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कश्मीर में इस साल रिकॉर्ड युवाओं ने उठाया बंदूक

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साल 2018 के 7 महीने में हथियार उठाने वाले कश्मीरी युवाओं की संख्या पिछले साल के 12 महीने के आंकड़े को पार कर गई है.

श्रीनगर. कश्मीर से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंतित होने वाली खबर आ रही है. ट्रीब्यून की खबर के मुताबिक, साल 2018 के 7 महीने में हथियार उठाने वाले कश्मीरी युवाओं की संख्या पिछले साल के 12 महीने के आंकड़े को पार कर गई है. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अबतक 128 युवाओं ने आतंकवादी संगठन ज्वाइन किया है. बता दें कि पिछले साल 126 युवाओं ने हथियार उठाया था. यह संख्या साल 2010 के बाद सबसे ज्यादा थी. शोपियां और पुलवामा में 70 युवाओं ने आतंकी संगठन ज्वाइन किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा में युवा हिंसाग्रस्त इलाके दक्षिण कश्मीर से सामने आए हैं. इसमें पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग के युवा शामिल है. बता दें कि पिछले साल कई ऑपरेशन में लगभग दो दर्जन नए मिलिटेंट मार गिराए गए. इनमें ज्यादातर ने थोड़ी बहुत ही ट्रेनिंग हासिल की थी.

इस तरह डेटा जुटाती है पुलिस
जम्मू कश्मीर पुलिस इंटेलिजेंस और जोनल विंग अलग-अलग डेटा एकत्रित करती हैं, जिससे ये मालूम हो सके कि कितने युवाओं ने मिलिटेंट ग्रुप को ज्वाइन किया है. इसके लिए घर से गायब हुए युवाओं की फैमिली से मिली जानकारी या सोशल साइट्स पर पोस्ट किए गए फोटो से उनकी गिनती करते हैं. हालांकि, उनके आतंकवादी संगठन ज्वाइन करने को लेकर पुलिस क्रॉस चेक करती है उसके बाद ही उन्हें गिनती है.

बुरहान वानी की मौत के बाद से जुड़ने लगे युवा
बता दें कि लोकल युवाओं का आतंकवादी संगठन से जुड़ना बुरहान वानी की हत्या के बाद से ही शुरू हो गया था. इसमें सबसे ज्यादा युवा हिजबुल मुजाहिद्दीन को ज्वाइन कर रहे हैं. अजहर मसूद के जैश-ऐ-मोहम्मद में 25 नई भर्तियां हुई हैं. वहीं, 9 ने अल बदर ज्वाइन किया.

ये है डेटा
डेटा पर गौर करें तो साल 2010 में 54 भर्ती, साल 2011 में 23, साल 2012 में 21, साल 2013 में 16, साल 2014 में 53, साल 2015 में 66, साल 2016 में 88, साल 2017 में 128 और साल 2018 में जुलाई तक 128 युवाओं ने आतंकवादी संगठनों को ज्वाइन किया है.

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