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न फोन, न इंटरनेट, 29 साल एक टापू पर अकेले निर्वस्त्र रहकर इस आदमी ने कुदरत के सौंदर्य को जिया

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हम लोग ज़िन्दगी की एक बड़ी रकम घर बनाने में लगा देते हैं. हम घर बनाते हैं ताकि आराम से जी सकें. हम सबके लिए अच्छे से जीना कितना अहम है. लेकिन एक इन्सान है जिसके लिए अच्छे से जीना नहीं अच्छे से मरना मायने रखता है. उसने अपने मरने के लिए जगह भी तय कर ली है. जापान के मसाफूमी नागासाकी की आखिरी ख्वाहिश है कि वो सोतोबनारी आईलैंड पर मर सकें.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

सोतोबनारी आईलैंड ही मसाफूमी नागासाकी की ज़िन्दगी है. मसाफूमी 82 साल के हैं और पिछले 29 सालों से सोतोबनारी आईलैंड पर अकेले रह रहे हैं. सोतोबनारी आईलैंड जापान के इरियोमोटो में स्थित है.

साल 2014 में अल्वरो सिरेज़ो नागासाकी के साथ पांच दिन बिता के आए थे. नागासाकी को अपनी पिछली ज़िन्दगी के बारे में बात करना बिल्कुल पसंद नहीं. वो अपने बारे में बहुत कम बात करते हैं. अल्वरो को दिए इंटरव्यू में नागासाकी ने कहा-

‘शहर में सब मुझे मूर्ख समझते थे. मुझे मूर्ख की तरह ही ट्रीट किया जाता था. यहां मुझे बिल्कुल वैसा महसूस नहीं होता. यहां, आईलैंड पर मुझे किसी के बोलने के अनुसार काम नहीं करना होता. मैं बस प्रकृति के नियमों को मानता हूं. आप प्रकृति पर शासन नहीं कर सकते इसलिए आपको प्रकृति के नियमों का पालन करना पड़ता है.’

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

नागासाकी हफ्ते में एक बार पास के गांव जाकर खाने का और उनकी ज़रूरतों का सामान ले आते हैं. उनकी बड़ी बहन उन्हें कुछ पैसे भी भेजती हैं. पहले नागासाकी को लगा था कि वो पूरी तरह स्वतंत्र होकर वहां रह सकते हैं. उन्होंने वहां पर खेती करने की कोशिश की लेकिन सोतोबनारी आईलैंड की ज़मीन पर खेती नहीं हो सकी. इसलिए नागासाकी को अपनी बहन से पैसे लेने पड़ते हैं. आम दुनिया की चहल-पहल से इतर इस आईलैंड के पास नागासाकी के लिए कोई और ही दुनिया थी.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

पहले नागासाकी आम लोगों की ही तरह आईलैंड पर रहा करते थे. कपड़े भी पहनते थे. एक बार आईलैंड पर ज़ोरदार आंधी आई. इस आंधी में नागासाकी का लगाया हुआ टेंट, उनके कपड़े और जो भी सामान था सब गुम हो गया. तब नागासाकी ने तय किया कि उन्हें बहुत अधिक सामान की क्या ही ज़रूरत है. इस आंधी के बाद से ही नागासाकी ने कपड़े पहनना छोड़ दिया. उन्हें लगा कि इस आईलैंड पर कपड़े पहनने का कोई तुक नहीं है. नागासाकी पूरी तरह से निर्वस्त्र उस आईलैंड पर रहने लगे.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

जब नागासाकी को सामान लेने के लिए पास-गांव जाना होता है तब ही नागासाकी कपड़े पहनते हैं. भले ही नागासाकी कपड़े न पहनते हों पर वो हमेशा चप्पल ज़रूर पहनते हैं. आईलैंड पर काई बहुत होती है न तो नागासाकी उससे बचने के लिए चप्पल पहनकर रखते हैं.

नागासाकी शहर या लोगों के पास वापस जाना ही नहीं चाहते थे. वो दुनिया से दूर रहकर खुश थे. उन्होंने उस आईलैंड को ही अपनी दुनिय बना लिया था. नागासाकी नियमों के बड़े पाबंद हैं. किसी भी काम के लिए देर करना उन्हें नागवार है. नागासाकी ने अपने टेंट के सामने पेड़ से एक घड़ी लटका रखी है. इस ही घड़ी पर समय देखकर नागासाकी सारा काम करते हैं.

नागासाकी शाम साढ़े छह बजे से सुबह 8 बजे तक अपने टेंट में ही रहते हैं. इस समय में उन्हें कोई टेंट से बाहर नहीं निकाल सकता. इस समय में बहुत मच्छर होते हैं.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

सुबह उठकर नागासाकी पूरे बीच को अच्छी तरह से साफ करते हैं. अल्वरो का कहना है कि उन्होंने सोतोबनारी से ज़्यादा साफ कोई बीच देखा ही नहीं. नागासाकी बीच पर से कचरा, काई, लकड़ी आदि जो कुछ भी होता है उसे अलग करते हैं. लकड़ी को अलग कर वो खाना बनाने के लिए आग जलाने को रख लेते हैं. नागासाकी जंगल से लकड़ी तोड़ कर इस्तेमाल नहीं करते. जो लकड़ी अपने-आप टूट कर कचरे में फेंकी जाए, उसे ही अलग कर खुद के इस्तेमाल के लिए प्रयोग करते हैं.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

नागासाकी इस उम्र में भी ऊर्जा से भरपूर हैं. वो पूरा दिन काम करते हैं पर थकते बिल्कुल नहीं. हां, वो अक्सर अपनी चीज़ें बीच पर जहां-तहां भूल जाते हैं. नागासाकी को बाहरी वायरल इंफेक्शन से बहुत डर लगता है. नागासाकी का मन बहुत जल्दी बदल जाता है. वो कब गुस्सा होंगे, कब खुश कहना बहुत मुश्किल है. उनका यह व्यवहार उन्हें मनमौजी बनाता है. लेकिन जो भी नागासाकी से मिलेगा उसे उनका व्यक्तित्व आकर्षक ही लगेगा.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

नागासाकी शुरू में ग़लती से सोतोबनारी बीच पर आ गए थे. वो तो दुनिया से दूर कहीं भी रहना चाहते थे. एक मछवारे ने उन्हें इस बीच पर छोड़ दिया था. नागासाकी को लगा कि कोई उस बीच का मालिक होगा जो उन्हें वहां से हटा देगा. मछवारे ने उन्हें बताया कि वहां कोई नहीं आता. अगर कोई मालिक नहीं आता है तो वो वहां रह सकते हैं. नागासाकी शहर में रहते थे. उन्हें इस तरह के जीवन का कोई अभ्यास नहीं था लेकिन समय के साथ वो इस जगह में रहने के आदी हो गए. अब तो नागासाकी को सोतोबनारी आईलैंड से इतना प्यार है कि वो वहां मरना चाहते हैं.

मसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reutersमसाफूमी नागासाकी. फोटो क्रेडिट-Reuters

नागासाकी को धर्म से नफरत है. वो मानते हैं कि पूरी दुनिया में जो भी बुरा हो रहा है वो धर्म के कारण ही है. नागासाकी का मनना है कि धर्म लड़ाई और झगड़ो का कारण है. नागासाकी कहते हैं- ‘इस जगह को बचाने के लिए मैं जान लगा दूंगा. मैं इस आईलैंड को हमेशा बचा के रखूंगा. भले ही दुनिया पूरी तरह से बदल जाए पर मैं वापस नहीं जाऊंगा.’

नागासाकी की उम्र के साथ उनकी तबीयत बिगड़ रही है. जापान सरकार ने अप्रैल 2018 में नागासाकी को वापस शहर बुला लिया है.

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