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भारत को कमजोर करने की चीन की नई चाल, नेपाल की करेगा मदद

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ऐसे में नेपाल को अब दूसरे देशों से व्यापार करने के लिए पूरी तरह से भारत पर नहीं निर्भर रहना पड़ेगा.

नई दिल्ली. चीन दक्षिण एशिया में लगातार अपनी पैठ बनाता जा रहा है. साथ ही वह पाकिस्तान के बाद अब नेपाल से अपने रिश्ते ठीक करने के लिए कई नए समझौते और उदारवादी निर्णय ले रहा है. अब चीन ने नेपाल के लिए अपने सारे बंदरगार खोल दिए हैं. ऐसे में नेपाल को अब दूसरे देशों से व्यापार करने के लिए पूरी तरह से भारत पर नहीं निर्भर रहना पड़ेगा.

दोनों देशों के अधिकारियों के बीच गुरुवार की रात से चल रही मैराथन बैठक के बाद इस पर निर्णय हुआ. इसके लिए नेपाल के प्रधानमंत्री के मार्च 2016 के दौरे से ही बात हो रही थी. जिसे अब जाकर फाइनल शेप दिया गया है.

बताया जा रहा है कि साल 2015 के मधेशी आंदोलन के बाद से नेपाल में जरूरी चीजों की आपूर्ति पूरी तरह से प्रभावित हो गई थी. इसके बाद से ही नेपाल ने भारत पर आत्मनिर्भरता कम करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया था. इसी का नतीजा है कि नेपाल अब चीन के शैनजेन, लियानयुगांग, झाजियांग और तियानजिन सी-पोर्ट का इस्तेमाल शुरू कर देगा. नेपाल की सीमा से सबसे नजदीक तियानजिन सी-पोर्ट है, जिसकी भी दूरी लगभग तीन हजार किमी है.

बताया जा रहा है कि इस डील से नेपाल के लिए कारोबार के नए दरवाजे खोले हैं. नेपाल के औद्योगिक और वाणिज्यिक मंत्रालय के संयुक्त सचिव रवि शंकर सैंजू ने बताया कि अन्य देशों के साथ कारोबार के लिए नेपाली कारोबारियों को चीन के सीपोर्ट तक पहुंचने के लिए रेल और सड़क मार्ग की अनुमति भी मिलेगी.

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