचने के बाद यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

कतर्निया घाट

 

शहर के शोर शराबे से यदि आप शांति से आकर छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो यहप स्था न आपके लिए एकदम परफेक्टद है। लखनऊ से 200 किमी दूर स्थित कतर्निया घाट में आपको धूप सेंकते घड़ियाल और घने जंगलों के बीच हाथी के झुंड आसानी से देखने को मिल सकते हैं। यहां रुकने के लिए वन्य  विभाग का कॉटेज भी उपलब्धी है। जिसके लिए आपको पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग करानी होगी। यहां जीप में जंगल सफारी के साथ गिरवा नदी में वोटिंग प्रमुख आकर्षण हैं।

कैसे पहुंचें : लखनऊ से बहराइच होते हुए आप यहां पहुंच सकते हैं।

किशनपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी 

 

दुधवा से 30 किमी दूर स्थित यह सेंचुरी 203 किमी के दायरे में फैली है। शारदा नदी के किनारे बसे किशनपुर के जंगलों में बारहसिंघा की भरमार है। तराई क्षेत्र होने के कारण यहां कई प्रकार के स्तनधारी जीव पाए जाते हैं। विभिन्नर प्रजातियों के हिरन यहां का मुख्ये आकर्षण हैं।

कैसे पहुंचें: दुधवा घूमने के बाद आप सड़क मार्ग से यहां पहुंच सकते हैं।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व

 

पीलीभीत टाइगर रिजर्व हिमालय की तलहटी में स्थित जंगल है। घाघरा और शारदा नदी इसे घिरे जंगल में कुल 36 टाइगर इस वक्तग मौजूद हैं। बंगाल टाइगर के अलावा यहां कई अन्य  दुर्लभ प्रजाति के जीव जन्तुट भी हैं। इनमें भारतीय तेंदुआ और हिरन के अलावा कई प्रकार के दुर्लभ पक्षी भी शामिल हैं।

कैसे पहुंचें: पीलीभीत लखनऊ, बरेली, नैनीताल और खटीमा से जुड़ा हुआ है। यहां आप आराम से ट्रेन या रोडवेज बस से भी पहुंच सकते हैं।

दुधवा नेशनल पार्क 

 

यह वाइल्डन लाइफ सेंचुरी 1958 में हिरनों के संरक्षण के लिए स्थाेपित की गई थी। उसके बाद 1977 में इसे टाइगर रिजर्व के रूप में नेशनल पार्क घोषित कर दिया गया। यह स्थापन बाघों और बारहसिंहा के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ से यह 230 किमी की दूरी पर स्थित है। दुधवा वन विश्राम भवन में बुकिंग मुख्य वन संरक्षक-वन्य-जीव- लखनऊ से होती है।

कैसे पहुंचें: लखनऊ से दुधवा आने के लिए सिधौली, सीतापुर, हरगांव, लखीमपुर, भीरा, से पलिया होते हुए दुधवा नेशनल पार्क पहुँच सकते हैं।