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कुंभ 2019: प्लास्टिक नहीं, कुल्हड़ में मिलेगी चाय और दोना-पत्तल में खाना

Kumbha

‘क्लीन कुंभ, ग्रीन कुंभ’ अभियान के तहत यूपी सरकार इको-फ्रेंडली उत्पादों को देगी बढ़ावा.

उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक पर प्रतिबंध संबंधी सरकार के दिशा-निर्देशों की झलक, इलाहाबाद में अगले साल लगने वाले प्रयाग कुंभ-2019 में भी दिखेगी. सरकार ऐसे इंतजाम कर रही है कि कुंभ के दौरान प्रयाग आने वाले श्रद्धालुओं को प्लास्टिक या थर्मोकोल के प्लेट-ग्लास में न तो चाय पीनी पड़े और न ही भोजन करना पड़े. इसके लिए सरकार ने कुंभ मेले के दौरान प्लास्टिक की जगह मिट्टी के पारंपरिक कुल्हड़ और दोना-पत्तल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का फैसला किया है. ‘क्लीन कुंभ, ग्रीन कुंभ’ अभियान के तहत सरकार की योजना है कि 12 वर्षों पर लगने वाले इस प्राचीन मेले के दौरान कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के कुल्हड़ का इस्तेमाल हो. साथ ही पेड़-पौधों से मिलने वाले पत्तों से तैयार दोना-पत्तल को भी बढ़ावा दिया जाए. इसके लिए सरकार ने कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और साधु-संतों के विभिन्न अखाड़ों को भी जागरूक करने की योजना बनाई है.

13 अखाड़े और 5 हजार संगठन आएंगे कुंभ में
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद में देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं. कुंभ मेले के प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी ने अखबार को बताया कि साधु-संतों के 13 अखाड़े और 5 हजार से ज्यादा धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक संगठन कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद आएंगे. सरकार की योजना है कि इन सभी साधु-संतों और संगठनों की सहायता से प्लास्टिक-मुक्त कुंभ मेले के आयोजन को सफल बनाया जाए. इसके लिए सरकार साधु-संतों और विभिन्न संगठनों को प्लास्टिक की जगह, मिट्टी के कुल्हड़ और दोना-पत्तल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूक करेगी. अधिकारी ने बताया कि मेला-परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखना बड़ी चुनौती है, जिसे श्रद्धालुओं की मदद से ही पूरा किया जाएगा.

आसपास के जिले के कुम्हारों को मिलेंगे अवसर
कुंभ मेला प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मेले के दौरान पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर इस तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं. कुंभ मेले के डीआईजी/एसएसपी के.पी. सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘चाय, कॉफी आदि पीने के लिए कुल्हड़ की व्यवस्था की जा रही है. हमारा मकसद है कि कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को इको-फ्रेंडली माहौल मिले. कुंभ मेले में आने वाले साधु-संत, अखाड़ों के महंत और अन्य श्रद्धालु प्लास्टिक के बजाए, इको-फ्रेंडली वस्तुओं का इस्तेमाल करें, इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए ही प्रशासन ये प्रयास कर रहा है.’ उन्होंने बताया कि मिट्टी के कुल्हड़ और दोना-पत्तल जैसी चीजों को इस्तेमाल कर फेंक देने के बाद भी इससे पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचती है. सिंह ने बताया, ‘अनुमान है कि मेले के दौरान 5 से 8 लाख कुल्हड़ और दोना-पत्तल के रोजाना इस्तेमाल का अनुमान है. इसके मद्देनजर इलाहाबाद के आसपास के जिलों और प्रदेश के अन्य इलाकों में कुल्हड़ बनाने वाले कुम्हारों से संपर्क किया जा रहा है. इन कुम्हारों को ही मेले के दौरान कुल्हड़ों की सप्लाई का ऑर्डर दिया जाएगा. यही नहीं, कुल्हड़ों की खपत को देखते हुए उन्हें मेला परिसर में भी जगह दी जाएगी.’

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