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जस्टिस लोया मामले में कोर्ट की निंदा पर घिरे प्रशान्त भूषण: अवमानना याचिका दाखिल

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याचिका में कहा गया है कि प्रशान्त भूषण पहले भी अपने खिलाफ आए फैसलों पर कोर्ट के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करते रहे हैं.

नई दिल्ली/लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के जज और देश की न्याय व्यवस्था की मीडिया में आलोचना करने की वजह से एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशान्त भूषण घिरते नजर आ रहे हैं. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में प्रशान्त भूषण और दो प्रमुख न्यूज चैनल के खिलाफ एक अवमानना याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रशान्त अपने खिलाफ आए फैसलों को लेकर कोर्ट के खिलाफ अमर्यादित बयान देते रहे हैं.

लखनऊ के अधिवक्ताओं ने दाखिल की याचिका
लखनऊ के पांच अधिवक्ताओं रंजना अग्निहोत्री, वंदना कुमार, पंकज कुमार वर्मा, दुर्गेश कुमार तिवारी और आशुतोष मिश्रा, द्वारा दाखिल की गई याचिका में जज लोया और सहारा बिरला पेऑफ मामले में प्रशान्त भूषण के मीडिया के सामने दिए गए बयान को उच्चतम न्यायालय की अवमानना मानते हुए यह याचिका दाखिल की गई है. जज लोया मामले में कोर्ट की निन्दा पर प्रशान्त भूषण के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर उन पर कार्यवाही की मांग की गई है.

सहारा बिरला पेऑफ मामला
याचिका में कहा गया है कि कॉमन कॉज की तरफ से सहारा बिरला पेऑफ मामले में प्रशान्त भूषण ने तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बिरला सहारा द्वारा तथाकथित पेऑफ दिए जाने के पूरे मामले की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच कराए जाने की मांग की थी. कोर्ट ने हालांकि ये कहते हुए जांच के आदेश देने से इन्कार कर दिया था कि कुछ बेतरतीब कागजों के आधार पर महत्त्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों की जांच कराए जाने का कोई औचित्य नहीं है.

याचिका दायर करने वाले अधिवक्ताओं का कहना है कि कोर्ट के अलग से जांच कराने से मना करने पर प्रशान्त भूषण ने मीडिया को बयान दिया था कि ‘कोर्ट का ये फैसला इतिहास में सबसे खराब फैसला है’ और ये दिन सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का ‘काला दिवस’ है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रशान्त भूषण पहले भी अपने खिलाफ आए फैसलों पर कोर्ट के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करते रहे हैं.

जज लोया की मृत्यु की जांच की थी मांग
याचिकाकर्ताओं ने तहसीन पूनावाला मामले का भी बिन्दु उठाया है. गौरतलब है कि इस मामले में माननीय न्यायालय के सीबीआई के विशेष जज की तथाकथित सन्दिग्ध मृत्यु की जांच का आदेश न करने के फैसले पर प्रशान्त भूषण ने न्यायपालिका को आड़े हाथों लिया था. कुछ न्यूज चैनल द्वारा भूषण के बयानों को प्रमुखता से दिखाए जाने की वजह से उनके खिलाफ भी अवमानना याचिका दाखिल कर कार्यवाही की मांग की गई है.

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