इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ पोल निकट है, वहीं आचार संहिता का खुलेआम माखौल उड़ाया जा रहा है। इलाहाबाद आने वाले मुख्य मार्गों, शहर के प्रमुख चौराहों पर छात्रनेताओं ने अपनी होर्डिंग-बैनर लगा रखे हैं। हैंडबिल, पर्चे कैंपस में आने वाले नवागत छात्रों को बांटे जा रहे हैं। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन भी केवल खानापूरी तक सीमित है। 11 छात्रनेताओं को नोटिस दी गई है। जिन्हें नोटिस दी गई है उनकी होर्डिंग आज भी प्रमुख चौराहों पर लगी हुई हैं। छात्रनेताओं ने एक तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन की  नोटिस को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है।

 इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ पोल का बिगुल बज चुका है। विस्तृत कार्यक्रम भी जारी हो गया है। चुनावी समर के लिए छात्रनेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। कुछ पैनल से तो कुछ बिना पैनल के ही रणभूमि में उतर चुके हैं। हालांकि अभी आइसा को छोड़कर किसी ने भी अपना पैनल घोषित नहीं किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की नर्सरी ने कई चमकते सितारे दिए। यही कारण है कि जेएनयू के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ पोल का खासा महत्व है। यहां से जीतने वाले छात्रनेता की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रही है। यहां हर साल छात्रसंघ चुनाव में समाजवादी छात्रसभा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन अपने अपने छात्र प्रत्याशी इस समर में उतारते हैं। हालांकि अभी पैनल ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है।

  पिछली बार एबीवीपी के रोहित मिश्रा अध्यक्ष पद पर चुनाव जीतने में सफल रहे थे। एबीवीपी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में यह सफलता 30 वर्ष बाद मिली थी। यही कारण है कि इसको दोहराने का दबाव एबीवीपी पर सबसे ज्यादा रहेगा। इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय में भी एबीवीपी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद पर अपना कब्जा जमाया है। इससे भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एबीवीपी पर चुनाव जीतने का दबाव बढ़ गया है। समाजवादी छात्रसभा के सामने अध्यक्षी, उपाध्यक्षी व संयुक्त मंत्री पद को बनाकर रखने की चुनौती होगी। सछास के पास चुनाव जीतकर अखिलेश यादव की नजरों में चढऩे का मौका होगा।

….तो रद होगा नामांकन :

छात्रसंघ चुनाव 2018 में संभावित प्रत्याशियों के लिए पात्रता संबंधी मानदंडों का निर्धारण लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट के अनुपालन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ विनियम 2012 में शामिल किया जा चुका है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का अक्षरश: पालन करना अनिवार्य है। इसका उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों का नामांकन निरस्त कर दिया जाएगा।

-प्रो. आरएस दुबे, चीफ  प्रॉक्टर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

ये हैं लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें :

-चुनाव प्रक्रियाएं नामांकन एवं चुनाव परिणाम अधिकतम दस दिनों तक पूरे कर लिए जाएं।

-प्रत्याशी बनने की योग्यता यूजी के लिए 22 वर्ष, पीजी के लिए 25 वर्ष व शोध छात्र के लिए 28 वर्ष।

-प्रत्याशी के लिए कक्षाओं में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य।

-आपराधिक रिकार्ड, मुकदमा, सजा या अनुशासनात्मक कार्यवाही वाला छात्र प्रत्याशी योग्य नहीं।

-प्रत्याशी विश्वविद्यालय या कालेज का नियमित छात्र हो, पत्राचार कोर्स का छात्र अयोग्य होगा।

-चुनाव में अधिकतम एक प्रत्याशी पांच हजार रुपया खर्च करे।

-व्यय या दूसरे नियमों के उल्लंघन पर चुनाव निरस्त।

-मुद्रित पोस्टर, पम्फलेट या प्रचार सामग्री के प्रयोग की अनुमति नहीं।

-प्रचार के लिए लाउडस्पीकर, वाहन एवं जानवरों का प्रयोग अनुबंधित

ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज ने नामांकन 26 को :

ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज ने शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। महाविद्यालय में चुनाव प्रक्रिया 24 सितंबर से शुरू हो रही है। 24 व 25 सितंबर को नामांकन पत्रों का सुबह 11 बजे से अपराह्न दो बजे के बीच वितरण होगा। नामांकन पत्रों के लिए शुल्क 100 रुपये रखा गया है। चुनाव अधिकारी डॉ. शिव हर्ष सिंह ने बताया कि 26 सितंबर को विभिन्न पदों के लिए सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच नामांकन होगा। नाम वापसी व आपत्तियां 28 सितंबर को 11 से 12 बजे के बीच होगा। 28 सितंबर को ही नामांकन पत्रों की जांच व प्रपत्रों का सत्यापन व उसके बाद प्रत्याशियों की सूची चार बजे जारी होगी। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप प्रत्याशियों को एक से तीन अक्टूबर के बीच लिंगदोह समिति के अनुसार चुनाव प्रचार का अवसर दिया गया है। चार अक्टूबर को मतदान व मतगणना अभिकर्ताओं की नियुक्ति व मतदान की तैयारियां होंगी। पांच अक्टूबर को मतदान व मतगणना होगी। मतदान का समय सुबह 8:30 बजे से अपराह्न एक बजे तक रखा गया है। मतगणना दो बजे से होगी। मतगणना समाप्त होने के बाद परिणाम की घोषणा व नवनिर्वाचित प्रत्याशियों का शपथ ग्रहण समारोह होगा।

ऋचा पर होगा मानहानि का मुकदमा

विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय किया है कि जल्द ही पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह पर मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। ऋचा सिंह ने मनगढ़ंत और फर्जी तथ्यों का सहारा लेकर विश्वविद्यालय की छवि को ठेस पहुंचाने का काम किया है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय को झूठा पत्र लिखा, जिससे विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंची है। विवि के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. चितरंजन सिंह ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान ऋचा सिंह ऐसी हरकतें करके विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना चाहती हैं।

पीआरओ पर करेंगे मानहानि का मुकदमा :

विवि की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि पीआरओ का बयान मेरी सामाजिक एवं व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास है। गबन का मामला न होने की पुष्टि वित्त विभाग से की जा सकती है। आजादी के बाद विवि की प्रथम महिला अध्यक्ष होने के नाते मेरे द्वारा छात्रसंघ के बजट से एक रुपया भी नहीं लिया गया, बल्कि मैंने उल्टे विवि से पूछा था कि उस सत्र में बजट का पैसा विवि ने कहां पर खर्च किया? लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला। मैं पीआरओ पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराऊंगी।