“ऑपरेशन शंखनाद” का दिखने लगा असर, जशपुर में कम्युनिटी पुलिसिंग बनी मिसाल
जशपुर । जिले में अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन शंखनाद” का अब सकारात्मक और प्रेरणादायक परिणाम सामने आने लगा है। लंबे समय से गौ-तस्करी के मामलों में लिप्त रहा साईंनगरटोली गांव का कुख्यात गौ-तस्कर अमजद हजाम उर्फ बबलू अब अपराध की दुनिया को छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ गया है। गुरुवार को छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा पर स्थित उसके नवनिर्मित “बबलू शंख ढाबा” का लोकार्पण स्वयं एसएसपी शशि मोहन सिंह ने किया और इसके पहले ग्राहक बनकर चाय पी तथा कीमत भी अदा की। यह दृश्य न केवल पुलिस और अपराधी के बदले रिश्ते का प्रतीक बना, बल्कि पूरे जिले में सामाजिक पुनर्वास की नई मिसाल भी कायम कर गया।
गौ-तस्करी का कुख्यात चेहरा रहा है अमजद उर्फ बबलू : साईंनगरटोली गांव वर्षों से आपराधिक गतिविधियों, खासतौर पर गौ-तस्करी के मामलों के लिए बदनाम रहा है। इसी गांव का रहने वाला अमजद हजाम उर्फ बबलू (उम्र 40 वर्ष) पिछले कई वर्षों से गौ-तस्करी के कारोबार में सक्रिय था। उसके खिलाफ थाना लोदाम में गौ-तस्करी के तीन संगीन अपराध पहले से दर्ज हैं। पिछले आठ माह से वह पुलिस से बचते हुए अलग-अलग राज्यों में फरारी काट रहा था, लेकिन लगातार दबाव और सटीक निगरानी के कारण अंततः उसे आत्मसमर्पण करना पड़ा।
एसएसपी से मुलाकात ने बदली जिंदगी : जेल से छूटने के बाद अमजद की एसएसपी शशि मोहन सिंह से मुलाकात हुई। एसएसपी ने उसे स्पष्ट शब्दों में समझाया कि अपराध का कोई भविष्य नहीं होता। इससे केवल डर, बदनामी और जेल ही मिलता है। आने वाली पीढ़ियां भी अंधकार में धकेल दी जाती हैं, जबकि ईमानदार जीवन ही सम्मान और सुरक्षा देता है। इन बातों का अमजद पर गहरा मानसिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ा। पहली बार उसे यह अहसास हुआ कि अपराध से जुड़कर न तो स्थायी कमाई संभव है और न ही परिवार सुरक्षित रह सकता है। इसके बाद अमजद ने अपराध से पूरी तरह तौबा करने और ईमानदारी से जीवन यापन करने का संकल्प लिया।
‘बबलू शंख ढाबा’ से शुरू हुआ नया जीवन : अपराध छोड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अमजद ने छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा पर मुख्य मार्ग के किनारे “बबलू शंख ढाबा” की शुरुआत की। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आना-जाना होता है, जिससे उसे स्थायी आजीविका मिलने की उम्मीद है। ढाबे के उद्घाटन के लिए अमजद ने स्वयं एसएसपी को आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।
04 दिसंबर 2025 को एसएसपी शशि मोहन सिंह मौके पर पहुंचे और विधिवत ढाबे का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ढाबे में चाय पी और उसकी कीमत अदा कर अमजद को उसके नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। आसपास के ग्रामीण, व्यापारी, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
ग्रामीणों और युवाओं को दिया अपराध छोड़ने का संदेश : इस अवसर पर एसएसपी ने ग्रामीणों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अपराध किसी समस्या का समाधान नहीं है। एक अपराधी अपने साथ अपने पूरे परिवार और समाज का भविष्य भी बर्बाद कर देता है। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से अपराध छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहता है, तो जशपुर पुलिस उसके साथ खड़ी है। यह कम्युनिटी पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण है। एसएसपी ने युवाओं से अपील की कि वे बहकावे में न आएं और अपने भविष्य को अंधकार की ओर न धकेलें। पुलिस और समाज मिलकर उन्हें सही दिशा देने के लिए सदैव तत्पर है।
जशपुर पुलिस की पुनर्वास आधारित पहल : एसएसपी की इस पहल को जिले में सामाजिक पुनर्वास के प्रभावी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। जशपुर पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि अपराध की जड़ों पर प्रहार करते हुए उन्हें सुधार का अवसर देना भी है।
अमजद हजाम उर्फ बबलू ने भावुक होकर कहा — “अब मैं जीवन भर अपराध से दूर रहूंगा। एसएसपी साहब ने जब समझाया, तभी मुझे लगा कि जिंदगी बदली जा सकती है। अब मैं अपने परिवार का पालन-पोषण पूरी ईमानदारी से करूंगा।”
समाज के लिए बना प्रेरणादायक उदाहरण : अमजद का अपराध की दुनिया छोड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ना केवल उसके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। जशपुर पुलिस की यह पहल जिले में सामाजिक सौहार्द, अपराध मुक्त वातावरण और जन-विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा— “यह कम्युनिटी पुलिसिंग का एक सशक्त उदाहरण है। पुलिस का प्रयास केवल दंड देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सुधारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। ऐसे पुनर्वास के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।”
