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वाघा बॉर्डर पर लगेंगे नए गेट, दिखेगा दोनों देशों की रिट्रीट सेरेमनी का नजारा

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अब एक ही डिजाइन के गेट लगाए जाएंगे. दोनों तरफ के गेट अब स्‍लाइड वाले होंगे.

अमृतसर: भारत और पाकिस्‍तान के बीच अटारी-वाघा बॉर्डर पर दोनों ओर से नए गेट लगाए जाएंगे. नए गेट के निर्माण का काम जोरों पर है और उम्‍मीद है कि 14 अगस्‍त तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. गेट बदलने का मुख्‍य मकसद यह है कि दोनों तरफ के दर्शक दोनों देशों की रिट्रीट सेरेमनी देख सकें. यह छठा मौका है जब वाघा बॉर्डर की गेटों को बदला जाएगा.

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गेट बदलने के प्रस्‍ताव पर फैसला बीएसएफ तथा पाक रेंजर्स के डायरेक्‍टर जनरल की दिल्‍ली में हुई बैठक में लिया गया था. अभी जो गेट लगे हैं, उनके डिजाइन अलग-अलग हैं. लेकिन अब एक ही डिजाइन के गेट लगाए जाएंगे. दोनों तरफ के गेट अब स्‍लाइड वाले होंगे. पिलरों की गोलाई कम होगी. गेट के पास दोनों देशों के अपने झंडे लगे होंगे. इसका फायदा यह होगा कि दर्शक दोनों ओर की रिट्रीट सेरेमनी देख पाएंगे. गेट तैयार करने के काम में लगे कर्मियों के अनुसार उन्‍होंने 14 अगस्‍त तक यह काम पूरा करने का लक्ष्‍य तय किया है.

ड्रम से बना था पहला गेट
भारत और पाकिस्‍तान के बीच बॉर्डर लाइन 11 अक्‍टूबर को खींची गई थी. 9 अक्‍टूबर को यहां दोनों देशों की फौजों की बटालियन को तैनात किया गया. भारत की ओर से ब्रिगेडियर महिंदर सिंह चोपड़ा और पाकिस्‍तान की तरफ से ब्रिगेडियर नासिर अहमद को तैनात किया गया था. सीमा रेखा की पहचान के लिए दोनों ओर एक-एक ड्रम लगाया गया और चूने की लकीर खींची गई. यही ड्रम वाघा बॉर्डर पर लगाए गए पहले गेट थे.

1990 के दशक में कड़ी हुई सुरक्षा
वाघा बॉर्डर के ये गेट आजादी के 57 दिन बाद वजूद में आए. आजादी के साथ बंटवारे के बाद भी लाहौर तक जाने वाली जीटी रोड पर कोई बंदिश नहीं थी. लोग बेरोकटोक आ-जा रहे थे. 11 अक्‍टूबर तक ऐसे ही हालात रहे. पाकिस्‍तान की ओर से इसका फायदा भी उठाया गया क्‍योंकि कई बार भारतीय सीमा में आकर लोग लूटपाट कर वापस लौट जाते थे. 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के उदय और पाकिस्‍तान की ओर से उसे मिल रहे समर्थन को देखते हुए बॉर्डर पर चौकसी बढ़ाई गई. गेट भी मजबूत लगाए गए. 1998 में पूरे बॉर्डर पर फेंसिंग की गई. 2001 में दर्शकों के लिए रिट्रीट गैलरी बनी तो गेट को और बड़ा किया गया. यही गेट दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात का भी जरिया है.

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