लखनऊ – लेखपालों की हड़ताल जारी रहने से जहां आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र बनवाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं राजस्व प्रशासन के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।

इस समय शिक्षण संस्थानों में दाखिलों का दौर चल रहा है। प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों की जरूरत होती है। छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की खातिर आवेदन करने के लिए भी इन प्रमाणपत्रों की आवश्यकता होती है।

बीती 25 जून से नौ जुलाई तक ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के लिए 12 लाख से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। लेखपालों की हड़ताल के कारण इन प्रमाणपत्रों के लिए सत्यापन का काम ठप हो गया है। शासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन का काम ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों को सौंपा थालेकिन, इन अधिकारियों के संगठन ने शासन को पत्र भेजकर लेखपालों की जिम्मेदारी उठाने से हाथ खड़ा कर दिया है। यह कहते हुए कि ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों पर पहले से ही काम का अत्यधिक बोझ है।

लेखपालों के आवेदन के कारण राजस्व प्रशासन के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। नये फसली वर्ष में खतौनियों के पुनरीक्षण और खातेदारों व सहखातेदारों के अंश निर्धारण की कार्यवाही पर भी असर पड़ा है। वरासत के मामले दर्ज करने का काम भी प्रभावित हुआ है। एंटी भू-माफिया अभियान के संचालन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है।

उधर उप्र लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने अपनी हड़ताल के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

उनका कहना है कि मुख्य सचिव के साथ चार जुलाई को हुई बैठक के बाद संघ ने कहा था कि प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद हम सरकार को अपने निर्णय से अवगत कराएंगे। चंद दिनों का इंतजार किये बगैर शासन ने लेखपालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। लेखपाल संघ के प्रदेश महामंत्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मथुरा में 50 लेखपालों को जेल भेजा गया था। विभिन्न जिलों में 300 से 400 लेखपाल निलंबित किये जा चुके हैं जबकि 100 से अधिक लेखपालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी जा चुकी हैं।

पुलिस ने दौड़ाए लेखपाल, तीस हिरासत में मथुरा : सरकार और उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की वार्ता विफल होने के बाद दोनों के बीच टकराव बढ़ गया है। सोमवार को सदर तहसील में धरने से लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष को पुलिस जबरन उठा ले गई। गिरफ्तारी का विरोध करने पर पुलिस ने लेखपालों से अभद्रता और मारपीट की। गुस्साए लेखपाल दोबारा धरने पर बैठे तो पुलिस ने तीस को हिरासत में ले लिया।

दोपहर को एडीएम कानून व्यवस्था रमेश चंद्र, एसपी सिटी श्रवण कुमार सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. बसंत लाल अग्रवाल भारी फोर्स के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। पुलिस ने लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह को उठा लिया और धकियाते हुए जीप में बैठा लिया। इसका विरोध कर रहे साथी लेखपालों से पुलिस ने अभद्रता और मारपीट कर दी। इससे भगदड़ मच गई।

गोवर्धन तहसील में तैनात लेखपाल अरविंद सिंह को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों को पुलिस सदर थाने ले गई। लेखपालों के बीच एडीएम कानून व्यवस्था ने दो शर्त रखीं कि वह एस्मा लागू होने के कारण धरना न दें और दूसरा कोई भी स्वेच्छा से गिरफ्तारी देना चाहे तो दे सकता है। लेखपाल दोबारा धरने पर बैठ गए। पुलिस ने 30 अन्य लेखपालों को हिरासत में लिया और सभी को पुलिस लाइन भेज दिया।

अलीगढ़ में लेखपाल संघ के 25 पदाधिकारी निलंबित

अलीगढ़ : शासन से सख्ती के बाद भी हड़ताल कर रहे लेखपालों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के निर्देश पर एसडीएम ने लेखपाल संघ के करीब 25 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। लेखपाल संघ के तत्वावधान में आठ सूत्रीय मांगों को लेकर तीन जुलाई से लेखपाल कार्य बहिष्कार कर तहसीलों पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। इससे लोगों के आय, मूल, जाति समेत अन्य प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे थे। शासन स्तर से कई उन्हें हड़ताल खत्म करने के निर्देश दिए गए।

लेखपाल मानने को तैयार नहीं थे। सोमवार से लेखपालों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा ने बताया कि डीएम ने सभी एसडीएम को लेखपाल संघ के पदाधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। एसडीएम ने संघ के जिला और तहसील अध्यक्ष, मंत्री समेत अन्य पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। जिले में करीब 25 लेखपाल निलंबित किए गए हैं।